سلاسل التغريدات
संभवतः आपने पूर्ण लेख ध्यान से नहीं पढ़ा और पहले ही टिपण्णी करने लगे इसलिए भ्रांति हो रही है। भ्रांति का दूसरा कारण मन का काम भी हो सकता है जबकि हम अन्य बात कह रहे हैं। https://t.c...
वर्तमान समय में देखा जा सकता है कि पिता का पुत्री के प्रति विशेष ममत्व प्रदर्शित होता है। वह बेटी को प्रसन्न देखने के लिए विविध उपक्रम करते हैं। इसके पीछे गंभीर मनोविज्ञान है। कम...
राजा का पद देखने में मनोरम् लगता है किन्तु सात्विक महानुभाव के लिए उसका निर्वहन कठिन है। महाभारत में क्षात्रधर्म को निष्ठुर कहा गया है। क्षात्रधर्म का अनुपालन करने पर अपने पुत्रों,...
समान आचार संहिता से हिन्दुओं के अस्तित्व पर आघात होगा। इसको व्यवहारसिद्ध करने के लिए उन बिन्दुओं को लिया जाएगा जिसका अनुपालन सभी कर पाएँ, जिसे lowest common denominator कह लीजिए।...
उनके हृदय में एक पीड़ा है, जलन है, त्रास है। वे उन्हीं माताओं की संतानें हैं जिन्हें बलपूर्वक अपहरण करके, बोली लगाकर, सर्वस्व लूटकर, स्वजनों को मारकर या विधवा बनाकर भोग किया गया।...
Democracy नामक व्यवस्था विफ़ल सिद्ध हुई है। इसमें बिना योग्यता के मंत्रीपद प्रदान किए जाते हैं। इसका constitution भी उत्तम व्यवस्था व न्याय प्रदान करने में समर्थ नहीं है। सम्यक् वि...
सत्यभाषण व मौन रहने से वाक् सिद्धि की प्राप्ति होती है। व्यायाम से स्वास्थ्य और अन्न से ऊर्जा की सिद्धी होती है। ब्रह्मचर्य से बल व तेज की सिद्धी होती है। सिद्धी का अर्थ हवा में उ...
किसी स्त्री का विवाह से पूर्व अन्य स्वजाति/परजाति पुरुष से दैहिक सम्बन्ध रहा हो और विवाह भले ही स्वजाति पुरुष से हो जाए फिर भी संतति वर्णसंकर होगी। मनोगत् मलिनता का महत्व तक होता ह...
यह सृष्टि त्रिगुणात्मक है। सत, रज व तम- तीनों सदैव विद्दमान रहते हैं। युगों में इन्हीं का अनुपात कम-अधिक होने के कारण सदाचार-दुराचार आदि में वृद्धि-न्यूनता का प्रभाव दिखाई पड़ता है...
आरोप लगाया जाता है कि कम आयु (वस्तुतः उचित आयु) में विवाह करने से नारी के स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव होता है। यह निराधार तर्क है। स्वास्थ्य बिगड़ता कैसे है? शून्य या अत्याधिक काम के...
ब्राह्मण्यां ब्राह्मणेनैवमुत्पन्नो बाह्मणः स्मृतः ॥ तस्य धर्म प्रवक्ष्यामि तद्योग्यं देशमेव च ॥ ब्राह्मणी के गर्भ में ब्राहाण के औरस से उत्पन्न हुआ मनुष्य ही ब्राहाण कहाता है; उसक...
आज पति द्वारा पत्नी को प्रणिपात (चरणस्पर्श) किया जा रहा है जोकि अधर्म है। इससे पत्नी को नरक और पति को अधोगति की प्राप्ति होगी। भगवान श्रीकृष्ण राधाजी के चरण पकड़ते थे, इस प्रसंग क...