Ayush Sharma
Ayush Sharma

@ayusharma_bh

3 تغريدة 7 قراءة May 19, 2024
किसी स्त्री का विवाह से पूर्व अन्य स्वजाति/परजाति पुरुष से दैहिक सम्बन्ध रहा हो और विवाह भले ही स्वजाति पुरुष से हो जाए फिर भी संतति वर्णसंकर होगी। मनोगत् मलिनता का महत्व तक होता है।
गोस्वामी तुलसीदासजी ने कहा- भए बरन संकर कलि भिन्नसेतु सब लोग। कलियुग में सभी वर्णसंकर हो गए हैं।
स्त्री का दूषित होना वर्णसंकरता का मूल है। कुल में पापों की वृद्धि होना स्त्री के दूषित होने का कारण है।
उदाहरण के लिए किन ब्राह्मण की बेटियों का अंतर्जातीय विवाह होता है? जो (कई पीढ़ियों से) गायत्रीजाप नहीं करते हैं, शुद्ध आहार नहीं करते हैं अर्थात् परजाति का भोजन पाते हों,
श्राद्धभोज के पश्चात शुद्धि नहीं करते हैं, कर्मकाण्ड व ज्योतिष से जीविकोपार्जन करने पर गायत्री न करते हों, विधवाविवाह होता हो, वैदिक रीतियों से दूर हों।
कुल में बढ़ा हुआ पाप, स्त्री के माध्यम से कुल को ग्रास बना लेता है।

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