Ayush Sharma
Ayush Sharma

@ayusharma_bh

6 تغريدة 2 قراءة Feb 09, 2025
वर्तमान समय में देखा जा सकता है कि पिता का पुत्री के प्रति विशेष ममत्व प्रदर्शित होता है। वह बेटी को प्रसन्न देखने के लिए विविध उपक्रम करते हैं।
इसके पीछे गंभीर मनोविज्ञान है। कम आयु की नारी पत्नीरूप में प्राप्त नहीं होने के कारण उक्त मनोदशा निर्मित होती है।
कम आयु में विवाह होगा कैसे, जीविकोपार्जन में विलम्ब से लेकर विवाह की आयु में कानूनी प्रतिबन्ध हेतु हैं।
इसे गमन की दृष्टि से विचार नहीं करें। हमनें पचास वर्ष की आयु के व्यक्तियों से भी सुना है कि एक बार पुनः सोलह वर्ष के हो जाएँ तो क्या बात हो।
शरीर की अवस्था बढ़ जाने से इंद्रियाँ शिथिल हो जाती हैं परन्तु मन नहीं मरता है, मन में कामना बनी रहती हैं। उन्हीं कामनाओं के फलस्वरूप हमारा जन्म हो रहा है।
जैसे संस्थानों में कार्य करने वाले व्यक्ति हमें बताते हैं कि वे मन लगाने के लिए स्त्रियों को भर्ती करते हैं।
गमन करने की भावना नहीं होने पर भी रूप, वाणी, स्पर्श आदि के द्वारा नेत्रेंद्रीय, कर्णेन्द्रिय, त्वकेंद्रिय का सुख प्राप्त करने की अंतर्निहित भावना बनी रहती है।
हम किसी भी व्यक्ति को सुख क्यों प्रदान करना चाहते हैं? उनके सुख से हमें अधिक सुख प्राप्त होता है अर्थात्
सम्पूर्ण उपक्रम 'मैं' के लिए होता है। अभीष्ट व्यक्ति-वस्तु की कामना या अभीष्टरूपी मान्यता बने रहने पर उसे पाने का परीक्षापोरक्ष प्रयास लगा रहता है।
परोक्षापरोक्ष*

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