Ayush Sharma
Ayush Sharma

@ayusharma_bh

4 تغريدة 2 قراءة Jun 17, 2024
उनके हृदय में एक पीड़ा है, जलन है, त्रास है। वे उन्हीं माताओं की संतानें हैं जिन्हें बलपूर्वक अपहरण करके, बोली लगाकर, सर्वस्व लूटकर, स्वजनों को मारकर या विधवा बनाकर भोग किया गया।
जिसका जन्म दुःख, हिंसा, अशांति, दुष्कर्म आदि के फ़लस्वरूप होगा, वह समाज में भी यही वितरित करेगा।
उनके मनोभाव को समझिए, शास्त्र वह दृष्टि प्रदान करते हैं। उनका हृदय तत्क्षण जलता रहता है। वे लड़ने (हिंसा) के लिए सदैव तैयार रहते हैं। वे लड़ाई (जिह**) की ताक में रहते हैं क्योंकि प्रवृति अनुसार उनके कल्याण का यही सरल मार्ग जान पड़ता है।
इस देह से मुक्ति, हृदय की जलन से छुटकारा।
वे उस दिन की बाट लगाते हैं कि कोई माई का लाल आए और उन्हें शांत कर दे। वे स्वयं को मारने के नए-नए प्रकल्प ढूँढते हैं। वे मक़सद के नाम पर मरने के लिए तत्पर रहते हैं अर्थात् उन्हें जीवित रहने में रुचि नहीं है। उनका कोई विशेष कर्तव्य नहीं है... यज्ञ, दान, जप, तप इत्यादि कुछ नहीं है।
वे धार्मिकों से भिड़ते हैं, उनपर आक्षेप-प्रहार करते हैं। वे मारने से अधिक मरने की चाह रखते हैं। वे मारकर जीवित नहीं रहना चाहते हैं अपितु फिदा*यीन होना गौरव और तथाकथित पारलौकिक भोग को चाहते हैं। वे मरना चाहते हैं।
अतएव उनकी सद्गति के लिए उनके देह को शांत करना आवश्यक है।

جاري تحميل الاقتراحات...