Ayush Sharma
Ayush Sharma

@ayusharma_bh

5 تغريدة 2 قراءة Jun 23, 2024
समान आचार संहिता से हिन्दुओं के अस्तित्व पर आघात होगा। इसको व्यवहारसिद्ध करने के लिए उन बिन्दुओं को लिया जाएगा जिसका अनुपालन सभी कर पाएँ, जिसे lowest common denominator कह लीजिए।
उन्हें आर्योचित शील-सदाचार के स्तर तक उठाने के स्थान पर हिन्दुओं को नीचे गिराकर भ्रष्ट किया जाएगा।
उदाहरण के लिए यदि दो बच्चों का कानून लागू हो जाए। दो से अधिक बच्चों पर सरकारी नौकरी, सरकारी राशन, सरकारी आवास इत्यादि का लाभ नहीं प्राप्त होगा।
विदित रहे कि मुसलवान कभी सरकारी नौकरी-राशन-आवास आदि के लिए सरकार के आगे गिड़गिड़ाते नहीं है। वह केवल रसूल के प्रति निष्ठावान कौम है।
मुसलवान को अब तक समझे नहीं? उनके लिए सभी जन्नत (अल्लाह) पहुँचने के एक ज़रिया हैं। वे न अखिलेश यादव के प्रति निष्ठावान हैं और न असदुद्दीन ओवैसी के प्रति कटिबद्ध हैं। केवल अल्लाह। माता, पिता, भाई, बहन सबको त्याग सकते हैं किन्तु रसूल को नहीं, फिर नौकरी क्या है?
मुसलवान वह कौम जो इस्लाम के विरुद्ध जाने पर अपने भाई या पिता को भी मार देती है। ओवैसी भी तभी तक अच्छे हैं जब तक इस्लामपरस्त हैं।
कोई सरकारी सुविधा दे तो अच्छा है और न दे तो कोई समस्या नहीं है। अल्लाह की रहमत से सब कुछ प्राप्त होता है, ऐसी दृढ़ धारणा है।
हिन्दू सोचता है कि 'मैंने' बालक किए हैं जबकि मुसलवान मानता है अल्लाह बालक देता है इसलिए पालेगा भी वही।
वे बालक चार-पाँच ही करेंगे, नौकरी न मिले, मकान न मिले, राशन न मिले। देने वाला अल्लाह है, किसी नेता के मोहताज़ थोड़े हैं। इसी निष्ठा के कारण अन्य स्वयं उनके आगे झुकते हैं।

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