सत्यभाषण व मौन रहने से वाक् सिद्धि की प्राप्ति होती है। व्यायाम से स्वास्थ्य और अन्न से ऊर्जा की सिद्धी होती है। ब्रह्मचर्य से बल व तेज की सिद्धी होती है।
सिद्धी का अर्थ हवा में उड़ना ही नहीं होता है। यह सिद्धि चिड़िया के पास जन्मजात होती है जबकि मनुष्य धारणा के बल पर पाते हैं।
सिद्धी का अर्थ हवा में उड़ना ही नहीं होता है। यह सिद्धि चिड़िया के पास जन्मजात होती है जबकि मनुष्य धारणा के बल पर पाते हैं।
अधिकतर व्यक्ति कम-अधिक अंशों में स्त्रीलंपट होते हैं। स्त्री से उपरत् होना माने मन पर विजय प्राप्त कर ली हो।
आज सामान्य जन से लेकर नेता तक नारियों के लिए हितप्रद व्यवस्था क्यों नहीं बना पा रहे हैं? जिसके जीवन में सतोगुण का उदय होगा वह स्वतः भगवान और संतों की ओर आकृष्ट होगा।
आज सामान्य जन से लेकर नेता तक नारियों के लिए हितप्रद व्यवस्था क्यों नहीं बना पा रहे हैं? जिसके जीवन में सतोगुण का उदय होगा वह स्वतः भगवान और संतों की ओर आकृष्ट होगा।
अहिंसा नामक सिद्धी का क्या फ़ल है? ऐसे व्यक्ति के समक्ष हिंसक व्यक्ति भी अपनी हिंसक प्रवृत्ति का त्याग कर देता है। वह अजातशत्रु होता है।
स्त्रीलंपटता से उपरत् होने का क्या फ़ल है? ऐसा व्यक्ति स्त्रियों के हित में भाषण तथा समर्थ हुआ तो व्यवस्था का गठन करता है।
स्त्रीलंपटता से उपरत् होने का क्या फ़ल है? ऐसा व्यक्ति स्त्रियों के हित में भाषण तथा समर्थ हुआ तो व्यवस्था का गठन करता है।
आज कुछ शीर्ष नेता हैं जो स्वयं को अहिंसावादी और ब्रह्मचारी दर्शाते हैं किन्तु ब्रह्मचर्य नामक सिद्धी का फ़ल उनके व्यवहार में क्यों नहीं दिखाई देता है?
अन्य सुप्रसिद्ध नेताओं की बात नहीं कहेंगे क्योंकि उनके स्त्रैणभाव से सभी परिचित हैं। कोई छिपा विषय नहीं है।
अन्य सुप्रसिद्ध नेताओं की बात नहीं कहेंगे क्योंकि उनके स्त्रैणभाव से सभी परिचित हैं। कोई छिपा विषय नहीं है।
एक लोकप्रिय नेता हैं जो स्वयं को साधु, संन्यासी, अहिंसक और ब्रह्मचारी प्रस्तुत करते हैं जोकि सतोगुण के लक्षण हैं।
परन्तु उनके व्यवहार में नकली आचार्यों को बढ़ावा देना, स्त्रियों का अपकर्ष करने वाली नीति-कानून बनना, मंदिरों का दमन करना है। यह तमोगुण में लक्षण हैं।
परन्तु उनके व्यवहार में नकली आचार्यों को बढ़ावा देना, स्त्रियों का अपकर्ष करने वाली नीति-कानून बनना, मंदिरों का दमन करना है। यह तमोगुण में लक्षण हैं।
इसका अर्थ है बौद्धों जैसी झूठी अहिंसा और ब्रह्मचर्य जीवन में प्रतिष्ठित है। इसलिए वर्ण आश्रम व्यवस्था की उपयोगिता सिद्ध है। अहिंसा सत्य अस्तेय ब्रह्मचर्य अपरिग्रह आदि को जीवन में ढालने की क्रमिक विधा का नाम वर्ण आश्रम धर्म है अन्यथा विस्फोट हो जाता है।
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