ब्राह्मण्यां ब्राह्मणेनैवमुत्पन्नो बाह्मणः स्मृतः ॥
तस्य धर्म प्रवक्ष्यामि तद्योग्यं देशमेव च ॥
ब्राह्मणी के गर्भ में ब्राहाण के औरस से उत्पन्न हुआ मनुष्य ही ब्राहाण कहाता है; उसके धर्म और उसके रहने योग्य देश को कहता हूँ ॥
तस्य धर्म प्रवक्ष्यामि तद्योग्यं देशमेव च ॥
ब्राह्मणी के गर्भ में ब्राहाण के औरस से उत्पन्न हुआ मनुष्य ही ब्राहाण कहाता है; उसके धर्म और उसके रहने योग्य देश को कहता हूँ ॥
कृष्णसारो मृगो यत्र स्वभावेन प्रवर्त्तते ॥
तस्मिन्देशे वसेद्धर्माः सिद्धयंति द्विजसत्तमाः ॥
हेः द्विजसत्तमगण ! जिस देश में कालामृग स्वभाव से ही विचरण करे उस देश में ब्राह्मण निवास करे, कारण कि किए हुए धर्म उसी देश में सिद्ध होते हैं ॥
— हारीतस्मृति
तस्मिन्देशे वसेद्धर्माः सिद्धयंति द्विजसत्तमाः ॥
हेः द्विजसत्तमगण ! जिस देश में कालामृग स्वभाव से ही विचरण करे उस देश में ब्राह्मण निवास करे, कारण कि किए हुए धर्म उसी देश में सिद्ध होते हैं ॥
— हारीतस्मृति
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