Ayush Sharma
Ayush Sharma

@ayusharma_bh

5 تغريدة 1 قراءة Feb 09, 2025
संभवतः आपने पूर्ण लेख ध्यान से नहीं पढ़ा और पहले ही टिपण्णी करने लगे इसलिए भ्रांति हो रही है। भ्रांति का दूसरा कारण मन का काम भी हो सकता है जबकि हम अन्य बात कह रहे हैं।
एक माता भी अपने बच्चे को खिलाती है तो वह उसे स्पर्श करने का सुख प्राप्त करती है, बच्चे की तोतली मीठी वाणी सुनकर कर्णसुख प्राप्त होता है, प्यारा बालक देखकर नयनसुख प्राप्त होता है... इसे इस भांति समझना चाहिए।
एकाएक माता को बीस वर्ष का बच्चा पकड़ा दीजिए तो क्या होगा? नन्हे बच्चे को खिलाने की पूर्ति किसी अन्य बालक या पशु से करेंगी। विकल्प तो विकल्प ही होता है।
सामान्यतया पिता के सन्दर्भ में भी वह नयनसुख, कर्णसुख, स्पर्शसुख का अभिलाषी होता है।
यदि यही वार्तालाप, उपहार, शरारत आदि से वह तृप्त हो जाता तो ऐसी स्थिति नहीं होती अर्थात् पुत्री को उचित अवस्था में दान कर देता। इस तृप्ति का वैध्यसाधन एकमात्र पत्नी है परन्तु पत्नी अति विलम्ब से प्राप्त हो रही है क्योंकि आज विवाह विलम्ब से होते हैं जिसमें दोनों परिपक्व हो जाते हैं
तब भोलेपन वाली वार्तालाप, पुष्प आदि उपहार का आदान-प्रदान नहीं हो पाता है।
हमनें लेख में हर पुरुष या हर पिता के लिए नहीं कहा है। बुद्धिमान और विवेकी व्यक्ति मन के जाल में फंसने से बच जाते हैं।

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