तहक्षी™ Tehxi
तहक्षी™ Tehxi

@yajnshri

9 تغريدة 24 قراءة Aug 25, 2024
आपके शरीर में कुंडलिनी के सात चक्रों की स्थिति केवल आप स्वयं ही जान सकते है, सीख लीजिए कैसे?
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कुंडलिनी साधना आरंभ करने से पहले, आपको अपने शरीर में चक्रों की उचित स्थिति के बारे में जानना होगा। छह चक्र और सहस्रार एक ही पंक्ति में हैं और उनके बीच का अंतर कुछ सेंटीमीटर से अलग हो सकता है, जो आपके शरीर की लंबाई, गठन और ढाँचे पर निर्भर करता है। चक्र की सटीक स्थिति का पता होना बहुत मायने रखता है!
1. चक्र की सटीक स्थिति का पता होना बहुत आवश्यक है। ऐसा करने से, आपके लिए सफलता पाने के अवसर बढ़ जाते हैं क्योंकि जब आप सही बिंदु पर ध्यान रमाते हैं, तो छह माह के भीतर वहाँ गहन संवेदना उत्पन्न होने लगती है। आपको सिखाया जा रहा है कि आप अपने शरीर में चक्रों के उचित स्थान का पता कैसे लगा सकते हैं।
यदि आप दाएँ हाथ से काम करते हैं तो दाएँ हाथ का प्रयोग करें और अगर आप बाएँ हाथ से काम करते हैं तो बाएँ हाथ का प्रयोग करें।
1. अपने हाथ की सबसे छोटी अंगुली नाभि पर रखें। आपकी नाभि, नाभि केंद्र या मणिपुर चक्र है।
2 . अपने हाथ को पूरी तरह से ऊपर की ओर खींचें और देखें कि अंगूठे की नोक कहाँ स्पर्श करती है। यह आपका हृदय केंद्र व अनाहत चक्र है।
3. अब अपनी छोटी अंगुली ठीक उसी जगह रखें, जहाँ आपके अंगूठे ने हृदय केंद्र को स्पर्श किया था और एक बार फिर से अपने हाथ को पूरा फैलाते हुए यह देखें कि अंगूठा किस बिंदु को छू रहा है। यह आपका विशुद्धि चक्र है।
4. एक बार फिर अपनी छोटी अंगुली ठीक उसी जगह रखें, जहाँ आपके अंगूठे ने कंठ केंद्र को स्पर्श किया था और एक बार फिर से अपने हाथ को पूरा फैलाते हुए यह देखें कि अंगूठा किस बिंदु को छू रहा है। यह आपका आज्ञा चक्र है।
5. अपनी छोटी अंगुली ठीक उसी जगह रखें, जहाँ आपके अंगूठे ने भौंहों के मध्य केंद्र को स्पर्श किया था और एक बार फिर से अपने हाथ को पूरा फैलाते हुए यह देखें कि अंगूठा किस बिंदु को छू रहा है। यह आपका सहस्रार है।
6. अब नाभि पर वापिस जाएँ। अपने अंगूठे को नाभि पर रखें, अपने हाथ को नीचे की ओर फैलाएँ और अब आप अपने स्वाधिष्ठान चक्र को स्पर्श कर रहे हैं।
7. उस स्थान पर छोटी अंगुली रखें, जहाँ अभी आपका अंगूठा था और अपने हाथ को पूरी तरह से नीचे की ओर फैलाएँ। अब आपकी छोटी अंगुली जिसे छू रही है, वह आपका मूलाधार चक्र है।
आपके हाथ की मध्यमा अंगुली के पोर से ले कर दूसरे हाथ की मध्यमा के पोर तक की लंबाई, आपके शरीर की लंबाई जितनी होती है। एक से दूसरे चक्र के बीच भी एक गिरह का अंतर होता है। केवल आपका हाथ ही आपके शरीर में स्थित चक्रों की वास्तविक स्थिति का अनुमान लगा सकता है।

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