Ayush Sharma
Ayush Sharma

@ayusharma_bh

6 تغريدة 4 قراءة Feb 01, 2023
न उन्हें श्रीराम से मतलब है और न बुद्ध से।
हमारे शब्दों को यथार्थ सिद्ध मानिए। उनकी बुद्धि केवल इतना जानती है कि हमारा विरोध करना है... वे उस दिन की प्रतीक्षा करते हैं जब कोई उनके विषाद को शांत कर दे।
पवित्रग्रंथों को अपशब्द कहने और जलाने वाले जानते हैं क्या संकेत करते हैं?
वे सभी हमारे लिए दर्पणसमान हैं और हमारे प्रमाद को दर्शाकर सुधारक का कार्य कर रहे हैं।
वे हमें हमारी हैसियत बता रहे हैं कि देख मनुवादी तू मेरा कुछ नहीं कर सकता। तू झूठा रामभक्त है, यदि है सच्चा रामभक्त तो मुझे भी मिला उस राम से।
स्वयं को सनातनी कहने वाले, कैसा है तेरा सनातन जो तू नष्ट हो रहा है। हिन्दुशेर तू समझता है कि तेरी सरकार है देख आज तेरे भगवान को गाली दूँगा और पवित्र ग्रंथ जलाऊँगा और तू ध्यान तक नहीं देगा। तुझे मनुस्मृति या रामचरितमानस के अपमान का कोई शोक नहीं है, जाएगा होटल में और खाएगा रसमलाई।
मानस जला दी, तूने आधे दिन का भी शोक मनाया? यह सब हमें सांकेतिकरूप में उन अधम प्राणियों द्वारा कहा जाता है, शास्त्रसिद्ध उनकी यही मंशा होती है। जो जितना निकृष्ट प्राणी होता है वह उतना आपराधिक हीनकृत्य करता है जिससे उसे भयंकर दण्ड प्राप्त हो और वह त्राण पा सके।
उन्होंने देवी-देवताओं को गाली दी किंतु देश में एक भी आक्रोश प्रदर्शन नहीं हुआ, इससे सिद्ध होता है कि हम सभी का प्रमाद चरम पर है। शक्तिविहीन के वश का क्या?
समर्थवान बनिए, शीघ्र ही हम सभी अवश्य उठेंगे और जब धरती पर अपना पांव रखेंगे तब किसी को सोने नहीं देगा। यह सभी हमारे पुरुषार्थ, वीर्य और धृति की परीक्षा ले रहे हैं।
स्वार्थ से ऊपर उठिए अन्यथा अधर्म का पक्ष विजय हो जाएगा और हमारी आने वाली पीढ़ियाँ उन्हीं का अनुगमन करेंगी।

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