Ayush Sharma
Ayush Sharma

@ayusharma_bh

4 تغريدة 3 قراءة Sep 20, 2021
क्यों मंत्रों का जाप अत्यंत सावधानी से करना चाहिए और बिना दीक्षाग्रहण किए कुछ मंत्रों का जाप बिल्कुल नहीं करना चाहिए?
जानें कैसे एक 'उकार' के त्रुटिपूर्ण उच्चारण से मंत्रफल में अनर्थ हो जाता है। (१/४)
वृत्रासुर जन्म बहुत अच्छा उदाहरण है। इन्द्र को मारने वाला पुत्र हो- ऐसी इच्छा रख करके त्वष्टा यज्ञ करने लगे और यज्ञ के मन्त्र में थोड़ी भूल हो गयी- *इन्द्रशत्रुर्विवर्धस्व* बोलने के स्थान पर *ईन्द्रशत्रूविवर्धस्व* बोला गया। (२/४)
इन्द्र से द्वेष होने के कारण 'इ' को 'ई' - गुरु; और 'शत्रु को 'शत्रू' अर्थात उकार को भी ऊकार माने गुरु-स्वर में बोल देने से कृपा के मंत्र का भावार्थ बदल गया।
अर्थात् *इन्द्र को मारने वाला* के स्थान पर *इन्द्र से मरने वाला* ऐसा अर्थ हो गया। (३/४)
इससे इंद्र के हाथों मरने वाला पुत्र उत्पन्न हुआ।
मंत्र में भूल होने से त्राहि होती है। *भार्या रक्षतु भैरवी* के स्थानपर *भार्या भक्षतु भैरवी* बोला जाए तो क्या होगा?
यही कारण है मंत्र उच्चारण सबके लिए नहीं है और इन्हें सीमित रखा जाता था।
॥ जय श्रीमन्नारायण ॥
(४/४)

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