मंदिर में प्रवेश करने के बाद भक्तों को इन 22 पवित्र सीढ़ियों को चढ़कर द्वितीय आंतरिक द्वार (बैसी पाहाचा गुमुटा) तक पहुँचना होता है। इस द्वार को पार करने के बाद भक्त प्रांगण में पहुँचते हैं, जहाँ से वे मुख्य मंदिर में जाकर भगवान जगन्नाथ के दर्शन कर सकते हैं।
📌 धार्मिक मान्यता :
ऐसा माना जाता है कि जो भी भक्त इन सीढ़ियों को छूता है, उसके सभी पाप समाप्त हो जाते हैं। इसलिए भक्त इन सीढ़ियों को हाथ से स्पर्श करते हुए चढ़ते हैं और अपने बच्चों को भी इन सीढ़ियों पर धीरे-धीरे लुढ़काते हैं ताकि वे आध्यात्मिक आनंद प्राप्त कर सकें।
📌 धार्मिक मान्यता :
ऐसा माना जाता है कि जो भी भक्त इन सीढ़ियों को छूता है, उसके सभी पाप समाप्त हो जाते हैं। इसलिए भक्त इन सीढ़ियों को हाथ से स्पर्श करते हुए चढ़ते हैं और अपने बच्चों को भी इन सीढ़ियों पर धीरे-धीरे लुढ़काते हैं ताकि वे आध्यात्मिक आनंद प्राप्त कर सकें।
📌 इन 22 सीढ़ियों का आध्यात्मिक महत्व :
1. पहली पाँच सीढ़ियाँ (1-5): पाँच इंद्रियों (नेत्र, कान, नाक, जिह्वा और त्वचा) का प्रतीक।
2. अगली पाँच सीढ़ियाँ (6-10): पाँच प्रकार की प्राण ऊर्जा (प्राण, अपान, व्यान, उदान, समान)।
3. तीसरी पाँच सीढ़ियाँ (11-15): आंतरिक सौंदर्य (रूप, रस, स्वाद, गंध, शब्द)।
4. चौथी पाँच सीढ़ियाँ (16-20): पंच महाभूत (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश)।
5. इक्कीसवीं सीढ़ी: ज्ञान का प्रतीक।
6. बाईसवीं सीढ़ी: अहंकार का प्रतीक।
भक्तों की यह मान्यता है कि यदि वे इन 22 सीढ़ियों की धूल को अपने माथे पर लगाते हैं, तो वे पवित्रता और मोक्ष प्राप्त कर सकते हैं।
1. पहली पाँच सीढ़ियाँ (1-5): पाँच इंद्रियों (नेत्र, कान, नाक, जिह्वा और त्वचा) का प्रतीक।
2. अगली पाँच सीढ़ियाँ (6-10): पाँच प्रकार की प्राण ऊर्जा (प्राण, अपान, व्यान, उदान, समान)।
3. तीसरी पाँच सीढ़ियाँ (11-15): आंतरिक सौंदर्य (रूप, रस, स्वाद, गंध, शब्द)।
4. चौथी पाँच सीढ़ियाँ (16-20): पंच महाभूत (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश)।
5. इक्कीसवीं सीढ़ी: ज्ञान का प्रतीक।
6. बाईसवीं सीढ़ी: अहंकार का प्रतीक।
भक्तों की यह मान्यता है कि यदि वे इन 22 सीढ़ियों की धूल को अपने माथे पर लगाते हैं, तो वे पवित्रता और मोक्ष प्राप्त कर सकते हैं।
📌 यम शिला और उसका महत्व :
तीसरी सीढ़ी के मध्य में एक काले रंग का पत्थर 'यम शिला' स्थित है। ऐसा माना जाता है कि जो भी भक्त इस पत्थर पर पैर रखता है, वह यमराज के दंड से मुक्त हो जाता है। लेकिन लौटते समय इस पर पैर रखने से किए गए पुण्य का ह्रास होता है।
तीसरी सीढ़ी के मध्य में एक काले रंग का पत्थर 'यम शिला' स्थित है। ऐसा माना जाता है कि जो भी भक्त इस पत्थर पर पैर रखता है, वह यमराज के दंड से मुक्त हो जाता है। लेकिन लौटते समय इस पर पैर रखने से किए गए पुण्य का ह्रास होता है।
📌 बैसी पाहाचा और 22 अवतार : इन 22 सीढ़ियों को 22 प्रमुख अवतारों का प्रतीक माना जाता है:
1. चतुरसन
2. नारद
3. वराह
4. मत्स्य
5. यज्ञ
6. नर-नारायण
7. कपिल
8. दत्तात्रेय
9. प्रंशिगर्भ
10. ऋषभ
11. पृथु
12. नरसिंह
13. कूर्म
14. धन्वंतरि
15. मोहिनी
16. वामन
17. परशुराम
18. राम
19. व्यास
20. बलराम
21. कृष्ण
22. कल्कि
1. चतुरसन
2. नारद
3. वराह
4. मत्स्य
5. यज्ञ
6. नर-नारायण
7. कपिल
8. दत्तात्रेय
9. प्रंशिगर्भ
10. ऋषभ
11. पृथु
12. नरसिंह
13. कूर्म
14. धन्वंतरि
15. मोहिनी
16. वामन
17. परशुराम
18. राम
19. व्यास
20. बलराम
21. कृष्ण
22. कल्कि
📌 बैसी पाहाचा और पवित्र अनुष्ठान :
इन सीढ़ियों पर कई धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होते हैं, जिनमें 'श्राद्ध' सबसे प्रमुख है। श्राद्ध के दौरान पिंडदान (पूर्वजों को अर्पित अन्न) किया जाता है। सातवीं सीढ़ी पर स्थित 'पितृ शिला' पर भक्त अन्न महाप्रसाद अर्पित करते हैं जिससे उनके पूर्वजों की आत्मा को मुक्ति मिलती है।
📌 दीपावली पर विशेष अनुष्ठान :
दीपावली के दिन इन सीढ़ियों पर 'बडाबडिया डाका' (बड़ों को पुकारना) नामक अनुष्ठान किया जाता है। इस दौरान भक्त 'कउंरिया काठी' (जलने वाली लकड़ी) जलाते हैं ताकि उनके पूर्वजों की आत्माओं को प्रकाश प्राप्त हो।
इन सीढ़ियों पर कई धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होते हैं, जिनमें 'श्राद्ध' सबसे प्रमुख है। श्राद्ध के दौरान पिंडदान (पूर्वजों को अर्पित अन्न) किया जाता है। सातवीं सीढ़ी पर स्थित 'पितृ शिला' पर भक्त अन्न महाप्रसाद अर्पित करते हैं जिससे उनके पूर्वजों की आत्मा को मुक्ति मिलती है।
📌 दीपावली पर विशेष अनुष्ठान :
दीपावली के दिन इन सीढ़ियों पर 'बडाबडिया डाका' (बड़ों को पुकारना) नामक अनुष्ठान किया जाता है। इस दौरान भक्त 'कउंरिया काठी' (जलने वाली लकड़ी) जलाते हैं ताकि उनके पूर्वजों की आत्माओं को प्रकाश प्राप्त हो।
📌 मंदिर की मूर्तियाँ :
बैसी पाहाचा के दक्षिणी ओर काशी विश्वनाथ, भगवान राम, नरसिंह और गणेश की मूर्तियाँ स्थापित हैं। कुछ विद्वानों का मानना है कि ये 22 सीढ़ियाँ मानव जीवन की 22 कमजोरियों और दोषों का प्रतीक हैं, जिन्हें हर भक्त को त्यागकर भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने चाहिए।
बैसी पाहाचा केवल मंदिर में प्रवेश करने का मार्ग नहीं है, बल्कि यह मोक्ष प्राप्ति की ओर एक आध्यात्मिक यात्रा भी है। भक्तगण इन पवित्र सीढ़ियों पर चढ़कर अपने पापों से मुक्त होने और भगवान जगन्नाथ की कृपा प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।
जय जगन्नाथ 🙏
बैसी पाहाचा के दक्षिणी ओर काशी विश्वनाथ, भगवान राम, नरसिंह और गणेश की मूर्तियाँ स्थापित हैं। कुछ विद्वानों का मानना है कि ये 22 सीढ़ियाँ मानव जीवन की 22 कमजोरियों और दोषों का प्रतीक हैं, जिन्हें हर भक्त को त्यागकर भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने चाहिए।
बैसी पाहाचा केवल मंदिर में प्रवेश करने का मार्ग नहीं है, बल्कि यह मोक्ष प्राप्ति की ओर एक आध्यात्मिक यात्रा भी है। भक्तगण इन पवित्र सीढ़ियों पर चढ़कर अपने पापों से मुक्त होने और भगवान जगन्नाथ की कृपा प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।
जय जगन्नाथ 🙏
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