तहक्षी™ Tehxi
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@yajnshri

9 تغريدة 8 قراءة Feb 07, 2025
आपकी हस्तरेखाएँ कुछ कहती हैं - Thread🧵
🔹हस्तरेखा शुभ संकेत
🔹हस्तरेखा अशुभ संकेत
🔹हस्तरेखा धन लाभ योग
🔹हस्तरेखा विवाह योग
🔹हस्तरेखा भाग्य /राजयोग/उच्चपद/ योग
🔹हस्तरेखा नव ग्रह योग
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🔹 ज्योतिष विद्या (कुंडली) के अनुसार बारहों राशियों का स्थान प्रत्येक उँगली के तीन पोरों (गाँठों) में इस प्रकार होता है-
कनिष्का - मेष, वृष, मिथुन
अनामिका - कर्क, सिंह, कन्या
मध्यिका - तुला, वृश्चिक, धनु
तर्जनी - मकर, कुंभ, मीन।
शरीर का निर्माण पाँच तत्वों से हुआ है- अग्नि, वायु, आकाश, पृथ्वी और जल। इसका भी निवास क्रमशः अँगूठा, तर्जनी, मध्यिका, अनामिका एवं कनिष्ठा में होता है। दो या दो से अधिक उँगलियों के मेल से जो यौगिक क्रियाएँ संपन्न की जाती हैं, उन्हें योग मुद्रा कहा जाता है, जो इस प्रकार हैं-
वायु मुद्रा- यह मुद्रा तर्जनी को अँगूठे की जड़ में स्पर्श कराने से बनती है।
शून्य मुद्रा- यह मुद्रा बीच की उँगली मध्यिका को अँगूठे की जड़ में स्पर्श कराने से बनती है।
पृथ्वी मुद्रा- यह मुद्रा अनामिका को अँगूठे की जड़ में स्पर्श कराने से बनती है।
प्राण मुद्रा- यह मुद्रा अँगूठे से अनामिका एवं कनिष्का दोनों के स्पर्श से बनती है।
ज्ञान मुद्रा- यह मुद्रा अँगूठे को तर्जनी से स्पर्श कराने पर बनती है।
वरुण मुद्रा- यह मुद्रा दोनों हाथों की उँगलियों को आपस में फँसाकर बाएँ अँगूठे को कनिष्का का स्पर्श कराने से बनती है। सभी मुद्राओं के लाभ अलग-अलग हैं।
🔹 वर्तमान जीवन की जानकारियाँ दाएँ हाथ से तथा पूर्व-जन्मार्जित कर्म-फल विषयक ज्ञातव्य बाएँ हाथ से प्राप्त किये जाते हैं अतः दाहिना हाथ कर्म फल एवं बायाँ हाथ संचित निधि है।
🔹 यदि किसी रेखा के साथ-साथ कोई और रेखा चले तो उस रेखा को शक्ति मिलती है। अतः उस रेखा का विशेष प्रभाव समझना चाहिए। कमजोर, दुर्बल अथवा मुरझाई हुई रेखाएँ बाधाओं की सूचक होती हैं।
🔹अस्पष्ट और क्षीण रेखाएँ बाधाओं की पूर्व सूचना देती हैं। ऐसी रेखाएँ मन के अस्थिर होने तथा परेशानी का संकेत देती हैं।यदि कोई रेखा आखिरी सिरे पर जाकर कई भागों में बँट जाए तो उसका फल भी बदल जाता है। ऐसी रेखा को प्रतिकूल फलदायी समझा जाता है।
🔹टूटी हुई रेखाएँ अशुभ फल प्रदान करती हैं। यदि किसी रेखा में से कोई रेखा निकलकर ऊपर की ओर बढ़े तो उस रेखा के फल में वृद्धि होती है।
🔹वैज्ञानिक अध्ययन से यह पता चलता है कि मस्तिष्क की मूल शिराओं का हाथ के अंगूठे से सीधा संबंध है। स्पष्टतः अंगुष्ठ बुद्धि की पृष्ठ भूमि और प्रकृति को दर्शाने वाला सबसे महत्वपूर्ण अंग है। दायें हाथ के अंगूठे से स्वअर्जित बुद्धि-चातुर्य और निर्णय क्षमता का अंदाजा लगाया जाता है। अंगूठे और हथेली का मिश्रित फल व्यक्ति को अपनी प्रकृति के अनुसार ढ़ाल पाने में सक्षम है। व्यक्ति के स्वभाव और बुद्धि की तीक्ष्णता को अंगुष्ठ के बाद अंगुलियों की बनावट और मस्तिष्क रेखा सबसे अधिक प्रभावित करती है।
हस्तरेखा विज्ञान से ये पता चलता है इस तरह के चिन्हों व रेखाओं से जीवन में धन लाभ कब होगा, इन बातों का लगभग देखा जा सकता है। यहाँ इसी के बारे में बताया जा रहा है
🔹हाथ में जीवन रेखा सही गोलाई में हो। मस्तिष्क रेखा दो भागों में बंटी हो। त्रिकोण का चिन्ह बना हो। ऐसे तीनों लक्षण हथेली पर एक साथ पाया जाना धन के मामले में शुभ संकेत करता है। समय-समय पर अचानक धन का लाभ मिलता रहता है। विरासत सम्पति की भी प्राप्ति होती है
🔹भाग्यरेखा हथेली के अंत स्थान यानी मणिबंध से शुरू हो रही हो। साथ ही शनि पर्वत तक पंहुच रही हो। साथ ही भाग्य रेखा पर किसी प्रकार के अशुभ निशान न हो तो व्यवसाय में सफलता मिलने की ओर संकेत करता है। व्यवसाय से धन लाभ होने के साकेत है।
🔹जीवन रेखा, मस्तिष्क रेखा और भाग्य रेखा तीनों ही सही लंबाई में हो। तीनों रेखाओं पर अशुभ चिन्ह न हो। हथेली पर पाए जाने वाले ये दो लक्षण धन के मामले में लाभ करवाने वाले माने गए हैं। ऐसी रेखाओं के साथ जीवन रेखा से उदय होने वाली भाग्य रेखा कई भागों में बंटी हो यानी शाखायुक्त हो तब अपार धन संपदा का मालिक बनने का योग बनता है।
🔹हथेली भारी और फैली हुई हो। उंगलियां कोमल और नरम हो। ऐसी हथेली होने से बहुत धनवान होने का योग बनता है। हथेली में शनि पर्वत यानी मध्यमा उंगली के पास आकर दो या इससे अधिक रेखाएं आकर ठहरती हैं, तो अनेक तरफ से धन और सुख लाभ करवाने वाली होती है।
🔹शनि पर्वत अगर उठा हुआ हो। जीवन रेखा सही तरीके से घुमावदार हो। ये लक्षण हथेली में होने से धनवान बनाते हैं। मस्तिष्क रेखा सही स्थिति में हो यानी कि टूटी हुई और कटी हुई नहीं हो। साथ ही भाग्य रेखा की एक शाखा जीवन रेखा से निकलती हो। हथेलियां गुलाबी व मांसल हो तो करोड़ों में संपदा होने का योग होता है।
🔹मस्तिष्क रेखा सही स्थिति में हो यानी कि टूटी हुई और कटी हुई नहीं हो। साथ ही भाग्य रेखा की एक शाखा जीवन रेखा से निकलती हो। हथेलियां गुलाबी व मांसल हो तो करोड़ों में संपदा होने का योग होता है।
🔹 उंगलियां सीधी और पतली हो। हृदय रेखा गुरु पर्वत तक जाए। भाग्य रेखा एक से अधिक हो। हथेली के ये लक्षण धन संपत्ति के मामले में लकी बनाते हैं। नौकरी करें या व्यवसाय आमदनी करोड़ों में होने का योग बनता है।
🔹चंद्र पर्वत से कोई पतली रेखा अगर मस्तिष्क रेखा पर आकर रुक जाए तो व्यक्ति भावुकता के कारण अपने भाग्य की हानि करता रहता है। ऐसे व्यक्ति की आय भी सामान्य रहती है।
🔹भाग्य रेखा शुरुआत में मोटी हो और बाद में पतली होती जाए और सीधे शनि पर्वत पर जाए। उंगलियां पतली और सीधी हों। हथेली पर गुरु, सूर्य, शनि, बुध चारों पर्वत अच्छी स्थिति में हो यानी कि सही तरीके से उभार लिए हो। हाथ का रंग साफ हो। तब अचानक धन लाभ होने से धनवान होने का योग होता है।
🔹चंद्र पर्वत से कोई रेखा निकलकर शनि पर्वत पर पहुंचे और इस पर कहीं त्रिभुज का चिन्ह बन रहा हो तब व्यक्ति की आय सामान्यतः चलती रहती है।
🔹हस्तरेखा के अनुसार हथेली की रेखाओं का आना जाना लगा रहता है / बनती-बिगड़ती रहती हैं, कभी-कभी हथेली में रेखाओं से शुभ संकेत बन जाते हैं तो कभी-कभी रेखाओं का अशुभ संकेत का भी दौर होता हैं........
शुभ संकेत
------व्यक्ति की हथेली में सूर्य रेखा से निकलकर कोई शाखा गुरु पर्वत की ओर जाती है तो व्यक्ति शासकीय अधिकारी बनता है.
------हथेली में शुक्र पर्वत शुभ हो, विस्तृत हो और इस पर कोई अशुभ लक्षण ना हो तो व्यक्ति का स्वास्थ्य अच्छा रहता है, शुक्र पर्वत अंगूठे नीचे वाले भाग को कहते हैं, इस पर्वत को जीवन रेखा घेरे हुए दिखाई देती है.
------बुध पर्वत पर एक छोटा सा त्रिभुज हो तो व्यक्ति प्रशासनिक विभाग में उच्च पद प्राप्त कर सकता है.
------स्वास्थ्य रेखा की लंबाई मस्तिष्क रेखा और भाग्य रेखा तक ही सीमित हो तो यह शुभ संकेत है. ऐसी स्वास्थ्य रेखा वाले व्यक्ति का स्वास्थ्य उत्तम रहता है. शुक्र पर्वत, जीवन रेखा के आसपास से प्रारंभ होकर बुध पर्वत की ओर जाने वाली रेखा को स्वास्थ्य रेखा कहते हैं. बुध पर्वत सबसे छोटी उंगली के नीचे होता है.
------नाखून एकदम साफ और स्वच्छ दिखाई देते हैं तो यह शुभ लक्षण है. नाखूनों पर कोई दाग-धब्बा, कालापन न हो तो शुभ रहता है. शुभ नाखून अच्छे स्वास्थ्य की ओर इशारा करते हैं.
------अंगूठा मजबूत, लंबा, सुंदर हो तथा मस्तिष्क रेखा भी शुभ हो तो व्यक्ति नौकरी से लाभ प्राप्त करता है. शुभ मस्तिष्क रेखा यानी ये रेखा कटी हुई या टूटी हुई न हो, रेखाएं इसे काटती न हो, लंबी और सुंदर दिखाई देती हो
🔹 अशुभ संकेत
------दोनों हथेलियों में हृदय रेखा कमजोर और अस्पष्ट दिखाई देती है तो व्यक्ति आलसी और कामचोर हो सकता है.
------ मणिबंध पर एक ही रेखा हो और वह भी अधूरी हो तो व्यक्ति का जीवन निरस होता है और इनके जीवन कोई उत्साह नहीं होता है.
------ हथेली के दोनों मंगल पर्वत दबे हुए दिखाई दे रहे हों तो व्यक्ति कोई उपलब्धि प्राप्त नहीं कर पाता है ये लोग किसी भी काम में उत्सुकता नहीं दिखाते हैं
------ व्यक्ति की हथेली में भाग्य रेखा के पास धन यानी जोड़ (+) का निशान हो तो जीवन में कष्ट प्राप्त होते हैं.
------ मस्तिष्क रेखा बहुत ही छोटी है तो व्यक्ति मृत्यु समान कष्ट पाता है.
🔹हस्तरेखा से जुड़ी कुछ रोचक बातें---
------किसी व्यक्ति की हथेली में चक्र जैसा कोई निशान बना हुआ है तो वह काफी महत्वपूर्ण है. हथेली में चक्र का निशान अंगूठे पर हो तो व्यक्ति बहुत भाग्यशाली माना जाता है. इस प्रकार के निशान वाले व्यक्ति धनवान होते हैं. अंगूठे पर चक्र का निशान होने पर व्यक्ति ऐश्वर्यवान, प्रभावशाली, दिमाग से संबंधित कार्य में योग्य होता है. ऐसे लोग बुद्धि का प्रयोग करते हुए काफी धन लाभ प्राप्त करते हैं. ये लोग पिता के सहयोगी होते हैं. घर-परिवार एवं समाज में इन्हें पूर्ण मान-सम्मान प्राप्त होता है
----किसी व्यक्ति के दोनों हाथों में भाग्य रेखा मणिबंध से शुरू होकर सीधी शनि पर्वत तक जा रही हो, साथ में सूर्य रेखा भी पतली लम्बी, शुभ हो और मस्तिष्क रेखा, आयु रेखा भी अच्छी है तो उस हाथ में गजलक्ष्मी योग बनता हैं. ये योग अचानक धन लाभ दे सकता है.
------शनि पर्वत यानी रिंग फिंगर के नीचे वाला क्षेत्र और शुक्र पर्वत अधिक भरा हुआ हो, सुंदर हो और भाग्य रेखा शुक्र पर्वत यानी अंगूठे के पास वाले क्षेत्र से आरंभ होकर शनि क्षेत्र के मध्य तक पहुंचती है तो ऐसे लोगों के जीवन में कभी भी धन संबंधी कमी नहीं होती है, ये लोग काफी पैसा कमाते हैं.
------किसी व्यक्ति की हथेली में भाग्य रेखा व चन्द्र रेखा मिलकर एक साथ शनि पर्वत पर पहुंचे तो ऐसे लोग भी धनवान रहते हैं. हथेली में अंगूठे के ठीक नीचे शुक्र पर्वत होता है और शुक्र पर्वत की दूसरी ओर हथेली के अंतिम भाग पर चंद्र पर्वत होता है. इस चंद्र पर्वत से कोई रेखा निकलती है तो उसे चंद्र रेखा कहा जाता है
भाग्य रेखा लिटिल फिंगर के नीचे के क्षेत्र से प्रारंभ होकर किसी भी रेखा से कटे बिना शनि पर्वत तक पहुंचती हो तो यह रेखा भी शुभ होती है. इसके प्रभाव से व्यक्ति धन संबंधी कार्यों में विशेष लाभ प्राप्त करता है।
🔹अंगुलियां के अग्र भाग नुकीले रहने से काल्पनिक पुलाव पकाने की आदत होती है। जिससे व्यक्ति जीवन की वास्तविकता से अनभिज्ञ रहते हुए एक असफल जीवन जीता है।
०० अंगुलियां लंबी होने से जातक बौद्धिक और सूक्ष्मतम कार्य बड़ी सुगमता से पूर्ण कर लेता है और स्थूल कार्य भी इसकी पहुंच से बाहर नहीं होते हैं। बहुत बार इस प्रकार के जातक नेतृत्व करते देखे जाते हैं। इस प्रकार की अंगुलियों के साथ हाथ यदि बड़ा और चमसाकार हो तो जातक अपनी क्षमता का लोहा समाज को मनवा लेता है। लंबी अंगुलियों के साथ यदि हथेली में शुक्र मुद्रिका भी हो तो जातक सर्वगुण संपन्न होते हुए भी भावुकतावश प्रगति के मार्ग में पिछड़ जाता है। शनि मुद्रिका होने से दुर्भाग्य साथ नहीं छोड़ता है। इस प्रकार के जातक अपनी योग्यता और क्षमता का पूर्ण दोहन नहीं कर पाते हैं। जिसके कारण इनको जीवन में सीमित उपलब्धियों से ही संतोष करना होता है। चंद्रमा का बहुत प्रभाव होने से जातक पर यथार्तता की अपेक्षा कल्पना हावि रहती है।
०० अंगुलियों के नाखून जब त्वचा में अंदर तक धंसे हों, साथ ही ये आकार में सामान्य से छोटे हों तो जातक बुद्धि कमजोर होती है। इसकी मनोवृत्ति सीमित और आचरण बचकाना होता है। ये जातक आजीविका हेतु इस प्रकार के कार्य करते पाए जाते हैं, जिनमें बौद्धिक / शारीरिक मेहनत न के बराबर होते होती है।
०० कनिष्ठा सामान्य से अधिक छोटी हो तो जातक मूर्ख होता है। कनिष्ठा के टेढी रहने से जातक अविश्वसनीय होता है।
०० हथेली का पृष्ठभाग समतल या कुछ उभार लेते हुए होना चाहिए। ऐसी हथेली का जातक व्यवहारिक होता है। यदि हथेली का करपृष्ठ बहुत अधिक उभार लिए हुए हो तो प्रायः व्यक्ति कर्कश स्वभाव और झगड़ालू होता है।
०० हथेली में जब गहरा गढ़ा हो तो प्रायः जातक अपनी बात पर कायम नहीं रह पाता है। ऐसे लोग जीवन मे अत्यंत संघर्ष के उपरांत ही कुछ हासिल कर पाते हैं।
०० हथेली का पृष्ठ भाग और कलाई हमेशा समतल होनी चाहिए। यदि दोनों में ज्यादा अंतर है तो यह जातक को समाज में स्थापित होने से रोकती है। ऐसे लोग अपने परिजनों से विरोध करते हैं। समाज में इनकी प्रतिष्ठा कम होती है।
०० जिन हाथों में शनि-मंगल का प्रभाव हो वे लोग कानूनी समस्याओं का सामना करते हैं। कुछ मामलों में ऐसे लोग अपराधी भी हो सकते हैं।
०० हथेली में राहु का प्रभाव होने पर जातक बुरी आदतों का शिकार होता है। वह धर्मभ्रष्ट भी हो सकता है। मदिरापान कर सकता है या अभक्षण का भी भक्षण कर सकता है।
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