४. गायत्री में चौबीस अक्षर है, तीन पाद हैं, छः कुक्षि है, पाँच शीर्ष हैं।
ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद- यह तीन वेद उसके पाद हैं। इनके ऊपर गायत्री खड़ी होती है। है। ये वेद उसकी आधारशिला है,चौथा अथर्ववेद तो इस वेदत्रयी की व्याख्या मात्र है।
छः कुक्षियाँ छः दिशायें हैं, पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण, ऊर्ध्व, अधः- इन छहों दिशाओं में अर्थात् सर्वत्र गायत्री- शक्ति व्याप्त है।
वेद के षट् अंगों को शीर्ष कहा गया है। गायत्री का शरीर छन्द है, शेष पाँच वेदांग उसके शीर्ष हैं। गायत्री छन्द के अन्य पाँच वेदांग- व्याकरण, शिक्षा, कल्प, निरुक्त, ज्योतिष् सिर है- मस्तिष्क हैं। इन वेदांगों के अन्तर्गत जो महान् भावनायें सत्रिहित हैं, उन्हें ही गायत्री का सिर अर्थात् मस्तिष्क समझना चाहिये। गायत्री शक्ति में वही भावना विद्यमान है, जो वेदांगों में है।
ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद- यह तीन वेद उसके पाद हैं। इनके ऊपर गायत्री खड़ी होती है। है। ये वेद उसकी आधारशिला है,चौथा अथर्ववेद तो इस वेदत्रयी की व्याख्या मात्र है।
छः कुक्षियाँ छः दिशायें हैं, पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण, ऊर्ध्व, अधः- इन छहों दिशाओं में अर्थात् सर्वत्र गायत्री- शक्ति व्याप्त है।
वेद के षट् अंगों को शीर्ष कहा गया है। गायत्री का शरीर छन्द है, शेष पाँच वेदांग उसके शीर्ष हैं। गायत्री छन्द के अन्य पाँच वेदांग- व्याकरण, शिक्षा, कल्प, निरुक्त, ज्योतिष् सिर है- मस्तिष्क हैं। इन वेदांगों के अन्तर्गत जो महान् भावनायें सत्रिहित हैं, उन्हें ही गायत्री का सिर अर्थात् मस्तिष्क समझना चाहिये। गायत्री शक्ति में वही भावना विद्यमान है, जो वेदांगों में है।
गायत्री मंत्र के उच्चारण से ऐसी ध्वनि कंपन होती है कहा जाता है अगर कोई रोगी गायत्री मंत्र का जाप करे तो वह सत्य में ठीक होने लगता है
मृत्यु भय से मुक्ति हेतु साधना ।
ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं
भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ।
इसके लिए साधक को केवल दूध पीकर गायत्री मंत्र का श्रद्धा एवम भक्ति पूर्वक एक सप्ताह तक जाप करना चाहिए। इससे सभी प्रकार की मृत्यु भय से मुक्ति मिलती है। और साथ ही मंत्र शक्ति से वह पूर्व में चाहें कितना भी पापी रहा हो, यमलोक में नहीं जाता। अर्थात, मंत्र के पुण्य प्रभाव से वह यम पाश से मुक्त हो जाता है।
मृत्यु भय से मुक्ति हेतु साधना ।
ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं
भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ।
इसके लिए साधक को केवल दूध पीकर गायत्री मंत्र का श्रद्धा एवम भक्ति पूर्वक एक सप्ताह तक जाप करना चाहिए। इससे सभी प्रकार की मृत्यु भय से मुक्ति मिलती है। और साथ ही मंत्र शक्ति से वह पूर्व में चाहें कितना भी पापी रहा हो, यमलोक में नहीं जाता। अर्थात, मंत्र के पुण्य प्रभाव से वह यम पाश से मुक्त हो जाता है।
गायत्री मंत्र जीवन परिवर्तन तो करता ही है अपितु गायत्री जाप पाप मुक्त भी करता है , ग़लत भोजन ग्रहण, अज्ञान वश पाप, पाप से मुक्ति के लिए गायत्री के ११ माला जाप करते है जो मनुष्य के हृदय परिवर्तन में भी बहुत सहायक है
धन प्राप्ति हेतु साधना
धन प्राप्ति के लिए साधक को बिल्व वृक्ष की लकड़ी से सात दिनों तक गायत्री मंत्र का प्रतिदिन दो सौ आहुतियाँ करना चाहिए। इससे माता गायत्री प्रसन्न होती है, और धन की प्राप्ति होती है।
धन प्राप्ति हेतु साधना
धन प्राप्ति के लिए साधक को बिल्व वृक्ष की लकड़ी से सात दिनों तक गायत्री मंत्र का प्रतिदिन दो सौ आहुतियाँ करना चाहिए। इससे माता गायत्री प्रसन्न होती है, और धन की प्राप्ति होती है।
अपमृत्यु तथा भयनाश हेतु साधना ।
शमी की समिधा अर्थात लकड़ी, अन्न, क्षीर तथा घी से प्रतिदिन सात दिनों तक गायत्री मंत्र की सौ सौ आहुतियां देने से अप मृत्यु आदि सभी प्रकार का भय दूर होता है।
विजय प्राप्ति हेतु साधना ।
विजय कि प्राप्ति के लिए साधक को मदार कि लकड़ी से गायत्री मंत्र का हवन करना चाहिए, इस प्रकार वह सभी क्षेत्रों में विजई होता है।
दीर्घायु के लिए साधना ।
दीर्घायु होने के लिए पलाश के अग्र भाग वाली लकड़ी से गायत्री मंत्र का हवन करने पर साधक को दीर्घायु की प्राप्ति होती है।
शमी की समिधा अर्थात लकड़ी, अन्न, क्षीर तथा घी से प्रतिदिन सात दिनों तक गायत्री मंत्र की सौ सौ आहुतियां देने से अप मृत्यु आदि सभी प्रकार का भय दूर होता है।
विजय प्राप्ति हेतु साधना ।
विजय कि प्राप्ति के लिए साधक को मदार कि लकड़ी से गायत्री मंत्र का हवन करना चाहिए, इस प्रकार वह सभी क्षेत्रों में विजई होता है।
दीर्घायु के लिए साधना ।
दीर्घायु होने के लिए पलाश के अग्र भाग वाली लकड़ी से गायत्री मंत्र का हवन करने पर साधक को दीर्घायु की प्राप्ति होती है।
ब्रह्म हत्या के पाप से मुक्ति हेतु साधना ।
जिन लोगों को ब्रह्म हत्या का पाप भूलवश या जाने-अनजाने कैसे भी लगा हो, ऐसे मनुष्यों को चाहिए कि वह किसी विद्वान ब्राह्मण को बुलाकर तीन हजार बार गायत्री मंत्र का जाप तथा हवन कराएं, इस प्रकार उन्हें ब्रह्म हत्या के पाप से मुक्ति मिलेगी।
गायत्री मंत्र का जाप कैसे करे ?
गायत्री मंत्र का जप कम से कम 27 बार या 108 बार करना चाहिए। अथवा अपनी क्षमता के अनुसार इस मंत्र का जप 11 माला या 21 माला द्वारा भी किया जा सकता है। साथ ही मंत्र जाप करते समय जो भी इच्छा आपके मन में है, उसे अपने मन में एक बार अवश्य दोहराएं।
गायत्री मंत्र का जाप सूर्य उदय एवं सूर्य अस्त में किया जाता है , पीले वस्त्र धारण करे एवं गुरु वंदन करे यदि आपका कोई गुरु नही है तो माँ गायत्री को ही गुरु समझे गायत्री जाप चंदन,रुद्राक्ष,हल्दी माला पर किया जा सकता है, जाप धीरे एवं भाव से उवाच के साथ करे समक्ष पानी भर कर रखे एवं जाप पश्चात् सारे घर में पानी छिड़क दें संपूर्ण घर में मंगल वास होता है , सात्विक एवं ब्रह्मचर्य का पालन करे 🙏🏻
जिन लोगों को ब्रह्म हत्या का पाप भूलवश या जाने-अनजाने कैसे भी लगा हो, ऐसे मनुष्यों को चाहिए कि वह किसी विद्वान ब्राह्मण को बुलाकर तीन हजार बार गायत्री मंत्र का जाप तथा हवन कराएं, इस प्रकार उन्हें ब्रह्म हत्या के पाप से मुक्ति मिलेगी।
गायत्री मंत्र का जाप कैसे करे ?
गायत्री मंत्र का जप कम से कम 27 बार या 108 बार करना चाहिए। अथवा अपनी क्षमता के अनुसार इस मंत्र का जप 11 माला या 21 माला द्वारा भी किया जा सकता है। साथ ही मंत्र जाप करते समय जो भी इच्छा आपके मन में है, उसे अपने मन में एक बार अवश्य दोहराएं।
गायत्री मंत्र का जाप सूर्य उदय एवं सूर्य अस्त में किया जाता है , पीले वस्त्र धारण करे एवं गुरु वंदन करे यदि आपका कोई गुरु नही है तो माँ गायत्री को ही गुरु समझे गायत्री जाप चंदन,रुद्राक्ष,हल्दी माला पर किया जा सकता है, जाप धीरे एवं भाव से उवाच के साथ करे समक्ष पानी भर कर रखे एवं जाप पश्चात् सारे घर में पानी छिड़क दें संपूर्ण घर में मंगल वास होता है , सात्विक एवं ब्रह्मचर्य का पालन करे 🙏🏻
جاري تحميل الاقتراحات...