Vatsala Singh
Vatsala Singh

@_vatsalasingh

11 تغريدة 1 قراءة Dec 18, 2024
जो जीता वही पोरस न हो क़े जो जीता वही सिकंदर कैसे हो गया...
ये प्राचीन सिक्का (minted 324-322 BC) इस बात का प्रमाण है कि युद्धबंदी सिकन्दर था, न कि सम्राट पोरस...फिर आख़िर सिकंदर महान कैसे हो गया?...अंत तक जरुर पढ़े🧵 x.com
हाथी पे बैठे सम्राट पोरस किस तरह सिकंदर, जिसे यूनानी इतिहासकारों ने महान बताया, को खींच के ले जा रहे ।
सिकंदर अपने पिता की मृ त्यु के बाद अपने सौतेले व चचेरे भाइयों को मारने के बाद मेसेडोनिया ( Macedonia ) के सिन्हासन पर बैठा था। उसने अपने सबसे करीबी दोस्त Cleitus को माR डाला था, उसने अपने पिता के मित्र Parmenion को भी मरवा दिया। सिकंदर की सेना जहां भी जाती, पूरे के पूरे शहर जला दिए जाते, महिलाओं का अपहरण कर लिया जाता और बच्चों को भालों की नोk पर टांग कर शहर में घुमाया जाता था।
ऐसा क्रूR सिकंदर, महान सम्राट पोरस के प्रति भला उदार कैसे हो सकता था ?
यदि पोरस हार जाते तो क्या वे जिं दा बचते और क्या उनका साम्राज्य यूनानियों का साम्राज्य नहीं हो जाता ?
इतिहास में लिखा गया कि सिकंदर ने पोरस को हरा दिया था। यदि ऐसा होता तो सिकंदर मगध तक पहुंच जाता और इतिहास कुछ और होता
लेकिन कुछ विशेष इतिहाकारों ने सिकंदर की हार को पोरस की हार
में बदल दिया।
झेलम का युद्ध (Battle of Hydaspes)
:- (The river Jhelum is called Hydaspes by the Ancient Greeks)
पौरव वंशी महान सम्राट पोरस ( पुरु, पुरुवास) का साम्राज्य बहुत विशाल था। महाराजा पोरस सिन्ध-पंजाब सहित एक बहुत ही बड़े क्षेत्र के राजा थे
पोरस का साम्राज्य झेलम और चिनाब नदियों के बीच स्थित था।
इतिहासकार मानते हैं कि पुरु को अपनी वीरता और हाथी सेना पर विश्वास था लेकिन उसने सिकंदर को झेलम नदी पार करने से नहीं रोका और यही उनकी भूल थी।
सिकंदर ने राजा पोरस के शत्रु आम्भी को अपनी सेना में लाकर झेलम नदी पार की
और युद्ध के लिए आगे बड़ा क्योकि झेलम को पार किये बगैर सम्राट पोरस के राज्य में दाखिल होना नामुमकिन था. आम्भी गांधार के राजा थे और पोरस को अपना दुश्मन समझते थे इसलिए उन्होंने सिकंदर से संधि कर उसकी सहायता की थी. जिसके बाद भयंकर युद्ध की शुरुआत हुई.
कहा जाता है कि इस युद्ध के शुरू होते ही पौरस ने महाविनाश का आदेश दे दिया। राजा पुरु जिनका क़द 7 फुट से भी ऊपर था अपनी शक्तिशाली गजसेना के साथ यवनी सेना पर टूट पड़े।
उसके बाद पौरस के सैनिकों और हाथियों ने जो विनाश मचाना शुरू किया कि सिकन्दर के सर पर चढ़े विश्वविजेता के भूत को उतार कर रख दिया
पोरस के ‘हाथियों’ द्वारा यूनानी सैनिकों में उत्पन्न स्थिति का वर्णन कर्टियस (Quintus Curtius Rufus) ने इस तरह से किया है- "हाथियों की भीषण चीत्कार घोड़ों को इतना डरा देती की वे बिगड़कर भाग उठते थे और उनपर बैठे घुड़सवारों के होश उड़ा देती थी”
उसने लिखा सिकंदर और उसकी सेना ने कभी हाथियों से सजी इतनी बड़ी सेना का सामना करने की सोची भी नहीं थी ।
युद्ध में हाथियों ने सिकंदर की सेना को अपने पांवों में कुचलना शुरू कर दिया। वे सैनिकों को अपनी सूंड से पकड़ कर अपने महावत को सौंप देते जो उनका सर, ध ड़ से अलग कर देते थे
पोरस की गज(हाथी) सेना ने यूनानियों का जिस भयंकर रूप से संहार किया था उससे सिकंदर और उसके सैनिक डर गये
कुछ इसी तरह का वर्णन "डियोडरस" (Diodorus Siculus) ने भी किया है- विशाल हाथियों में अपार बल था और वे पोरस के लिए अत्यन्त लाभकारी सिद्ध हुए
अब आप खुद सोचिए कि Diodorus और Curtius के ये युद्ध वर्णन क्या सिद्ध करते हैं
E.A.W.Budge ने भी लिखा- “झेलम के युद्ध में सिकन्दर की अश्व-सेना का अधिकांश भाग मा रा गया था”.
सिकंदर की सेना का मनोबल भी इस युद्ध के बाद टूट गया था और उसने आगे बढ़ने से इंकार कर दिया था।
सेना में वि द्रोह की स्थिति पैदा हो रही थी सिकन्दर ने अनुभव कर लिया कि यदि अब यदि युद्ध जारी रहा तो मैं पूर्ण रुप से अपना नाश कर लूँगा
इसलिए सिकंदर ने वापस जाने का फैसला किया और सम्राट पुरु को शांति का प्रस्ताव भेजा
परंतु पोरस ने, सिकन्दर को उत्तर मार्ग से जाने की अनुमति नहीं दी.
विवश होकर सिकन्दर को उस खूँखार जन-जाति के कबीले वाले रास्ते से जाना पड़ा, इस क्षेत्र में कठ, मालव, राष्ट्रिक , कम्बोज, दहियक जनजाति ने भी सिकन्दर और उसकी सेना को भारी क्षति पहुँचायी
जिनसे लड़ते-लड़ते सिकन्दर इतना घायल हो गया की अंत में लौटते हुए रास्ते में ही उसकी मृ त्यु हो गयी
लेकिन इतिहास लिखने वाले यूनानियों और हमारे कुछ विशिष्ट श्रेणी इतिहासकारों ने ‘सिकंदर की हार’ को ‘सम्राट पोरस की हार’ में बदल दिया।
और सम्राट पोरस की महानता से हमारे पाठ्यक्रमों को वंचित रखा गया
इतिहास की ये सच्ची निशानी (victory coin) आज भी British Museum में सुरक्षित है ।

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