Akanksha Parmar
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@iAkankshaP

7 تغريدة 5 قراءة Dec 08, 2024
अंक 3, 6 और 9 की महानता :🧵 #Thread अंत तक अवश्य पढ़े
ॐ एक ऐसा मंत्र है जो सगुण, निर्गुण और बीज मंत्र तीनों का अद्भुत संगम है।
ॐ का जप शांति, सुख और अंततः आत्मज्ञान की प्राप्ति कराता है।
3, 6, 9 के साथ स्वस्तिक, श्री यंत्र और सर्पिल आकार
स्वस्तिक शब्द संस्कृत के "स्वस्तिक" से लिया गया है, जिसमें "सु" का अर्थ है "अच्छा" और "अस्ति" का अर्थ है "है," तथा "क" इसका उपसर्ग है।
स्वस्तिक हिंदू धर्म का प्रमुख प्रतीक है, जो शाश्वतता (Eternity) और ब्रह्म के अनंत और सर्वव्यापी बल का प्रतिनिधित्व करता है। यह अच्छाई, शक्ति और रक्षा का प्रतीक भी है।
बौद्ध धर्म में भी स्वस्तिक का उपयोग अनंतता और शुभता के संदेश के लिए किया जाता है।
संख्या 3, 6 और 9 के अर्थ
3 का महत्व:
3 त्रिमूर्ति का प्रतीक है – ब्रह्मा, विष्णु और शिव। ये सृजन (Creation), पालन (Maintenance) और संहार (Dissolution) के तीन पहलुओं को दर्शाते हैं।
तीन, ONE (एक) के तीन रूपों का प्रतिनिधित्व करता है।
6 का महत्व:
6 का संबंध छह आंतरिक शत्रुओं से है – काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद और मात्सर्य।
6 भगवान शिव और पार्वती के पुत्र कुमार स्वामी के छह मुखों का भी प्रतिनिधित्व करता है। उन्हें शन्मुख, सुब्रह्मण्य (जो ब्रह्म को भली-भांति जानते हैं) कहा जाता है।
6 छह ऋतुओं (वसंत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमंत, शिशिर) का प्रतीक है। ये वार्षिक चक्र का हिस्सा हैं, जो चंद्र कैलेंडर के अनुसार 60 साल के चक्र का भाग है।
मनुष्य का अधिकतम जीवनकाल 2 चक्र माने जाते हैं, लेकिन अधिकांश लोग 1 चक्र (60 वर्ष) पूरा करते हैं। इसलिए 60वें वर्ष का उत्सव जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है।
9 का महत्व:
9 का संबंध नव रात्रा, नव रंध्र, नव निधि, नौ अनाज (नवधान्य), नव दुर्गा, नव रत्न और नव ग्रह से है।
9 एक चक्र का अंत है और इसके बाद एक नया चक्र 1 से शुरू होता है।
18 पुराण और उनका वर्गीकरण
18 मुख्य पुराणों को विष्णु, शिव और ब्रह्मा की महिमा के अनुसार वर्गीकृत किया गया है:
1. विष्णु पुराण: विष्णु, नारद, भागवत, गरुड़, पद्म और वाराह।
2. शिव पुराण: मत्स्य, कूर्म, लिंग, शिव, स्कंद और अग्नि।
3. ब्रह्मा पुराण: ब्रह्माण्ड, ब्रह्मवैवर्त, मार्कंडेय, भविष्य, वामन और ब्रह्म।
18 उपपुराण भी हैं, जिनमें से कुछ देवी भागवत में उल्लिखित हैं:
सनतकुमार, नृसिंह, नारदीय, शिव, दुर्वासा, कपिल, मानव, औशनस, वरुण, कालिका, सांब, नंदी, सौर, पाराशर, आदित्य, महेश्वर, भार्गव और वशिष्ठ।
साथ ही, स्थल पुराण या महात्म्य, जो मंदिरों या पवित्र स्थलों की महिमा का बखान करते हैं, मंदिरों की सेवाओं में पढ़े जाते हैं।

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