Vibhu Vashisth 🇮🇳
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@Indic_Vibhu

23 تغريدة 6 قراءة Dec 08, 2024
🌺।।ब्रह्मर्षियों की वंश परम्परा एवं वंशावली।।🌺
वर्तमान में जो गौत्र आदि प्रचलित हैं उनका वर्णन करते हुए जाने ब्राह्मणों की वंशावली।
ब्राह्मण वंशावली की रोचक जानकारी। इसे सुरक्षित कर लें।
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🌺1. कौशिक ऋषि - कौशिक ऋषि 'कुश' नामक घास के गुच्छे से पैदा हुये तो इन्हें कौशिक कहा गया, और अपने तप से श्रेष्ठ ब्राह्मण कहलाये
🌺2. महर्षि भृगु - ब्रह्माजी के पुत्र भृगु ऋषि हुये, महर्षि भृगु की चार पत्नियां थी-कन्या, दिव्या, पौलोमी और ख्याति।
- दिव्या के पुत्र दैत्यगुरु शुक्राचार्य हुये पितरों की कन्या गवा से शुक्राचार्य के चारपुत्र त्वष्टा, वरुचि, शण्ड तथा अमर्क हुए, इन्द्रपुत्री जयन्ती से शुक्राचार्य की पुत्री देवयानी का जन्म हुआ देवयानी का विवाह राजा ययाति से हुआ।
- शुक्राचार्य के पुत्र त्वष्टा तथा विरोचन पुत्री यशोधरा के दो पुत्र त्रिशिरा और विश्वरूप हुए।
- शुक्राचार्य के चार पुत्रों के अतिरिक्त बारह पुत्र हुए जिनमें भुवन-भावन प्रमुख थे।
- भृगु ऋषि के बारह पुत्र भृगुगण नाम से प्रसिद्ध हुए।
- भृगु ऋषि की दूसरी पत्नी पौलौमी से च्यवन नामक पुत्र पैदा हुआ च्यवन का विवाह राजा शर्याति की पुत्री सुकन्या से हुआ।
- च्यवन व शर्याति से आत्मवान तथा दधीचि नामक दो पुत्र हुए।
- आत्मवान व राजा नहुष की कन्या रुचिरा से पुत्र और्व पैदा हुआ। और्व का पुत्र ऋचीक था।
- ऋचीक की पत्नी सत्यवती थी। ऋचीक व सत्यवती के सौ पुत्र हुए, जिनमें जमदग्नि सबसे बड़ा था।
- जमदग्नि की पत्नी रेणुका से भगवान परशुराम पैदा हुए।
- ऋचीक व और्व के सौ पुत्रों से हजारों पुत्र-पौत्र पैदा हुए।
- दधीचि के वीर्य और सरस्वती के रज से सारस्वत नामक पुत्र उत्पन्न हुआ, जिससे सारस्वत ब्राह्मणों की वंश परम्परा चली, इसका उल्लेख आगे सारस्वत ब्राह्मण उत्पत्ति में किया जायेगा।
- भृगु पत्नी ख्याति से लक्ष्मी उत्पन्न हुई तथा चौथी पत्नी कन्या से धाता तथा विधाता नाम के दो पुत्र उत्पन्न हुए।
- धाता तथा मेरूपुत्री आपत्ति से पाण्डु नामक पुत्र पैदा हुआ। तथा मेरू की दूसरी पुत्री नियति तथा विधाता से मृकुण्ड पैदा हुए।
- मृकुण्ड और उनकी पत्नी मनस्विनी से मार्कण्डेय पैदा हुए। मार्कण्डेय से मूर्धन्या और मूर्धन्या से वेदशिरा पैदा हुए।
- धाता-आयति के पुत्र पाण्डु और पुण्डरिका से धुतिमान् और सूजवन्त पैदा हुए। मार्कण्डेय और मूर्धन्या के पुत्र वेदशिरा और पीबरी के गर्भ से अनेक पुत्र पैदा हुए।
🌺3. महर्षि अत्रि - महर्षि अत्रि की उत्पत्ति विधाता के नेत्रों से हुई मानी गई हैं। महर्षि अत्रि की पत्नी अनुसूया के तीन पुत्र, चन्द्रमा, दत्त और दुर्वासा पैदा हुए। चन्द्रमा के वंश में अनेक राजर्षि और गौत्र प्रर्वतक महर्षि पैदा हुए।
🌺4. महर्षि पुलह - पुलह की उत्पत्ति ब्रह्मा जी के नाभि से पैदा हुई मानी गई है, पुलह की पत्नी कर्दम की पुत्री गति हुई। इनके चार पुत्र कर्म श्रेष्ठ, यवीयान सहिष्णु तथा वात्स्य हुए। पुलह ने अगस्तय के पुत्र दृदाश्व को भी पुत्रवत् ग्रहण किया था। पुलह वर्तमान वैवस्वत मन्वन्तर के गौत्रकर्ता महर्षियों में नहीं है।
🌺5. महर्षि अंगिरस - अंगिरस की उत्पति ब्रह्मा जी के मुख से हुई मानी गई है। चतुर्थ वेद इन्ही से प्रणीत है अतः अथर्वा भी कहे जाते है। इनकी गणना सप्तर्षियों में है।
- अंगिरस की तीन पत्नियां सुरुपा, स्वराट, व पथ्या थी। सुरुपा से देवगुरु बृहस्पति, स्वराट से गौतम तथा पथ्या से अवधय, वामदेव, उशिज, अतथ्य तथा धिष्णु ये पांच पुत्र हुए थे।
- अमितप्रभ तथा ब्रह्मर्षि गार्ग्य अंगिरस के पुत्र हैं, वामदेव के पुत्र वृहदुत्ध, उशिज के दीर्घतमा तथा धिष्णु के पुत्र सुधन्वा हुए।
- सुधन्वा के ऋषभ तथा ऋषभ के संज्ञक से ऋषिगण एवं देवगण पैदा हुए।
- अंगिरस की चौथी पत्नी स्मृति से चार पुत्रियां तथा भरताग्नि और कीर्तिमन्त नामक दो पुत्र हुए।
- भरताग्नि से पर्जन्य और प्रजन्य से कीर्तिमान तथा कीर्तिमान की पत्नी धेनुका से वरिष्ठद्यातिमन्त हुए।
- गौतम ऋषि और अहत्या के शतानन्द हुए। शतानन्द से सत्यघृति हुए।
- बृहस्पति के पुत्र भरद्वाज और भरद्वाज के पुत्र भवमन्यु हुए।
- भवमन्यु से महावीर्य, नर और गर्म तीन पुत्र हुए। महावीर्य के उरुक्षय और उरुक्षय के कवि आदि अनेक पुत्र हुए।
- नर के संस्कृति और संस्कृति के गुरु, वीति और रन्तिदेव हुए।
- गर्भ के सिनि, सिनि के सैन्य, तथा सैन्य के महर्षि गर्ग हुए। गर्ग के शिनि, शिनि के शैन्य नामक पुत्र पैदा हुए।
🌺6. महर्षि मरीचि - महर्षि मरीचि की पत्नी कला कर्दम की पुत्री थी। मरीचि तथा कला के कश्यप तथा पूर्णमास दो पुत्र हुए।
- मतस्यपुराण (188/20) खण्ड के अनुसार कश्यप तथा दक्ष पुत्रियों द्वारा सम्पूर्ण जगत की सृष्टि रचना हुई।
- पूर्णमास की पत्नी सरस्वती से विरह तथा सर्वस् नाम के दो पुत्र हुए। विरज के पुत्र सुधामा तथा सुधामा के वैराज हुए।
- महर्षि कश्यप ने गौत्रकर्ता पुत्र प्राप्ति हेतु पुनः तप किया फलस्वरूप उन्हें वत्सर और असित नाम के दो पुत्र हुए।
- वत्सर के पुत्र नैध्रुव और रैभ्य हुए। रैभ्य से रैभादिक तथा नैध्रुव के सुमेधा हुए। असित की पत्नी पर्णा से देवल हुए।
- शाण्डिल्य, नैध्रुव और रैभ्य इन तीन वर्षों में महर्षि कश्यप के गौत्र का विस्तार हुआ।
🌺7. महर्षि क्रतु - महर्षि क्रतु की पत्नी सन्ताति से दो पुत्रिया-पुण्यात्मा और सन्ताति पैदा हुई। वैवस्वत मन्वन्तर में क्रतु के पुत्र नहीं हुए, इस कारण से महर्षि क्रतु ने अगस्त्य के पुत्र इध्मवह को पुत्र रूप में ग्रहण किया था।
🌺8. राजा दक्ष प्रजापति - दक्ष की पत्नी प्रसूति थी। दक्ष की साठ पुत्रियां पैदा हुई। दक्ष के दो पुत्र हर्यश्व और शवत्नाश्व पैदा हुए, इनकी कोई सन्तान नहीं हुई। दक्ष पुत्री सती भगवान शंकर के साथ ब्याही गई।
🌺9. ऋषि पुलस्त्य - पुलस्त्य ऋषि की पत्नी तृणबिन्दु की पुत्री थी। पुलस्त्य तथा इडविडा से विश्रवा पैदा हुए, विश्रवा तथा देववर्णिनी से धन के देव भगवान कुबेर का जन्म हुआ। माल्यवान की पुत्री पुष्पोत्करा से विश्रवा प्रहस्त, महापाशु और खर नामक पुत्र प्राप्त हुए। विश्रवा की दूसरी पत्नी कैकसी से रावण, कुम्भकर्ण, विभीषण और सूर्पणखा का जन्म हुआ। पुलस्त्य के वंशज राक्षस कर्म में प्रवृत हुए।
🌺10. ऋषि वशिष्ठ - वशिष्ठ मित्र व वरुण के पुत्र माने गये हैं ऐसा वेदों में लिखा है तथा पुराणों के अनुसार ब्रह्मा के मानस पुत्र माने जाते हैं। कर्दम की पुत्री अदृश्वन्ती से पराशर हुए, पराशर व सत्यवती के कृष्ण द्वैपायन व्यास हुए, व्यास की पत्नी अरणी से शुकदेव हुए। सत्यवती से जमदग्नि उत्पन्न हुए। इक्ष्वाकु वंश के राजा की पुत्री कामली रेणुका से जमदग्नि का विवाह हुआ। परशुराम इन्ही के पुत्र थे।
🌺11. ब्रह्मर्षि विश्वामित्र - मुनि विश्वामित्र कान्यकुब्ज के क्षत्रिय राजा गाधि के पुत्र थे इनका नाम विश्वरथ था। विदर्भ के राजा वैदर्भ की पुत्री लोपामुद्रा से इनका विवाह हुआ। ये वर्तमान वैवस्वत मन्वत्तर के सप्तर्ष-गौतम, भरद्वाज, विश्वामित्र, जमदग्नि, वशिष्ठ, कश्यप और अत्रि के अतिरिक्त आइवें गौत्रकर्ता ऋषि हैं।
🌺12. ऋषि वत्स - वत्स, भृगु के सात गणों में से एक हैं। ये जमदग्नि पक्ष में वर्गीकृत हुए। पंचविंश ब्राह्मण के अनुसार उन्हें वंश शुद्धता मेघातिथि के आगे प्रमाणित करने के लिये अग्नि परीक्षा देकर सफल हुए थे।
🌺13. राजा मनु - मनु मनुष्य जाति के प्रथम पुरुष ( क्षत्रिय )हैं। समस्त भूलोक के स्वामी मनु चौदह काल खण्डों चौदह नामों से जाने जाते हैं, ये प्रत्येक मन्वत्तर के प्रथम प्रजापति होते हैं। प्रथम मनु, स्वायम्भुव नाम से कहे गए है, स्वायम्भुव के पश्चात् क्रमशः स्वारोचिष्, औत्रमि, तामस, रैवत तथा चाक्षुष नाम के छः मनुओं का काल समाप्त हो चुका है, वर्तमान सातवें मनु वैवस्वत के काल मैं हम रह रहे हैं, महर्षि कर्दम की पुत्री श्रद्धा वैवस्वत की पत्नी थी। अयोध्या के शासक कुल के प्रथम क्षत्रिय इक्ष्वाकु वंश के जनक वैवस्वत मनु हैं।

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