Jitendra Sharma ECI
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@JitendraEci

18 تغريدة 60 قراءة Aug 27, 2024
महाभारत के 18 दिवस युद्ध का दिवस अनुसार महत्वपूर्ण घटनाक्रम
यहाँ 18 दिनों के युद्ध का सारांश प्रस्तुत है :-
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1. महाभारत की शुरुआत और श्रीकृष्ण का गीता ज्ञान:-
कुरुक्षेत्र का युद्ध महाभारत का मुख्य भाग है। युद्ध से पहले अर्जुन, जो पांडवों के प्रमुख योद्धा थे, युद्धभूमि में अपने परिवार, गुरु, और मित्रों को देखकर विचलित हो गए। उन्हें युद्ध करने के बारे में संदेह और नैतिक संकट होने लगा। इस मानसिक स्थिति में उन्होंने अपने रथ के सारथी, भगवान श्रीकृष्ण से मार्गदर्शन की प्रार्थना की।
यही वह क्षण था जब भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को भगवद गीता का उपदेश दिया।
2. भीष्म पितामह तथा अर्जुन के मध्य युद्ध :-
भीष्म पितामह और अर्जुन के बीच हुआ युद्ध अत्यंत घमासान था। अर्जुन ने अपने धनुष से भीष्म पर प्रचंड आक्रमण किए, लेकिन भीष्म की वीरता और अनुभव के आगे वह थक गए।
श्रीकृष्ण अर्जुन की सहायता में जुटे थे, परंतु इस दौरान दोनों घायल हो गए। इसके बावजूद, अर्जुन की तीव्र तीर वर्षा से कौरव पक्ष को भारी क्षति पहुँची।
3. भीम तथा घटोत्कच ने कौरव सेना पर भयानक आक्रमण किया फलस्वरूप भीष्म पितामह का रौद्र रूप.
कृष्ण द्वारा अर्जुन को भीष्म पितामह के वध की सलाह अर्जुन के निरुत्साह होने पर कृष्ण का क्रोध तथा अपना वचन तोड़ कर हथियार उठाने की धमकी. फलस्वरूप अर्जुन का पुनः उत्साहित होना
4. भीम ने महाभारत युद्ध में कौरवों के 14 प्रमुख योद्धाओं का वध किया, जिससे कौरव सेना को भारी नुकसान हुआ। इस कारण पांडव पक्ष युद्ध में कौरवों पर भारी पड़ा और उनकी विजय सुनिश्चित हुई।
5. महाभारत के युद्ध में सात्यकि के दस पुत्रों का अंत भयंकर युद्ध में हुआ। कौरव पक्ष के योद्धाओं ने एकजुट होकर सात्यकि के पुत्रों का वध कर दिया।
यह युद्ध दोनों ओर से अत्यंत उग्र था, जिसमें पांडव और कौरव योद्धाओं ने अपने-अपने सेनापतियों के प्रति निष्ठा दिखाते हुए भयंकर संघर्ष किया।
6. भीष्म पितामह द्वारा पंचाल नरेश की सेना का अंत. भयंकर युद्ध
7. अर्जुन द्वारा कौरव सेना पर भीषण प्रहार. पांडव पक्ष भारी.
8. भीम द्वारा 8 कौरव भाई धराशायी. अपनी दूसरी पत्नी उलूपी से उनके पुत्र इरावन का युद्ध में अंत. कुल 17 कौरव पुत्रों का भी अंत
9. भीष्म पितामह के वध की सलाह पर अर्जुन के पुनः हतोत्साहित होने पर क्रोधित कृष्ण द्वारा रथ का पहिया उठा कर भीष्म पितामह पर आक्रमण करने के प्रयत्न पर अर्जुन द्वारा उनके क्रोध को शांत करना. कौरव पक्ष युद्ध में पांडवों पर भारी
10. भीष्म पितामह द्वारा भीषण युद्ध. शिखंडी का भीष्म पितामह के सम्मुख युद्ध पर आना तथा भीष्म पितामह के शस्त्र रखने पर अर्जुन द्वारा उनको शर शय्या पर लेटा देना
11. द्रोणाचार्य का कौरव सेनापति बनना. कर्ण का युद्धक्षेत्र में प्रवेश. कौरव पक्ष का युद्ध में पांडवों पर भारी पड़ना.
12. महाराज द्रुपद का युद्ध में अंत. भीषण युद्ध
13. चक्रव्यूह रचना. जयद्रथ द्वारा भीम तथा युद्धिष्ठर आदि को चक्रव्यूह में प्रवेश रोकना तथा अभिमन्यु का चक्रव्यूह में प्रवेश.
अभिमन्यु की 7 महारथियों द्वारा अभिमन्यु का वध. अर्जुन की अगले दिवस सूर्यास्त से पूर्व जयद्रथ वध अथवा अपने अग्निदाह का प्रण.
14. जयद्रथ का दिन भर छिपे रहना तथा अंत में श्रीकृष्ण द्वारा माया से सूर्यास्त करना. ये देख कर जयद्रथ का बाहर प्रकट होना तथा अर्जुन द्वारा जयद्रथ वध
15. द्रोणाचार्य का पांडव सेना पर भीषणप्रहार. श्रीकृष्ण की सलाह पर भीम द्वारा अश्वत्थामा हाथी को मारना. युद्धिष्ठर द्वारा अश्वथामा मारा गया चिल्लाना; द्रोणाचार्य द्वारा समझना कि उनका पुत्र अश्वत्थामा मारा गया,दुख के कारण उनके द्वारा शस्त्र रखना तथा दृष्टुम्न द्वारा उनका वध
16. कर्ण का कौरव सेनापति बनना.नकुल तथा सहदेव का कर्ण से हारना. कर्ण द्वारा माता कुंती को दिए वचन के कारण उनको जीवन दान. कर्ण द्वारा घटोत्कच वध
17. कर्ण द्वारा युद्धिष्ठर तथा भीम की पराजय तथा जीवन दान. अर्जुन कर्ण युद्ध में कर्ण के रथ का पहिया कीचड़ में फंसना. उसको निकालने के प्रयास में श्रीकृष्ण की सलाह पर अर्जुन द्वारा कर्ण वध साथ ही 22 कौरव भाइयों का अंत.
18. भीम द्वारा बचे हुए कौरव भाइयों का अंत. भीम के साथ गदा युद्ध में दुर्योधन की जंघा पर प्रहार तथा दुर्योधन का अंत.
महाभारत युद्ध समाप्त.

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