सोनम गुप्ता
सोनम गुप्ता

@bhagwa_sonam

9 تغريدة 3 قراءة Aug 17, 2024
हमारे बुजर्ग हम से वैज्ञानिक रूप से बहुत आगे थे। थक हारकर वापिस उनकी ही राह पर आना पड़ रहा है।
1. मिट्टी के बर्तनों से स्टील और प्लास्टिक के बर्तनों तक और फिर कैंसर के खौफ से दोबारा मिट्टी के बर्तनों तक आ जाना।
2. अंगूठा छाप से दस्तखतों (Signatures) पर और फिर अंगूठा छाप (Thumb Scanning) पर आ जाना।
3. फटे हुए सादा कपड़ों से साफ सुथरे और प्रेस किए कपड़ों पर और फिर फैशन के नाम पर अपनी पैंटें फाड़कर पहनाना।
4. सूती से टैरीलीन, टैरीकॉट और फिर वापस सूती पर आ जाना।
5. ज्यादा मशक़्क़त वाली ज़िंदगी से घबराकर पढ़ना लिखना और फिर IIM MBA करके आर्गेनिक खेती पर पसीने बहाना।
6. क़ुदरती से प्रोसेस फ़ूड (Canned Food & packed juices) पर आना और फिर बीमारियों से बचने के लिए दोबारा क़ुदरती खानों पर आ जाना।
7. पुरानी और सादा चीज़ें इस्तेमाल न करके ब्रांडेड (Branded) पर आना और फिर आखिरकार जी भर जाने पर पुरानी (Antiques) पर उतरना।
8. बच्चों को इंफेक्शन से डराकर मिट्टी में खेलने से रोकना और फिर घर में बन्द करके उन्हें फिसड्डी बनाना और होश आने पर दोबारा Immunity बढ़ाने के नाम पर मिट्टी से खिलाना...।
9. गाँव, जंगल से डिस्को, पब और चकाचौंध की तरफ भागती हुई दुनियाँ की ओर से फिर मन की शाँति एवं स्वास्थ्य के लिये शहर से जँगल व गाँव की ओर आना।
इससे ये निष्कर्ष निकलता है कि टेक्नॉलॉजी ने जो दिया, उससे बेहतर तो प्रकृति ने पहले से ही दे रखा था।
आइए! प्रकृति से जुडें। नेचर को सम्मान दें।

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