यदि जीवन ने किसी भी प्रकार की समस्या हो तो केवल एक यंत्र वास्तु दोष निवारण कर सकता है
#thread 🧵
🔺कार्य आपका केवल घर की दिशा देखना
🔺यंत्र लाना एवं सिद्ध करना
🔺सिद्ध कैसे करे
१. पंचामृत से शुद्ध करले
२. जिस देवता का यंत्र है उसका १०८ मंत्र जाप करे
३. यंत्र का पूजन करे तथा निम्नलिखित दिशा में समस्या अनुसार स्थापित करे
४. स्थापित यंत्र को देवता स्थान समझते हुए रोज़ ज्योति दिखाए
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🔺कार्य आपका केवल घर की दिशा देखना
🔺यंत्र लाना एवं सिद्ध करना
🔺सिद्ध कैसे करे
१. पंचामृत से शुद्ध करले
२. जिस देवता का यंत्र है उसका १०८ मंत्र जाप करे
३. यंत्र का पूजन करे तथा निम्नलिखित दिशा में समस्या अनुसार स्थापित करे
४. स्थापित यंत्र को देवता स्थान समझते हुए रोज़ ज्योति दिखाए
घर में वास्तु दोषनाशक यंत्र की स्थापना तथा विधि
हर भवन के निर्माण से उसमें शुभ एवं अशुभ दोनों प्रकार के तत्त्व व्याप्त होते हैं। शुभ तत्त्व की अधिकता से उसे शुभ संकेत समझा जाता हैं एवं अशुभ तत्त्व की अधिकता को वास्तु दोष के रुप में जाना जाता हैं। यदि भवन में अशुभ तत्त्व की अधिकता अधिक हो तो उसमें वास्तु दोष उत्पन्न होता हैं।इस दोष के निवारण के लिए तथा शुभ तत्त्वों की वृद्धि के लिए वास्तु दोषनाशक यंत्र की स्थापना करनी चाहिए !
🔹गणेश प्रतिमा
मुख्य द्वार के उपरी हिस्से में अंदर-बाहर मंत्र सिद्ध प्राण-प्रतिष्ठित श्रीयंत्र, कनक धारा यंत्र और दक्षिणावर्ती स्फटिक गणेश जी (दाहिनी सुंढ) को स्थापित करने से उस भवन के द्वार दोष और वास्तु दोष दूर होते हैं।
भवन के मुख्य द्वार के उपर मध्य भाग में श्रीगणेश की प्रतिमा परशु और अंकुश लिए बुद्धिमत्ता और समृद्धि के दाता के रुप में शुभदाय है। मुख्य द्वार पर बैठे हुए गणेशजी की प्रतिमा द्वार के उपर शुभ मानी जाती है। भगवान गणेश हमारे जीवन की सफलता के प्रतीक है। गणेश जी का विशाल उदर में पूरा ब्रह्मांड विद्यमान है। गणेशजी की सूंड विघ्नों को दूर करने के लिए मुड़ी हुई रहती है। हमारी संस्कृति में किसी भी शुभ कार्यों को प्रारंभ करने से पहले इनका प्रथम स्मरण करने का विधान हैं। (2/13)
हर भवन के निर्माण से उसमें शुभ एवं अशुभ दोनों प्रकार के तत्त्व व्याप्त होते हैं। शुभ तत्त्व की अधिकता से उसे शुभ संकेत समझा जाता हैं एवं अशुभ तत्त्व की अधिकता को वास्तु दोष के रुप में जाना जाता हैं। यदि भवन में अशुभ तत्त्व की अधिकता अधिक हो तो उसमें वास्तु दोष उत्पन्न होता हैं।इस दोष के निवारण के लिए तथा शुभ तत्त्वों की वृद्धि के लिए वास्तु दोषनाशक यंत्र की स्थापना करनी चाहिए !
🔹गणेश प्रतिमा
मुख्य द्वार के उपरी हिस्से में अंदर-बाहर मंत्र सिद्ध प्राण-प्रतिष्ठित श्रीयंत्र, कनक धारा यंत्र और दक्षिणावर्ती स्फटिक गणेश जी (दाहिनी सुंढ) को स्थापित करने से उस भवन के द्वार दोष और वास्तु दोष दूर होते हैं।
भवन के मुख्य द्वार के उपर मध्य भाग में श्रीगणेश की प्रतिमा परशु और अंकुश लिए बुद्धिमत्ता और समृद्धि के दाता के रुप में शुभदाय है। मुख्य द्वार पर बैठे हुए गणेशजी की प्रतिमा द्वार के उपर शुभ मानी जाती है। भगवान गणेश हमारे जीवन की सफलता के प्रतीक है। गणेश जी का विशाल उदर में पूरा ब्रह्मांड विद्यमान है। गणेशजी की सूंड विघ्नों को दूर करने के लिए मुड़ी हुई रहती है। हमारी संस्कृति में किसी भी शुभ कार्यों को प्रारंभ करने से पहले इनका प्रथम स्मरण करने का विधान हैं। (2/13)
🔹नवग्रह शांति यंत्र
नवग्रह ग्रहों के यंत्रों को उनकी संबंधित दिशाओं में इस प्रकार से लगाने चाहिए जहां ये आसानी से दिखाई देते हो । नवग्रह शांति यंत्र के पूजन एवं स्थापना से भी वास्तुदोषों का शमन होता हैं!
उत्तर, पूर्व , दक्षिण, पश्चिम, ईशान, आग्नेय, नैऋत्य, वायव्य या ब्रह्म स्थान में जहां भी वास्तु दोष हो उस दिशा में संबंधित देव का यंत्र स्थपित करे या उसे पूजा स्थान में स्थपित करें। (5/13)
नवग्रह ग्रहों के यंत्रों को उनकी संबंधित दिशाओं में इस प्रकार से लगाने चाहिए जहां ये आसानी से दिखाई देते हो । नवग्रह शांति यंत्र के पूजन एवं स्थापना से भी वास्तुदोषों का शमन होता हैं!
उत्तर, पूर्व , दक्षिण, पश्चिम, ईशान, आग्नेय, नैऋत्य, वायव्य या ब्रह्म स्थान में जहां भी वास्तु दोष हो उस दिशा में संबंधित देव का यंत्र स्थपित करे या उसे पूजा स्थान में स्थपित करें। (5/13)
🔹 यदि भवन में निवास करने वाले सदस्यों को मन नहीं लगने, इन्पफेक्शन, अंतड़ियों की समस्या, भय, आर्थिक हानि आदि समस्या ये रहती हो तो भवन का नैऋत्य कोण में दोष होता है। एसी स्थिती में भवन के नैऋत्य कोण में मंत्र सिद्ध प्राण-प्रतिष्ठित राहु यंत्र और मृत्यंजय यंत्र को स्थापित करना चाहिए। नैऋत्य कोण में 7 इंच का गड्ढा खोदकर उसमें सवा 5 से 7 रत्ती का अभिमंत्रित गोमेद दबा देना चाहिए! (8/13)
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