तहक्षी™ Tehxi
तहक्षी™ Tehxi

@yajnshri

13 تغريدة 15 قراءة Aug 15, 2024
यदि जीवन ने किसी भी प्रकार की समस्या हो तो केवल एक यंत्र वास्तु दोष निवारण कर सकता है
#thread 🧵
🔺कार्य आपका केवल घर की दिशा देखना
🔺यंत्र लाना एवं सिद्ध करना
🔺सिद्ध कैसे करे
१. पंचामृत से शुद्ध करले
२. जिस देवता का यंत्र है उसका १०८ मंत्र जाप करे
३. यंत्र का पूजन करे तथा निम्नलिखित दिशा में समस्या अनुसार स्थापित करे
४. स्थापित यंत्र को देवता स्थान समझते हुए रोज़ ज्योति दिखाए
घर में वास्तु दोषनाशक यंत्र की स्थापना तथा विधि
हर भवन के निर्माण से उसमें शुभ एवं अशुभ दोनों प्रकार के तत्त्व व्याप्त होते हैं। शुभ तत्त्व की अधिकता से उसे शुभ संकेत समझा जाता हैं एवं अशुभ तत्त्व की अधिकता को वास्तु दोष के रुप में जाना जाता हैं। यदि भवन में अशुभ तत्त्व की अधिकता अधिक हो तो उसमें वास्तु दोष उत्पन्न होता हैं।इस दोष के निवारण के लिए तथा शुभ तत्त्वों की वृद्धि के लिए वास्तु दोषनाशक यंत्र की स्थापना करनी चाहिए !
🔹गणेश प्रतिमा
मुख्य द्वार के उपरी हिस्से में अंदर-बाहर मंत्र सिद्ध प्राण-प्रतिष्ठित श्रीयंत्र, कनक धारा यंत्र और दक्षिणावर्ती स्फटिक गणेश जी (दाहिनी सुंढ) को स्थापित करने से उस भवन के द्वार दोष और वास्तु दोष दूर होते हैं।
भवन के मुख्य द्वार के उपर मध्य भाग में श्रीगणेश की प्रतिमा परशु और अंकुश लिए बुद्धिमत्ता और समृद्धि के दाता के रुप में शुभदाय है। मुख्य द्वार पर बैठे हुए गणेशजी की प्रतिमा द्वार के उपर शुभ मानी जाती है। भगवान गणेश हमारे जीवन की सफलता के प्रतीक है। गणेश जी का विशाल उदर में पूरा ब्रह्मांड विद्यमान है। गणेशजी की सूंड विघ्नों को दूर करने के लिए मुड़ी हुई रहती है। हमारी संस्कृति में किसी भी शुभ कार्यों को प्रारंभ करने से पहले इनका प्रथम स्मरण करने का विधान हैं। (2/13)
🔹श्रीयंत्र
भवन के सभी प्रकार के दोष दूर करने के लिए मंत्र सिद्ध प्राण-प्रतिष्ठित स्पफटिक श्रीयंत्र की स्थापना करने से एवं उसका प्रतिदिन पूजन-अर्चन करनी चाहिए। (3/13)
🔹मांगलिक चिह्न
भवन के मुख्यद्वार पर ॐ, स्वस्तिक शुभ-लाभ, ऋद्धि-सिद्धि आदि मंगलदायक प्रतिक चिह्न लगाने चाहिए। भवन के मुख्यद्वार पर प्रतिदिन गंगाजल का छिड़काव घर में करना चाहिए। (4/13)
🔹नवग्रह शांति यंत्र
नवग्रह ग्रहों के यंत्रों को उनकी संबंधित दिशाओं में इस प्रकार से लगाने चाहिए जहां ये आसानी से दिखाई देते हो । नवग्रह शांति यंत्र के पूजन एवं स्थापना से भी वास्तुदोषों का शमन होता हैं!
उत्तर, पूर्व , दक्षिण, पश्चिम, ईशान, आग्नेय, नैऋत्य, वायव्य या ब्रह्म स्थान में जहां भी वास्तु दोष हो उस दिशा में संबंधित देव का यंत्र स्थपित करे या उसे पूजा स्थान में स्थपित करें। (5/13)
🔹भवन के उत्तर में बृहस्पति, कुबेर या वरुण यंत्र लगाना चाहिए | (6/13)
🔹घर के आग्नेय कोण में वास्तु दोष हो तो आग्नेय कोण में मंत्र सिद्ध प्राण-प्रतिष्ठित चंद्र यंत्र को स्थापित करना चाहिए। (7/13)
🔹 यदि भवन में निवास करने वाले सदस्यों को मन नहीं लगने, इन्पफेक्शन, अंतड़ियों की समस्या, भय, आर्थिक हानि आदि समस्या ये रहती हो तो भवन का नैऋत्य कोण में दोष होता है। एसी स्थिती में भवन के नैऋत्य कोण में मंत्र सिद्ध प्राण-प्रतिष्ठित राहु यंत्र और मृत्यंजय यंत्र को स्थापित करना चाहिए। नैऋत्य कोण में 7 इंच का गड्‌ढा खोदकर उसमें सवा 5 से 7 रत्ती का अभिमंत्रित गोमेद दबा देना चाहिए! (8/13)
🔹 यदि भवन के दक्षिण आग में दोष हो तो प्रायः समय उस भवन में निवासकर्ता चिंता तनाव आदि से ग्रस्त रहते हैं। मंत्र सिद्ध प्राण-प्रतिष्ठित त्रिकोण मंगल यंत्र को स्थापित करना चाहिए। (9/13)
🔹यदि भवन के वायव्य कोण में दोष हो तो प्रायः निवास कर्ता को कार्य क्षेत्र में समस्याओं का सामना करना पड़ता है। मंत्र सिद्ध प्राण-प्रतिष्ठित केतु यंत्र को स्थापित करना चाहिए।
(10/13)
🔹यदि भवन के पश्चिम भाग में दोष हो तो मंत्र सिद्ध प्राण-प्रतिष्ठित शनि यंत्र को स्थापित करना चाहिए। भवन के मुख्य द्वार पर घोड़े की नाल को U आकार में लगाना चाहिए। उल्टा लगाने से विपरित परिणामों से सम्मुखिन होना पड़ता है। (11/13)
🔹यदि भवन पूर्व भाग में दोष हो तो मंत्र सिद्ध प्राण- प्रतिष्ठित सूर्य यंत्र को स्थापित करना चाहिए। (12/13)
🔹भवन के ईशान कोण में दोष हो तो वास्तुदोषों को दूर करने हेतु मंत्र सिद्ध प्राण-प्रतिष्ठित बृहस्पति यंत्र को स्थापित करना चाहिए।
~ इससे इन दोनों दिशाओं जनित वास्तुदोष दूर होते हैं ! (13/13)
अस्तु

جاري تحميل الاقتراحات...