रुद्राक्ष के बारे में संक्षेप विवरण
🔺 रुद्राक्ष कैसे पहने , एवं कितने मुखी रुद्राक्ष?
🔺रुद्राक्ष के विभिन्न देव कौन है ?
🔺कौनसा रुद्राक्ष किस ग्रह के लिए ठीक है?
🔺किस रुद्राक्ष को किस मंत्र एवं किस दिन पहने?
🔺कौनसा रुद्राक्ष किस चन्द्र एवं लगन राशि के लिए उत्तम है?
🔺 किस रुद्राक्ष से किस रोग में शांति प्राप्त होती है ?
कृपया आप सब #thread 🧵 को अंत तक पढ़े
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🔺रुद्राक्ष के विभिन्न देव कौन है ?
🔺कौनसा रुद्राक्ष किस ग्रह के लिए ठीक है?
🔺किस रुद्राक्ष को किस मंत्र एवं किस दिन पहने?
🔺कौनसा रुद्राक्ष किस चन्द्र एवं लगन राशि के लिए उत्तम है?
🔺 किस रुद्राक्ष से किस रोग में शांति प्राप्त होती है ?
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1 मुखी रुद्राक्ष
शिवपुराण के अनुसार साक्षात शिवस्वरुप माना जाता है. भगवान शिव की कृपा के फलस्वरुप कुछ गिनेचुने भाग्यशाली व्यक्तियों को ही यह दुर्लभ मनी धारण करने का अवसर मिलता है. यह यश, शक्ति, भोग और मोक्ष प्रदान करता है। इसे धारण करने से आध्यात्मिक उन्नति, एकाग्रता, सांसारिक, शारीरिक, मानसिक तथा दैविक कष्टों से छुटकारा, मनोबल में वृद्धि होती है। यह अभय लक्ष्मी दिलाता है। इसके धारण करने पर सूर्य जनित दोषों का निवारण होता है। नेत्र संबंधी रोग, सिर दर्द, हृदय का दौरा, पेट तथा हड्डी संबंधित रोगों के निवारण हेतु इसको धारण करना चाहिए।
कर्क, सिंह और मेष राशि वाले इसे माला रूप में धारण अवश्य करें।
धारण करने का मंत्र:- ॐ ह्रीं नमः
सोमवार
शिवपुराण के अनुसार साक्षात शिवस्वरुप माना जाता है. भगवान शिव की कृपा के फलस्वरुप कुछ गिनेचुने भाग्यशाली व्यक्तियों को ही यह दुर्लभ मनी धारण करने का अवसर मिलता है. यह यश, शक्ति, भोग और मोक्ष प्रदान करता है। इसे धारण करने से आध्यात्मिक उन्नति, एकाग्रता, सांसारिक, शारीरिक, मानसिक तथा दैविक कष्टों से छुटकारा, मनोबल में वृद्धि होती है। यह अभय लक्ष्मी दिलाता है। इसके धारण करने पर सूर्य जनित दोषों का निवारण होता है। नेत्र संबंधी रोग, सिर दर्द, हृदय का दौरा, पेट तथा हड्डी संबंधित रोगों के निवारण हेतु इसको धारण करना चाहिए।
कर्क, सिंह और मेष राशि वाले इसे माला रूप में धारण अवश्य करें।
धारण करने का मंत्र:- ॐ ह्रीं नमः
सोमवार
२ मुखी रुद्राक्ष
दो मुखी रुद्राक्ष शिव का अर्धनारीश्वर स्वरुप है. इससे पति-पत्नि, पिता-पुत्र, मित्र एवं व्यावसायिक संबंधोमे सौहार्द आता है. एकता बनाए रखनेवाला यह मणी आत्मिक शांती और पुर्णता प्रदान करता है. यह चंद्रमा के कारण उत्पन्न प्रतिकूलता के लिए धारण किया जाता है। हृदय, फेफड़ों, मस्तिष्क, गुर्दों, संतान जन्म, गर्भ रक्षा, मिर्गी तथा नेत्र रोगों में इसे धारण करने पर लाभ पहुंचता है। यह ध्यान लगाने में सहायक है। इसे धारण करने से सौहार्द्र लक्ष्मी का वास रहता है। इसे स्त्रियों के लिए उपयोगी माना गया है। धनु व कन्या राशि वाले तथा कर्क, वृश्चिक और मीन लग्न वालों के लिए इसे धारण करना लाभप्रद होता है।
धारण करने का मंत्र :- ॐ नमः
दो मुखी रुद्राक्ष शिव का अर्धनारीश्वर स्वरुप है. इससे पति-पत्नि, पिता-पुत्र, मित्र एवं व्यावसायिक संबंधोमे सौहार्द आता है. एकता बनाए रखनेवाला यह मणी आत्मिक शांती और पुर्णता प्रदान करता है. यह चंद्रमा के कारण उत्पन्न प्रतिकूलता के लिए धारण किया जाता है। हृदय, फेफड़ों, मस्तिष्क, गुर्दों, संतान जन्म, गर्भ रक्षा, मिर्गी तथा नेत्र रोगों में इसे धारण करने पर लाभ पहुंचता है। यह ध्यान लगाने में सहायक है। इसे धारण करने से सौहार्द्र लक्ष्मी का वास रहता है। इसे स्त्रियों के लिए उपयोगी माना गया है। धनु व कन्या राशि वाले तथा कर्क, वृश्चिक और मीन लग्न वालों के लिए इसे धारण करना लाभप्रद होता है।
धारण करने का मंत्र :- ॐ नमः
३ मुखी रुद्राक्ष
यह अग्नी देवता का प्रतिनिधीत्व करता है मंगल ग्रह की प्रतिकुलता से उत्पन्न सभी दोषोका निवारण ३ मुखी रुद्राक्ष करता है. ३ मुखी रुद्राक्ष धारण करनेसे मनुष्य जन्मजन्मांतर के चक्र से मुक्त होकर मोक्ष पाता है. यह मूंगे से भी अधिक प्रभावशाली है। इसे धारण करनें से ब्लडप्रेशर, चेचक, बवासीर, रक्ताल्पता, हैजा, मासिक धर्म, पेट और यकृत संबंधित रोगों का निवारण होता है। इसके धारण करने से श्री, तेज एवं आत्मबल मिलता है। यह सेहत व उच्च शिक्षा के लिए शुभ फल देने वाला है। इसे धारण करने से दरिद्रता दूर होती है तथा पढ़ाई व व्यापार संबंधित प्रतिस्पर्धा में सफलता मिलती है। अग्नि स्वरूप होने के कारण इसे धारण करने से अग्नि देव प्रसन्न होते हैं, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है तथा शरीर स्वस्थ रहता है। इसे धारण करने से सर्वपाप नाश होते हैं। मेष, सिंह, धनु राशि वाले तथा मेष, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु तथा मीन लग्न के जातकों को इसे अवश्य धारण करना चाहिए।
धारण करने का मंत्र :- ॐ क्लीं नमः
यह अग्नी देवता का प्रतिनिधीत्व करता है मंगल ग्रह की प्रतिकुलता से उत्पन्न सभी दोषोका निवारण ३ मुखी रुद्राक्ष करता है. ३ मुखी रुद्राक्ष धारण करनेसे मनुष्य जन्मजन्मांतर के चक्र से मुक्त होकर मोक्ष पाता है. यह मूंगे से भी अधिक प्रभावशाली है। इसे धारण करनें से ब्लडप्रेशर, चेचक, बवासीर, रक्ताल्पता, हैजा, मासिक धर्म, पेट और यकृत संबंधित रोगों का निवारण होता है। इसके धारण करने से श्री, तेज एवं आत्मबल मिलता है। यह सेहत व उच्च शिक्षा के लिए शुभ फल देने वाला है। इसे धारण करने से दरिद्रता दूर होती है तथा पढ़ाई व व्यापार संबंधित प्रतिस्पर्धा में सफलता मिलती है। अग्नि स्वरूप होने के कारण इसे धारण करने से अग्नि देव प्रसन्न होते हैं, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है तथा शरीर स्वस्थ रहता है। इसे धारण करने से सर्वपाप नाश होते हैं। मेष, सिंह, धनु राशि वाले तथा मेष, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु तथा मीन लग्न के जातकों को इसे अवश्य धारण करना चाहिए।
धारण करने का मंत्र :- ॐ क्लीं नमः
४ मुखी रुद्राक्ष
चार मुखी रुद्राक्ष के अधिपती ब्रह्मा है. इससे स्मरणशक्ती, मौखिकशक्ती, व्यवहार चातुर्य, वाक्चातुर्य तथा बुध्दीमत्ता का विकास होता है. इसके दर्शन एवं स्पर्श से धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष की प्राप्ति होती है। मानसिक रोग, पक्षाघात, पीत ज्वर, दमा तथा नासिका संबंधित रोगों के निदान हेतु इसे धारण करना चाहिए । चार मुखी रुद्राक्ष धारण करने से वाणी में मधुरता, आरोग्य तथा तेजस्विता की प्राप्ति होती है। इसमें पन्ना रत्न के समान गुण हैं। सेहत, ज्ञान, बुद्धि तथा खुशियों की प्राप्ति में सहायक है। इसे धारण करने से सांसारिक दुःखों, शारीरिक, मानसिक, दैविक कष्टों तथा बुध ग्रहों के कारण उत्पन्न बाधाओं से छुटकारा मिलता है। वृष, मिथुन, कन्या, तुला, मकर व कुंभ लग्न के जातकों को इसे धारण करना चाहिए।
धारण करने का मंत्र :- ॐ ह्रीं नमः सोमवार
चार मुखी रुद्राक्ष के अधिपती ब्रह्मा है. इससे स्मरणशक्ती, मौखिकशक्ती, व्यवहार चातुर्य, वाक्चातुर्य तथा बुध्दीमत्ता का विकास होता है. इसके दर्शन एवं स्पर्श से धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष की प्राप्ति होती है। मानसिक रोग, पक्षाघात, पीत ज्वर, दमा तथा नासिका संबंधित रोगों के निदान हेतु इसे धारण करना चाहिए । चार मुखी रुद्राक्ष धारण करने से वाणी में मधुरता, आरोग्य तथा तेजस्विता की प्राप्ति होती है। इसमें पन्ना रत्न के समान गुण हैं। सेहत, ज्ञान, बुद्धि तथा खुशियों की प्राप्ति में सहायक है। इसे धारण करने से सांसारिक दुःखों, शारीरिक, मानसिक, दैविक कष्टों तथा बुध ग्रहों के कारण उत्पन्न बाधाओं से छुटकारा मिलता है। वृष, मिथुन, कन्या, तुला, मकर व कुंभ लग्न के जातकों को इसे धारण करना चाहिए।
धारण करने का मंत्र :- ॐ ह्रीं नमः सोमवार
५ मुखी रुद्राक्ष
पाँच मुखी रुद्र कालाग्नी का प्रति निधीत्व करता है. वह सब कुछ करने में समर्थ है। सबको मुक्ति देने वाला तथा संपूर्ण मनोवांछित फल प्रदान करने वाला है। इसको पहनने से अद्भुत मानसिक शक्ति का विकास एवं मनःशांती प्राप्त होती है। गुरु ग्रह की प्रतिकुलतासे उत्पन्न सभी दोषो का निवारण यह करता है। इसे धारण करने से निर्धनता, दाम्पत्य सुख में कमी, जांघ व कान के रोग, मधुमेह जैसे रोगों का निवारण होता है। पांच मुखी रुद्राक्ष धारण करने वालों को सुख, शांति व प्रसिद्धि प्राप्त होते हैं। इसमें पुखराज के समान गुण होते हैं। यह हृदय रोगियों के लिए उत्तम है। इससे आत्मिक विश्वास, मनोबल तथा ईश्वर के प्रति आसक्ति बढ़ती है। मेष, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु, मीन वाले जातक इसे धारण कर सकते हैं।
धारण करने का मंत्र :- ॐ ह्रीं नमः
सोमवार
पाँच मुखी रुद्र कालाग्नी का प्रति निधीत्व करता है. वह सब कुछ करने में समर्थ है। सबको मुक्ति देने वाला तथा संपूर्ण मनोवांछित फल प्रदान करने वाला है। इसको पहनने से अद्भुत मानसिक शक्ति का विकास एवं मनःशांती प्राप्त होती है। गुरु ग्रह की प्रतिकुलतासे उत्पन्न सभी दोषो का निवारण यह करता है। इसे धारण करने से निर्धनता, दाम्पत्य सुख में कमी, जांघ व कान के रोग, मधुमेह जैसे रोगों का निवारण होता है। पांच मुखी रुद्राक्ष धारण करने वालों को सुख, शांति व प्रसिद्धि प्राप्त होते हैं। इसमें पुखराज के समान गुण होते हैं। यह हृदय रोगियों के लिए उत्तम है। इससे आत्मिक विश्वास, मनोबल तथा ईश्वर के प्रति आसक्ति बढ़ती है। मेष, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु, मीन वाले जातक इसे धारण कर सकते हैं।
धारण करने का मंत्र :- ॐ ह्रीं नमः
सोमवार
६ मुखी रुद्राक्ष
इसका स्वामी कार्तिकेय है तथा इस पर शुक्र ग्रह का अधिपत्य है. इसे धारण करनेपर साफ सुथरी प्रतिमा, मजबूत निंव, के साथ जीवन में स्थिरता प्राप्त होती है. तथा ब्रह्महत्या के पाप से मुक्त हो जाता है। ऐशो-आराम तथा वाहन सुख की प्राप्ति होती है। नेत्र रोग, गुप्तेन्द्रियों, पुरुषार्थ, काम-वासना संबंधित व्याधियों में यह अनुकूल फल प्रदान करता है। इसके गुणों की तुलना हीरे से होती है। यह दाई भुजा में धारण किया जाता है। इसे हर राशि के बच्चे, वृद्ध, स्त्री, पुरुष कोई भी धारण कर सकते हैं। आरोग्यता तथा दीर्घायु प्राप्ति के लिए वृष व तुला राशि तथा मिथुन, कन्या, मकर व कुंभ लग्न वाले जातक इसे धारण कर लाभ उठा सकते हैं।
धारण करने का मंत्र :- ॐ ह्रीं हुं नमः
इसका स्वामी कार्तिकेय है तथा इस पर शुक्र ग्रह का अधिपत्य है. इसे धारण करनेपर साफ सुथरी प्रतिमा, मजबूत निंव, के साथ जीवन में स्थिरता प्राप्त होती है. तथा ब्रह्महत्या के पाप से मुक्त हो जाता है। ऐशो-आराम तथा वाहन सुख की प्राप्ति होती है। नेत्र रोग, गुप्तेन्द्रियों, पुरुषार्थ, काम-वासना संबंधित व्याधियों में यह अनुकूल फल प्रदान करता है। इसके गुणों की तुलना हीरे से होती है। यह दाई भुजा में धारण किया जाता है। इसे हर राशि के बच्चे, वृद्ध, स्त्री, पुरुष कोई भी धारण कर सकते हैं। आरोग्यता तथा दीर्घायु प्राप्ति के लिए वृष व तुला राशि तथा मिथुन, कन्या, मकर व कुंभ लग्न वाले जातक इसे धारण कर लाभ उठा सकते हैं।
धारण करने का मंत्र :- ॐ ह्रीं हुं नमः
७ मुखी रुद्राक्ष
सातमुखी रुद्राक्ष ऐश्वर्य की देवता महालक्ष्मी का प्रति निधीत्व करता है. और अनंग स्वरूप और अनंग नाम से प्रसिद्ध है। इस रुद्राक्ष के देवता सात माताएं व हनुमानजी हैं। यह शनि ग्रह द्वारा संचालित है। इसे धारण करने से संपन्नता, ऐश्वर्य तथा उन्नती के नये नये अवसर प्राप्त होते है. आर्थिक विपत्तीयोसे ग्रस्त लोग ईसे धारण करे. व्यवसाय में घाटा टालने या कम करने मे यह मददगार होता है. इससे नाम, प्रतिष्ठा तथा समृद्धि में उत्तरोत्तर बढौत्तरी होती है. तथा यह आंतरिक ज्ञान व सम्मान में वृद्धि करता है। इसे धारण करने पर नपुंसकता, वायु, स्नायु दुर्बलता, विकलांगता, हड्डी व मांस पेशियों का दर्द, पक्षाघात, सामाजिक चिंता, क्षय व मिर्गी आदि रोगों में यह लाभकारी है। इसे धारण करने से कालसर्प योग की शांति में सहायता मिलती है। यह नीलम से अधिक लाभकारी है इसे गले व दाईं भुजा में धारण करना चाहिए। मकर व कुंभ राशि वाले, इसे धारण कर लाभ ले सकते हैं।
धारण करने का मंत्र :- ॐ हुं नमः
सातमुखी रुद्राक्ष ऐश्वर्य की देवता महालक्ष्मी का प्रति निधीत्व करता है. और अनंग स्वरूप और अनंग नाम से प्रसिद्ध है। इस रुद्राक्ष के देवता सात माताएं व हनुमानजी हैं। यह शनि ग्रह द्वारा संचालित है। इसे धारण करने से संपन्नता, ऐश्वर्य तथा उन्नती के नये नये अवसर प्राप्त होते है. आर्थिक विपत्तीयोसे ग्रस्त लोग ईसे धारण करे. व्यवसाय में घाटा टालने या कम करने मे यह मददगार होता है. इससे नाम, प्रतिष्ठा तथा समृद्धि में उत्तरोत्तर बढौत्तरी होती है. तथा यह आंतरिक ज्ञान व सम्मान में वृद्धि करता है। इसे धारण करने पर नपुंसकता, वायु, स्नायु दुर्बलता, विकलांगता, हड्डी व मांस पेशियों का दर्द, पक्षाघात, सामाजिक चिंता, क्षय व मिर्गी आदि रोगों में यह लाभकारी है। इसे धारण करने से कालसर्प योग की शांति में सहायता मिलती है। यह नीलम से अधिक लाभकारी है इसे गले व दाईं भुजा में धारण करना चाहिए। मकर व कुंभ राशि वाले, इसे धारण कर लाभ ले सकते हैं।
धारण करने का मंत्र :- ॐ हुं नमः
८ मुखी रुद्राक्ष
आठ मुखी रुद्राक्ष के स्वामी भैरव एवं गणेशजी है तथा राहु ग्रह इसका अधिपती है। इसे धारण करने वाला मनुष्य पूर्णायु होता है। और अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति मिलती है। यह मार्ग के सारे अवरोध दुर करता है और सभी कार्यो में यश देता है. विरोधीयों के मन तथा हेतू मे बदलाव लाकर शत्रुओं को भी धारण कर्ता के हित मे सोचने के लिये बाध्य करता है। मोतियाविंद, फेफड़े के रोग, पैरों में कष्ट, चर्म रोग आदि रोगों तथा राहु की पीड़ा से यह छुटकारा दिलाने में सहायक है। इसकी तुलना गोमेद से की जाती है। इसे सिद्ध कर धारण करने से पितृदोष दूर होता है। मकर और कुंभ राशि वालों के लिए यह अनुकूल है। मेष, वृष, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, कुंभ व मीन लग्न वाले इससे जीवन में सुख समृद्धि प्राप्त कर सकते हैं।
धारण करने का मंत्र:- ॐ हुं नमः
आठ मुखी रुद्राक्ष के स्वामी भैरव एवं गणेशजी है तथा राहु ग्रह इसका अधिपती है। इसे धारण करने वाला मनुष्य पूर्णायु होता है। और अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति मिलती है। यह मार्ग के सारे अवरोध दुर करता है और सभी कार्यो में यश देता है. विरोधीयों के मन तथा हेतू मे बदलाव लाकर शत्रुओं को भी धारण कर्ता के हित मे सोचने के लिये बाध्य करता है। मोतियाविंद, फेफड़े के रोग, पैरों में कष्ट, चर्म रोग आदि रोगों तथा राहु की पीड़ा से यह छुटकारा दिलाने में सहायक है। इसकी तुलना गोमेद से की जाती है। इसे सिद्ध कर धारण करने से पितृदोष दूर होता है। मकर और कुंभ राशि वालों के लिए यह अनुकूल है। मेष, वृष, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, कुंभ व मीन लग्न वाले इससे जीवन में सुख समृद्धि प्राप्त कर सकते हैं।
धारण करने का मंत्र:- ॐ हुं नमः
९ मुखी रुद्राक्ष
नौमुखी रुद्राक्ष की स्वामी नवदुर्गा है तथा केतु इसका प्रति निधीत्व करता है। यह धारणकर्ता को अपार उर्जा, शक्ती तथा चैतन्य देता है. क्रोध पर नियंत्रण रखता है। ज्ञान की प्राप्ति होती है। ऐश्वर्य, धन-धान्य, खुशहाली को प्रदान करता है। धर्म-कर्म, अध्यात्म में रुचि बढ़ाता है। केतु की प्रतिकुलता से उत्पन्न होने वाले सभी दोषों का निवारण यह करता है। ज्वर, नेत्र, उदर, फोड़े, फुंसी आदि रोगों में इसे धारण करने से अनुकूल लाभ मिलता है। यह लहसुनिया से अधिक प्रभावकारी है। मकर एवं कुंभ राशि वालों को इसे धारण करना चाहिए।
धारण करने का मंत्र :- ॐ ह्रीं हूं नमः
नौमुखी रुद्राक्ष की स्वामी नवदुर्गा है तथा केतु इसका प्रति निधीत्व करता है। यह धारणकर्ता को अपार उर्जा, शक्ती तथा चैतन्य देता है. क्रोध पर नियंत्रण रखता है। ज्ञान की प्राप्ति होती है। ऐश्वर्य, धन-धान्य, खुशहाली को प्रदान करता है। धर्म-कर्म, अध्यात्म में रुचि बढ़ाता है। केतु की प्रतिकुलता से उत्पन्न होने वाले सभी दोषों का निवारण यह करता है। ज्वर, नेत्र, उदर, फोड़े, फुंसी आदि रोगों में इसे धारण करने से अनुकूल लाभ मिलता है। यह लहसुनिया से अधिक प्रभावकारी है। मकर एवं कुंभ राशि वालों को इसे धारण करना चाहिए।
धारण करने का मंत्र :- ॐ ह्रीं हूं नमः
१० मुखी रुद्राक्ष
दशमुखी रुद्राक्ष के अधिपती भगवान विष्णु तथा यम देव है. यह रुद्राक्ष एक कवच का कार्य करता है जिसे धारण करनेपर नकारात्मक उर्जा से आसिम सुरक्षा प्राप्त होती है. इससे न्यायालयीन मुकदमे, भूमी से जुडे व्यवहार में यश प्राप्त होता है तथा कर्ज से मुक्ती मिलती है. और मनुष्य की संपूर्ण इच्छाएं पूरी हो जाती हैं। इसमें नवरत्न मुद्रिका के समान गुण पाये जाते हैं। यह सभी कामनाओं को पूर्ण करने में सक्षम है। जादू-टोने के प्रभाव से यह बचाव करता है। मानसिक शांति, भाग्योदय तथा स्वास्थ्य का यह अनमोल खजाना है। सर्वग्रह इसके प्रभाव से शांत रहते हैं। मकर तथा कुंभ राशि वाले जातकों को इसे धारण करना चाहिए।
धारण करने का मंत्र :- ॐ ह्रीं नमः
दशमुखी रुद्राक्ष के अधिपती भगवान विष्णु तथा यम देव है. यह रुद्राक्ष एक कवच का कार्य करता है जिसे धारण करनेपर नकारात्मक उर्जा से आसिम सुरक्षा प्राप्त होती है. इससे न्यायालयीन मुकदमे, भूमी से जुडे व्यवहार में यश प्राप्त होता है तथा कर्ज से मुक्ती मिलती है. और मनुष्य की संपूर्ण इच्छाएं पूरी हो जाती हैं। इसमें नवरत्न मुद्रिका के समान गुण पाये जाते हैं। यह सभी कामनाओं को पूर्ण करने में सक्षम है। जादू-टोने के प्रभाव से यह बचाव करता है। मानसिक शांति, भाग्योदय तथा स्वास्थ्य का यह अनमोल खजाना है। सर्वग्रह इसके प्रभाव से शांत रहते हैं। मकर तथा कुंभ राशि वाले जातकों को इसे धारण करना चाहिए।
धारण करने का मंत्र :- ॐ ह्रीं नमः
११ मुखी रुद्राक्ष
ग्यारह मुखी रुद्राक्ष के अधिपती ११ रुद्रदेव है. ग्यारह मुखी रुद्राक्ष भगवान इंद्र का प्रतीक है। इसे शिखा में बांधकर धारण करने से हजार अश्वमेध यज्ञ तथा ग्रहण में दान करने के बराबर फल प्राप्त होता है। इसे धारण करने से समस्त सुखों में वृद्धि होती है। यह विजय दिलाने वाला तथा आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करने वाला है। दीर्घायु व वैवाहिक जीवन में सुख-शांति प्रदान करता है। विभिन्न प्रकार के मानसिक रोगों तथा विकारों में यह लाभकारी है तथा जिस स्त्री को संतान प्राप्ति नहीं होती है इसे विश्वास पूर्वक धारण करने से बंध्या स्त्री को भी संतान प्राप्त हो सकती है। इसे धारण करने से बल व तेज में वृद्धि होती है। मकर व कुंभ राशि के व्यक्ति इसे धारण कर सकते हैं।
धारण करने का मंत्र :- ॐ ह्रीं हुं नमः
ग्यारह मुखी रुद्राक्ष के अधिपती ११ रुद्रदेव है. ग्यारह मुखी रुद्राक्ष भगवान इंद्र का प्रतीक है। इसे शिखा में बांधकर धारण करने से हजार अश्वमेध यज्ञ तथा ग्रहण में दान करने के बराबर फल प्राप्त होता है। इसे धारण करने से समस्त सुखों में वृद्धि होती है। यह विजय दिलाने वाला तथा आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करने वाला है। दीर्घायु व वैवाहिक जीवन में सुख-शांति प्रदान करता है। विभिन्न प्रकार के मानसिक रोगों तथा विकारों में यह लाभकारी है तथा जिस स्त्री को संतान प्राप्ति नहीं होती है इसे विश्वास पूर्वक धारण करने से बंध्या स्त्री को भी संतान प्राप्त हो सकती है। इसे धारण करने से बल व तेज में वृद्धि होती है। मकर व कुंभ राशि के व्यक्ति इसे धारण कर सकते हैं।
धारण करने का मंत्र :- ॐ ह्रीं हुं नमः
१२ मुखी रुद्राक्ष
बारह मुखी रुद्राक्ष के अधिपती सुर्यदेव है. इस रुद्राक्ष को बालों में पहना जाता है। धारण कर्ता को शासन करने की क्षमता, अलौकीक बुध्दीमत्ता की चमक, तेज और शक्ती जैसे सुर्यदेव के गुण प्राप्त होते है. आत्मिक उर्जा मे बढौतरी होती है. सरकारी अफसर व कर्मचारीयोके लिये 12 मुखी रुद्राक्ष विशेष लाभदायी सिध्द होता है. इससे प्रमोशन, मनचाही जगहपर पोस्टींग, पद, प्रतिष्ठा, व अन्य लाभ प्राप्त होते है. UPSC व अन्य Competitive Exams कि तैय्यारी कर रहे Candidates के लिये भी यह रुद्राक्ष शुभफलदायी होता है. व्यक्तित्व निखारते हुए उँचे दर्जेका आत्मविश्वास प्रदान करनेका कार्य भी यह रुद्राक्ष करता है. यह नेत्र ज्योति में वृद्धि करता है।
धारण करने का मंत्र :- ॐ क्रौं क्षौं रौं नमः
बारह मुखी रुद्राक्ष के अधिपती सुर्यदेव है. इस रुद्राक्ष को बालों में पहना जाता है। धारण कर्ता को शासन करने की क्षमता, अलौकीक बुध्दीमत्ता की चमक, तेज और शक्ती जैसे सुर्यदेव के गुण प्राप्त होते है. आत्मिक उर्जा मे बढौतरी होती है. सरकारी अफसर व कर्मचारीयोके लिये 12 मुखी रुद्राक्ष विशेष लाभदायी सिध्द होता है. इससे प्रमोशन, मनचाही जगहपर पोस्टींग, पद, प्रतिष्ठा, व अन्य लाभ प्राप्त होते है. UPSC व अन्य Competitive Exams कि तैय्यारी कर रहे Candidates के लिये भी यह रुद्राक्ष शुभफलदायी होता है. व्यक्तित्व निखारते हुए उँचे दर्जेका आत्मविश्वास प्रदान करनेका कार्य भी यह रुद्राक्ष करता है. यह नेत्र ज्योति में वृद्धि करता है।
धारण करने का मंत्र :- ॐ क्रौं क्षौं रौं नमः
१३ मुखी रुद्राक्ष
१३ मुखी रुद्राक्ष के स्वामी इन्द्रदेव (देवोके राजा) तथा अधिपती कामदेव होते है. धारण कर्ता की सारी सांसारीक मनोकामनाऐं पुरी होती है. कामदेव की कृपा से आकर्षण शक्ती तथा करिशमाई व्यक्तित्व प्राप्त होता है। हमेशा Center of Attraction रहने हेतू यह रुद्राक्ष फिल्म अभिनेता, राजनेता व कारोबारीयों में अत्यंत लोकप्रिय है. इससे धारण कर्ता के प्रती आकर्षण तथा जनाधार दिन ब दिन बढते जाता है। यह समस्त कामनाओं एवं सिद्धियों को प्रदान करने वाला है। निः संतान को संतान तथा सभी कार्यों में सफलता मिलती है
धारण करने का मंत्र :- ॐ ह्रीं नमः
१३ मुखी रुद्राक्ष के स्वामी इन्द्रदेव (देवोके राजा) तथा अधिपती कामदेव होते है. धारण कर्ता की सारी सांसारीक मनोकामनाऐं पुरी होती है. कामदेव की कृपा से आकर्षण शक्ती तथा करिशमाई व्यक्तित्व प्राप्त होता है। हमेशा Center of Attraction रहने हेतू यह रुद्राक्ष फिल्म अभिनेता, राजनेता व कारोबारीयों में अत्यंत लोकप्रिय है. इससे धारण कर्ता के प्रती आकर्षण तथा जनाधार दिन ब दिन बढते जाता है। यह समस्त कामनाओं एवं सिद्धियों को प्रदान करने वाला है। निः संतान को संतान तथा सभी कार्यों में सफलता मिलती है
धारण करने का मंत्र :- ॐ ह्रीं नमः
१४ मुखी रुद्राक्ष
चौदह मुखी रुद्राक्ष अनमोल इश्वरीय रत्न है. इसे साक्षात 'देवमणी' कहा जाता है. इसके अधिपती स्वयं भगवान शिव और हनुमान है. धारण कर्ता को दुर्घटना, यातना व चिंतासे मुक्ती दिलाते हुए सफलता की ओर ले जाता है. और समस्त पापों का नाश करते हैं। १४ मुखी रुद्राक्ष के अधिपती ग्रह शनि और मंगल है. इसे धारण करने से शनि व मंगल दोष की शांति होती है। दैविक औषधि के रूप में यह शक्ति बनकर शरीर को स्वस्थ रखता है। जिन्हे साढेसाती, ४था या ८वा शनि चल रहा है, ऐसे तमाम लोगों को इसे पहेनने से बडी राहत मिलती है. सिंह राशि वाले इसको धारण करें, तो उत्तम रहेगा।
धारण करने का मंत्र : ॐ नमः
चौदह मुखी रुद्राक्ष अनमोल इश्वरीय रत्न है. इसे साक्षात 'देवमणी' कहा जाता है. इसके अधिपती स्वयं भगवान शिव और हनुमान है. धारण कर्ता को दुर्घटना, यातना व चिंतासे मुक्ती दिलाते हुए सफलता की ओर ले जाता है. और समस्त पापों का नाश करते हैं। १४ मुखी रुद्राक्ष के अधिपती ग्रह शनि और मंगल है. इसे धारण करने से शनि व मंगल दोष की शांति होती है। दैविक औषधि के रूप में यह शक्ति बनकर शरीर को स्वस्थ रखता है। जिन्हे साढेसाती, ४था या ८वा शनि चल रहा है, ऐसे तमाम लोगों को इसे पहेनने से बडी राहत मिलती है. सिंह राशि वाले इसको धारण करें, तो उत्तम रहेगा।
धारण करने का मंत्र : ॐ नमः
१७ मुखी रुद्राक्ष
इसके अधिपती विश्व के निर्माता विश्वकर्मा है. धारणकर्ता को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष प्राप्त होते है. अपने पेशे में व भाग्य में लगातार बढौतरी चाहनेवाले व्यवसायी, प्रबंधक, सरकारी अधिकारी तथा राजकीय नेताओ के लिए १७ मुखी रुद्राक्ष अत्यंत लाभदायी होता है. कात्यायनी तंत्र के अनुसार धारणकर्ता पर लगातार सफलता, अचानक संपत्ती तथा सांसारिक सुखोकी वर्षा होती ।
इसके अधिपती विश्व के निर्माता विश्वकर्मा है. धारणकर्ता को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष प्राप्त होते है. अपने पेशे में व भाग्य में लगातार बढौतरी चाहनेवाले व्यवसायी, प्रबंधक, सरकारी अधिकारी तथा राजकीय नेताओ के लिए १७ मुखी रुद्राक्ष अत्यंत लाभदायी होता है. कात्यायनी तंत्र के अनुसार धारणकर्ता पर लगातार सफलता, अचानक संपत्ती तथा सांसारिक सुखोकी वर्षा होती ।
२१ मुखी रुद्राक्ष
यह दुर्लभ रुद्राक्ष कुबेर का स्वरुप है. धारण करने वाला अपार जमिन- जायदाद, सुख और भौतिक इच्छायें पुर्ण होने का वरदान पाता है।
गौरीशंकर रुद्राक्ष
२ मणी प्राक्क्रुतीक रुप से एक साथ होने से शिव-पार्वती के एकरुप का प्रतिनिधीत्व करते है. इसे धारण करने या घर में रखने से परिवार के सारे सदस्यो में एकता तथा समाज के सभी वर्गों के साथ भाईचारा बना रहता है।
यह दुर्लभ रुद्राक्ष कुबेर का स्वरुप है. धारण करने वाला अपार जमिन- जायदाद, सुख और भौतिक इच्छायें पुर्ण होने का वरदान पाता है।
गौरीशंकर रुद्राक्ष
२ मणी प्राक्क्रुतीक रुप से एक साथ होने से शिव-पार्वती के एकरुप का प्रतिनिधीत्व करते है. इसे धारण करने या घर में रखने से परिवार के सारे सदस्यो में एकता तथा समाज के सभी वर्गों के साथ भाईचारा बना रहता है।
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