Vibhu Vashisth 🇮🇳
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@Indic_Vibhu

20 تغريدة 3 قراءة Mar 21, 2024
⚜️।।सनातन धर्म अपने-आप में ज्ञान का भंडार है। हमारे ग्रंथों में अनेक विद्याओं का उल्लेख मिलता है। जहाँ कुछ विद्याएं सरल और सहज ही समझ आ जाती हैं,वहीं अनेक विद्याएं बहुत ही रहस्यमयी हैं।।⚜️
आइए जानते हैं ऐसी ही कुछ विद्याओं के बारे में;
(भाग-4)
🌺।।तंत्र विद्या।।🌺
इस विद्या का एक निम्न स्तर भी है। जैसे इस विद्या के माध्यम से नजर लगना, उन्माद भूतोन्माद, ग्रहों का अनिष्ट, बुरे दिन, किसी के द्वारा प्रेरित अभिचार, मानसिक उद्वेग आदि को शांत करना भी होता है।
शारीरिक रोगों के निवारण, सर्प, बिच्छू आदि का दर्शन एवं विषैले फोड़ों का समाधान भी तंत्र द्वारा किए जाने का दावा किया जाता है। वैसे तो तांत्रिक साधना का मूल उद्देश्य सिद्धि से साक्षात्कार करना है। इसके लिए अंतर्मुखी होकर साधनाएं की जाती हैं।
💮तांत्रिक साधना को साधारणतया 3 मार्ग क्रमशः;
●वाम मार्ग,
●दक्षिण मार्ग और
●मध्यम मार्ग कहा गया है।
💮अग्निपुराण के अनुसार षट्कर्मों में “मरण तंत्र” नेष्ठ कर्म में गिना जाता है क्योंकि “मारण कर्म” किसी को मृत्यु देना या तुल्य कष्ट देना कहलाता है।
इसमें वायु तत्व को बढ़ा कर यादाशत नष्ट कर देना, कानों में सनसनाहट, नसों व हड्डी में पीड़ा या विकार देना, पित्त तत्व को बढ़ा कर पाचन शक्ति विकृत कर देना या फोड़ा, गैंग्रीन, कैंसर आदि पैदा करना।
कफ तत्व बढ़ा कर अस्थमा, ब्रोनाक्रटीस, दमा आदि रोगों को पैदा करना आदि क्रिया “मरण तंत्र” के अंतर्गत आता है।
💮इस तरह 'अग्निपुराण' में मारण, मोहन, उच्चाटन आदि के कितने ही प्रयोग मिलते हैं। शत्रु-नाश के लिए मारण प्रयोगों को काम में लाया जाता है। मारण कितने ही प्रकार का होता है।
एक तो ऐसा है जिससे किसी मनुष्य की तुरन्त मृत्यु हो जाय। ऐसा प्रयोगों में ‘‘घात’’ या ‘‘कृत्या’’ प्रसिद्ध है। वह एक शक्तिशाली तांत्रिक अग्नि अस्त्र है जो प्रत्यक्षतः दिखाई नहीं पड़ता तो भी बन्दूक की गोली की तरह निशाने पर पहुंचता है और शत्रु को गिरा देता है।
दूसरे प्रकार के मारण मन्द मारण कहे जाते हैं, इनके प्रयोग से किसी व्यक्ति को रोगी बनाया जा सकता है। ज्वर, दस्त, दर्द, लकवा, उन्माद, मतिभ्रम आदि रोगों का आक्रमण किसी व्यक्ति पर उसी प्रकार हो सकता है जिस प्रकार कीटाणु बमों से प्लेग, हैजा आदि महामारियों को फैलाया जाता है।
💮इस प्रकार के प्रयोग नैतिक दृष्टि से उचित हैं या अनुचित ? यह प्रश्न दूसरा है पर इतना निश्चित है कि यह असंभव नहीं, संभव है। जिस प्रकार विष खिलाकर या शस्त्र चलाकर किसी मनुष्य को मार डाला जा सकता है वैसे ही ऐसे अदृश्य उपकरण भी हो सकते हैं जिनको प्रेरित करने से
प्रकृति के घातक परमाणु एकत्रित होकर अभीष्ट लक्ष की ओर दौड़ पड़ते हैं और उस पर भयंकर आक्रमण करके उस पर चढ़ बैठते हैं और परास्त करके प्राण संकट में डाल देते हैं।
इसी प्रकार प्रकृति के गर्भ में विचरण करते हुए किसी रोग विशेष के कीटाणुओं को किसी व्यक्ति विशेष की ओर विशेष रूप से प्रेरित किया जा सकता है।
💮'मृत्यु किरण’आजका ऐसा ही वैज्ञानिक आविष्कार है।किसी प्राणी पर इन किरणों को डालाजाए तो उसकी मृत्यु निश्चित है।प्रत्यक्ष देखने में उस व्यक्ति को किसीप्रकार का घाव आदि नहीं होता पर अदृश्य मार्गसे उसके भीतरी अवयवों पर ऐसा सूक्ष्म आघात होता हैकि उसप्रहार से उसका प्राणान्त होजाता है।
यदि वह आघात हलके दर्जे का हुआ तो उससे मृत्यु तो नहीं होती, पर मृत्यु तुल्य कष्ट देने वाले या घुला-घुलाकर मार डालने वाले रोग पैदा हो जाते हैं।
💮शाप देने की विद्या प्राचीन काल में अनेक लोगों को मालूम थी।जिसे शाप दिया था उसका बड़ा अनिष्ट होता था।
शाप देने वाला अपनी आत्मिक शक्तियों को एकत्रित करके एक विशेष विधि-व्यवस्था के साथ जिसके ऊपर उनका प्रहार करता था, उसका वैसा ही अनिष्ट हो जाता था जैसा कि शाप देने वाला चाहता था।
💮तान्त्रिक अभिचारों द्वारा भी इसी प्रकार से दूसरों का अनिष्ट हो सकता है। परन्तु ध्यान रखने की बात यह है कि इस प्रकार के प्रयोगों में प्रयोगकर्ता की शक्ति भी कम नष्ट नहीं होती। बालक प्रसव करने के उपरान्त माता बिलकुल निर्बल, निःसत्व हो जाती है,
किसी को काटने के बाद सांप निस्तेज, हतवीर्य और शक्ति रहित हो जाता है। मारण, उच्चाटन के अभिचार करने वाले लोगों की शक्तियां भी भारी परिणाम में व्यय हो जाती हैं और उसकी क्षति-पूर्ति के लिए उन्हें असाधारण प्रयोग करने होते हैं।
💮जिस प्रकार तन्त्र द्वारा दूसरों का मारण, मोहन, उच्चाटन आदि अनिष्ट हो सकता है उसी प्रकार कोई कुशल तांत्रिक इस प्रकार के अभिचारों को रोक भी सकता है। उन प्रयोगों को निष्फल भी कर सकता है।
यहां तक कि उस आक्रमण को इस प्रकार उलट सकता है कि वह प्रयोगकर्त्ता पर उलटा पड़े और उसी का अनिष्ट कर दे। घात, कृत्या, चौकी आदि को कोई भिन्न तांत्रिक उलट दे तो उसके प्रेरिक प्रयोक्ता पर विपत्ति का पहाड़ टूटा हुआ ही समझिए।
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साभार : अमृत बिंदु
⚜️।।सनातन धर्म अपने-आप में ज्ञान का भंडार है। हमारे ग्रंथों में अनेक विद्याओं का उल्लेख मिलता है। जहाँ कुछ विद्याएं सरल और सहज ही समझ आ जाती हैं,वहीं अनेक विद्याएं बहुत ही रहस्यमयी हैं।।⚜️
आइए जानते हैं ऐसी ही कुछ विद्याओं के बारे में;
(भाग-3)👇

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