💮पौराणिक कथाओं में माहिष्मती को हैहयवंशीय कार्तवीर्य अर्जुन अथवा सहस्त्रबाहु की राजधानी बताया गया है।
💮उत्तर भारत से नागरी लिपि के ढेरों लेख मिलते हैं।
💮उत्तर भारत से नागरी लिपि के ढेरों लेख मिलते हैं।
💮इनमें गुहिलवंशी,चौहान वंशी, राष्ट्रकूट ,चालुक्य ,परमार, चंदेलवंशी ,हैहय(कलचुरी)आदि राजाओं के नागरी लिपि में लिखे हुए दानपत्र तथा शिलालेख प्रसिद्ध हैं।
चीनीयात्री युवानच्वांग,640ई. को लगभग इस स्थान पर आया था।उसके लेख अनुसार उससमय महिष्मती मेंएक ब्राह्मण राजा राज्य करता था।
चीनीयात्री युवानच्वांग,640ई. को लगभग इस स्थान पर आया था।उसके लेख अनुसार उससमय महिष्मती मेंएक ब्राह्मण राजा राज्य करता था।
⚜️।।पौराणिक संदर्भ।।⚜️
💮पुराणों के अनुसार महाभारत-युद्ध के बाद से लेकर महापद्मनंद के समय तक 23 शूरसेन, 24 इक्ष्वाकु, 27 पंचाल, 24 काशी, 28 हैहय, 32 कलिंग, 25 अश्मक, 36 कुरु, 28 मैथिल और 20 बीति-होत्र राजाओं ने भारत पर शासन किया।
💮पुराणों के अनुसार महाभारत-युद्ध के बाद से लेकर महापद्मनंद के समय तक 23 शूरसेन, 24 इक्ष्वाकु, 27 पंचाल, 24 काशी, 28 हैहय, 32 कलिंग, 25 अश्मक, 36 कुरु, 28 मैथिल और 20 बीति-होत्र राजाओं ने भारत पर शासन किया।
💮बाहु नामक सूर्यवंश के राजा और सगर के पिता को हैहयों और तालजंधों ने परास्त कर देश-निष्कासित किया था।
💮परशुराम ने युद्ध में हैहयराज अर्जुन को मारा तथा केवल धनुष की सहायता से सरस्वती के तट पर हज़ारों ब्राह्मणद्वेषी क्षत्रियों को मार डाला।
💮परशुराम ने युद्ध में हैहयराज अर्जुन को मारा तथा केवल धनुष की सहायता से सरस्वती के तट पर हज़ारों ब्राह्मणद्वेषी क्षत्रियों को मार डाला।
💮एक बार कार्तवीर्य अर्जुन ने बाणों से समुद्र को त्रस्त कर किसी परम वीर के विषय में पूछा। समुद्र ने उसे परशुराम से लड़ने को कहा। परशुराम को उसने अपने व्यवहार से बहुत रुष्ट कर दिया। अत: परशुराम ने उसकी हज़ार भुजाएं काट डालीं।
किंवदंती है कि सहस्त्रबाहु ने अपनी सहस्त्र भुजाओं से नर्मदा का प्रवाह रोक दिया था।
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