सावित्री ने अपने पति ब्रह्मा को ऐसा श्राप क्यों दिया था, इसका वर्णन पद्म पुराण में मिलता है। पद्म पुराण के अनुसार धरती पर वज्रनाश नामक राक्षस ने बहुत उत्पात मचा रखा था। उसके बढ़ते अत्याचारों से तंग आकर ब्रह्मा जी ने उसका वध कर दिया था।
ब्रह्मा जी यज्ञ करने के लिए पुष्कर पहुंच गए लेकिन उनकी पत्नी सावित्री समय पर नहीं पहुंच सकी। इस यज्ञ को पूरा करने के लिए उनके साथ उनकी पत्नी का होना आवश्यक था। परंतु सावित्री जी के नहीं पहुंचने की वजह से ब्रह्मा जी ने वहीं की एक कन्या गायत्री से विवाह कर इस यज्ञ को शुरू कर लिया।
उसी दौरान देवी सावित्री वहां पहुंच गई और ब्रह्मा जी के बगल में दूसरी कन्या को बैठा देखकर क्रोधित हो गई। उनहोंने ब्रह्मा जी को श्राप दिया कि देवता होने के बावजूद भी उनकी कभी भी पूजा नहीं होगी।
सावित्री के इस रूप को देखकर सभी देवता डर गए और सावित्री जी से विनती की कि अपना श्राप वापस ले लीजिए, लेकिन उन्होंने किसी की न सुनी। जब गुस्सा शांत हुआ तब सावित्री जी ने कहा कि इस धरती पर केवल सिर्फ पुष्कर में ही आपकी पूजा होगी। साथ ही जो भी आपका मंदिर बनाएगा उसका विनाश हो जाएगा।
कहते हैं कि उसके बाद भगवान विष्णु ने ब्रह्मा की मदद की लेकिन देवी सावित्री ने विष्णु जी को भी श्राप दे दिया कि उन्हें पत्नी से अलग होने का कष्ट सहना पड़ेगा।इसी कारण भगवान विष्णु ने राम के रूप में अवतार लिया और इसी क्रम में 14 साल के वनवास के दौरान उन्हें पत्नी से अलग रहना पड़ा।
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