इसे सेव कर सुरक्षित कर लें, ऐसी पोस्ट कम ही आती है..
कुण्डलिनी शक्ति जागरण के लक्षण...
जब ध्यान साधना के दौरान आपको निम्न लक्षण नज़र आने लगे तो समझ ले की आपकी कुण्डलिनी शक्ती जागृत हो रही है ।
1) जब आपको दिव्य दर्शन, सुगन्ध, स्वाद, श्रवण और किसी के आपको छूने की अनुभुति हो ।
2) जब आपको परमात्मा की तरफ से सन्देश मिलने लगे ।
3) जब मूलाधार चक्र मे स्पंदन होने लगे ।
4) जब आपके रौंगटे खड़े होने लगे ।
5) जब गहन साधना के दौरान आपकी श्वास चलते चलते रूक जाये ।
6) जब आपको अपनी रीढ की हड्डी मे नीचे से ऊपर तक सिरहन होने लगे ।
7) जब आप अकारण ही आनंदित रहने लगे ।
8) जब स्वतः ही आपके मुख से ओम का उच्चारण होने लगे ।
9) जब आपकी आँखे भूमध्य मे थिर होकर शाम्भवी मुद्रा लगने लगे
10) जब आपको शरीर के विभिन्न भागो मे विधुत के झटके लगने की अनुभूति होने लगे ।
11) जब ध्यान के दौरान आपकी बंद पलके जोर लगाने पर भी ना खुले ।
12) जब सभी संदेह दूर हो जाये और आपको सभी अध्यात्मिक ग्रंथों का मर्म समझ आने लगे ।
13) जब ध्यान के दौरान आपको अपना शरीर हवा से भी हल्का महसूस होने लगे ।
14) जब संकट काल व मुसीबत के समय मे भी आपका मन व्यग्र या विचलित ना हो ।
15) जब आप किसी भी कठिन कार्य को बिना थके घंटो तक करते चले जाये ।
16) जब आपको हर समय एक खुमारी या नशे जैसी स्थिति रहने लगे और होश भी पुरा रहे ।
17) जब आप की कही बाते सत्य सिद्ध होने लगे
तब जाने की आप की सोई शक्ती जाग रही है..
जय सनातन धर्म जय श्रीराम, जय गोविंदा
पोस्ट जनहित जानकारी हेतु रिट्वीट शेयर फालो जरूर करें धन्यवाद @_vatsalasingh
कुण्डलिनी शक्ति जागरण के लक्षण...
जब ध्यान साधना के दौरान आपको निम्न लक्षण नज़र आने लगे तो समझ ले की आपकी कुण्डलिनी शक्ती जागृत हो रही है ।
1) जब आपको दिव्य दर्शन, सुगन्ध, स्वाद, श्रवण और किसी के आपको छूने की अनुभुति हो ।
2) जब आपको परमात्मा की तरफ से सन्देश मिलने लगे ।
3) जब मूलाधार चक्र मे स्पंदन होने लगे ।
4) जब आपके रौंगटे खड़े होने लगे ।
5) जब गहन साधना के दौरान आपकी श्वास चलते चलते रूक जाये ।
6) जब आपको अपनी रीढ की हड्डी मे नीचे से ऊपर तक सिरहन होने लगे ।
7) जब आप अकारण ही आनंदित रहने लगे ।
8) जब स्वतः ही आपके मुख से ओम का उच्चारण होने लगे ।
9) जब आपकी आँखे भूमध्य मे थिर होकर शाम्भवी मुद्रा लगने लगे
10) जब आपको शरीर के विभिन्न भागो मे विधुत के झटके लगने की अनुभूति होने लगे ।
11) जब ध्यान के दौरान आपकी बंद पलके जोर लगाने पर भी ना खुले ।
12) जब सभी संदेह दूर हो जाये और आपको सभी अध्यात्मिक ग्रंथों का मर्म समझ आने लगे ।
13) जब ध्यान के दौरान आपको अपना शरीर हवा से भी हल्का महसूस होने लगे ।
14) जब संकट काल व मुसीबत के समय मे भी आपका मन व्यग्र या विचलित ना हो ।
15) जब आप किसी भी कठिन कार्य को बिना थके घंटो तक करते चले जाये ।
16) जब आपको हर समय एक खुमारी या नशे जैसी स्थिति रहने लगे और होश भी पुरा रहे ।
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