तेरे कहने के अनुसार चीन और जापान मे सुत्र पहले बनते थे फिर तिब्बत और भारत मे आते थे ??
और चीन के निलकंठ धारणी मे यज्ञोपवीत ही कहा गया है।
Bèi hēi shé yǐwéi shén xiàn
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और चीन के निलकंठ धारणी मे यज्ञोपवीत ही कहा गया है।
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इधर भी मुह पर गिर गया , सुत्त मे स्पष्ट रुप से 'यज्योपवीय' ही शब्द आया है।
तेरा ही स्क्रिनशॉट तेरे पिछवाडे घुस गया।
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तेरा ही स्क्रिनशॉट तेरे पिछवाडे घुस गया।
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यही बात तो मै भी कह रहा था की, बोधिसत्व 'अजिन यज्ञोपवीत' पहनते है, जिसमे हिरण का चमडा लगा होता है।
लेकिन उस समय तेरी फटी पडी थी, नकार रहा था। और आज वही बात खुद लिख रहा।
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लेकिन उस समय तेरी फटी पडी थी, नकार रहा था। और आज वही बात खुद लिख रहा।
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इधर तो सुटियापे की हद ही कर दी।
ब्राह्मण की Celestial Beings के साथ तुलना कर रहा। स्वर्णोपवीत, रत्नोपवीत, सर्पोपवीत आदी देवता, बोधिसत्व,यक्षों आदी के लिऐ होते है।
ब्रह्मवैवर्तपुराण और कुमारसंभव मे मुक्तायज्ञोपवीत और स्वर्णोयज्ञोपवीत का उल्लेख कीया गया है
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ब्राह्मण की Celestial Beings के साथ तुलना कर रहा। स्वर्णोपवीत, रत्नोपवीत, सर्पोपवीत आदी देवता, बोधिसत्व,यक्षों आदी के लिऐ होते है।
ब्रह्मवैवर्तपुराण और कुमारसंभव मे मुक्तायज्ञोपवीत और स्वर्णोयज्ञोपवीत का उल्लेख कीया गया है
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