सोनम गुप्ता
सोनम गुप्ता

@bhagwa_sonam

10 تغريدة 2 قراءة Sep 23, 2023
साधारण-सी नौकरी करने से लेकर एक प्रसिद्ध खगोल विज्ञानी बनना और एक 160 रूपये के टेलीस्कोपके सहारे बंगाल के लोगों में अंतरिक्ष को लेकर नई जिज्ञासा को जन्म देना, कोई आसान काम तो नहीं होगा न?
हम बात कर रहे हैं बंगाल के प्रसिद्ध खगोल विज्ञानी राधा गोबिंद चंद्रा की!
राधा गोबिंद चंद्र का जन्म अविभाजित भारत के जेसोर जिले के बागचर गांव में 1878 में हुआ था। एक साधारण परिवार से आने वाले चंद्रा कई मामलों में अन्य बच्चों से अलग थे। उन्हें ब्रह्मांड को लेकर बहुत जिज्ञासा थी। वह बचपन से ही अपने मामा की लाइब्रेरी में घन्टों किताबें पढ़ते थे।
उन्हें किताबें पढ़ने का शौक तो था लेकिन वह स्कूल की पढ़ाई में उतने अच्छे नहीं थे। इसलिए 10वीं के बाद वह औपचारिक शिक्षा जारी नहीं रख पाए और नौकरी की तलाश करने लगे।
जिसके बाद जेसोर के सरकारी खजाने में उन्हें नौकरी मिल गई, जिसके लिए उन्हें 15 रुपये वेतन मिलता था। लेकिन साथ साथ खगोल विज्ञान में उनकी रुचि और बढ़ती गई। वह दिन में नौकरी के बाद अपनी आसमान को खंगालने में लगे रहते।
इसी के साथ उन्हें जेसोर के एक वकील कालीनाथ मुखर्जी का मार्गदर्शन मिला जो एक खगोल विज्ञानी भी थे जिसके बाद वह उनसे ब्रह्मांड को लेकर नई नई चीजें सीखने लगे। आसमान के प्रति उनका जुनून इतना था कि वह अपनी खुद की दूरबीन बनाने और उसके माध्यम से धूमकेतुओं को देखते थे।
इसके बाद जब 1910 में उन्हें हेली धूमकेतु की खबर मिली तो वह इस मौके को हाथ से जाने नहीं देना चाहते थे। इसलिए उन्होंने इसे लेकर जानकारी इकट्ठा की और निर्धारित समय पर सही जगह पर पहुँच कर हेली धूमकेतु देखा। इसी के साथ वह ऐसा करने वाले पहले चुनिंदा लोगों में शामिल हो गए।
इसके बाद उन्होंने अपना एक टेलिस्कोप खरीदने का फैसला किया पर उस समय उनके पास इतने पैसे नहीं थे। लेकिन किस्मत ने उनका साथ दिया और उसी समय सरकार ने उनका वेतन बढ़ा दिया।
जिसके बाद उन्होंने लंदन की बर्नार्ड एंड कंपनी से अप्रैल 1912 में 160 रुपये में 3 इंच का रिफ्लेक्टर टेलिस्कोप मंगवाया। इसके बाद इस टेलिस्कोप से वह आसमान की दुनिया को खंगालने में लग गए।
धीरे धीरे उन्हें खगोल विज्ञान में योगदान के लिए पहचाना जाने लगा, इसी कड़ी में उनके काम को अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ वेरिएबल स्टार ऑब्जर्वर (एएवीएसओ) ने सम्मानित किया और उन्हें एक 6.25 इंच का रिफ्लेक्टर टेलीस्कोप दिया।
1918 में, उन्हें नोवा एक्विला-3 की खोज का श्रेय दिया गया, जो एक चमकीला तारा था। अपने जीवनकाल के दौरान, चंद्रा ने 1954 तक कुल 49,700 स्टेलर ऑब्जरवेशन की।

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