तहक्षी™ Tehxi
तहक्षी™ Tehxi

@yajnshri

16 تغريدة 36 قراءة Jul 13, 2023
𝟮𝟯 𝘁𝗵𝗶𝗻𝗴𝘀 𝗶𝗻 #𝘁𝗵𝗿𝗲𝗮𝗱 𝘁𝗲𝗹𝗹𝗶𝗻𝗴 𝘀𝗶𝗴𝗻𝗶𝗳𝗶𝗰𝗮𝗻𝗰𝗲 𝗼𝗳 𝗮𝗹𝗹 𝗿𝗶𝘁𝘂𝗮𝗹𝗶𝘀𝘁𝗶𝗰 𝗽𝗼𝗼𝗷𝗮𝗻 𝗺𝗮𝘁𝗲𝗿𝗶𝗮𝗹
सम्पूर्ण अनुष्ठानिक आरती/पूजन सामग्री का प्रमाणिक महत्व
1- सुपारी :- ये ऐसी वस्तु हैं, जिनके बिना पूजा संपन्न नहीं हो सकती। सुपारी में…
2- सप्त नदियों का जल :- पवित्र नदियाँ गंगा, गोदावरी, नर्मदा, कावेरी, कृष्णा, ब्रह्मपुत्र और यमुना सात पवित्र नदियाँ मानी जाती हैं। इन सभी सात नदियों का जल अनुष्ठानिक कलश में एकत्र किया जाता है,'स्नानं समर्पयामि' कहते हुए चम्मच से जल चढ़ाते हैं, जिसका तात्पर्य यह है कि हम तन, मन,…
3- जनेऊ :- देवताओं को जनेऊ अर्पित करने का अर्थ है देवताओं के तेज के विस्तार को पवित्र धागे के घेरे में बांधना और उन्हें द्वंद्व में कार्य करने के लिए प्रेरित करना। चूँकि जनेऊ धागे से बना होता है और मंत्र की ऊर्जा से चार्ज होता है , इससे निकलने वाली ध्वनि की आवृत्तियाँ ब्रह्मांड…
5- कपास वस्त्र/माला :- सूती वस्त्र कुंडलिनी (ब्रह्मांडीय ऊर्जा प्रणाली) की सुषुम्ना नाड़ी का प्रतिनिधित्व करता है और वस्त्र में सात सूती मोती सन्निहित आत्मा के शरीर में कुंडलिनी प्रणाली के सात केंद्रों से जुड़े होते हैं। इन मोतियों को जोड़ने वाला सूती धागा पूरे शरीर को सत्व…
गंध का प्रयोग कपास वस्त्र कपास की माला बनाते समय दूध को प्राथमिकता दे कर बनाई जाती है । गंध के लेप के कारण देवताओं की तरंगें तेजी से सक्रिय होती हैं और सूती वस्त्र की ओर आकर्षित होती हैं । इस सत्त्व प्रधान वस्त्र से देवता की गर्दन को सुशोभित करने से , देवता तेजी से अपना 'गुणों…
7- पुष्प :- पुष्पं समर्पयामि' कहकर जो पुष्प चढ़ा जाते हैं, उनका तात्पर्य यह है कि पुष्प की तरह ही हमारा जीवन हमेशा खिलता रहे, हंसता रहे, प्रसन्न रहे फूल की तरह एक होकर समर्पित जीवन जीने और लोक मंगल के लिए अपना सर्वस्व सर्वत्र बिखेरने तथा अपनी सुगंध से सबको मोहित करने का गुण हम…
8- दीपक :- दीपक तभी प्रकाशित होता है, जब उसमें पात्र, घी और बत्ती तीनों का संयोग हो, यानी पात्रता, निष्ठा और समर्पण। घी को रोकने के लिए जैसे पात्र की आवश्यकता होती है, ठीक वैसी ही पात्रता हममें भगवान् की सेवा की होनी चाहिए। समाज सेवा और सत्कर्मों के प्रति निष्ठाभाव ज्ञान का…
9- धूपबत्ती :- बांस के लगी अगरबत्ती नहीं केवल धूपबत्ती जलाने से सकारात्मक जैव विद्युत चुंबकीय ऊर्जा उत्पन्न होती है, जिससे मन में नकारात्मक विचार कम आते हैं और स्वास्थ्य अच्छा रहता है साथ ही इनके जलाने का तात्पर्य यह है कि हमारा जीवन और व्यक्तित्व ऐसा बने कि जहां कहीं भी जाएं,…
10- कलश :- प्रत्येक पूजा और अनुष्ठान के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बिंदु कलश होता है, प्रस्तुत कलश के प्रत्येक भाग का एक अलग अर्थ होता है। घड़े का गोलाकार भाग उर्वरता का प्रतिनिधित्व करता है, कलश के ऊपर नारियल प्रचुरता का प्रतीक है। 
11- पीली सरसों :- पीली सरसों के बीज के रूप में…
12- कुमकुम/सिंदूर और हल्दी :- कुमकुम जो चूने या नीबू के रस में हल्दी को मिलाकर बनाया जाता है, त्वचा का शोधन और मस्तिष्क स्नायुओं का संयोजन करता है। हल्दी में खून को शुद्ध करने, शरीर की त्वचा में निखार लाने, घाव को ठीक करने और अनेक बीमारियां दूर करने का गुण होता है। इसलिए यह एक…
13- गुलाल :- ब्रह्माण्ड में दैवी ऊर्जा तत्त्व गुलाल से उत्पन्न सूक्ष्म वायु में मौजूद सुगंधित कणों की ओर आकर्षित होता है । साथ ही वातावरण में चैतन्य से समृद्ध सुप्त तरंगें गुलाल के कारण गतिशील हो जाती हैं । इस प्रकार उपासक को उनसे लाभ होता है।
14- गंधा :- जब चित्र या मूर्ति में…
15- तुलसी :- तुलसी में मूलतः 50% विष्णु तत्त्व और बेल के पौधे में 70% शिव तत्त्व होता है। जब इनका उपयोग अनुष्ठानिक पूजा में किया जाता है तो उनमें दैवीय तत्त्व 20% तक बढ़ जाता है। वातावरण में रज-तम प्रत्येक वस्तु को प्रभावित करता है । वातावरण में रज-तम का मुकाबला करने के लिए उन्नत…
17- नारियल :- नारियल में पांच देवताओं अर्थात् शिव, श्री दुर्गादेवी, गणपति, श्रीराम और श्रीकृष्ण की तरंगों को आकर्षित करने और उन्हें आवश्यकतानुसार प्रसारित करने की क्षमता है। इसलिए, नारियल को सबसे शुभ फल - 'श्रीफल' माना जाता है , जो सबसे अधिक सत्त्वगुण प्रदान करने वाला फल है।…
20- कपूर :- कपूर जलाने से उत्पन्न सूक्ष्म वायु की गंध देवता शिव के दूतों को काफी हद तक आकर्षित करने की क्षमता रखती है। ये दूत परिसर में निम्न नकारात्मक ऊर्जाओं को नियंत्रण में रखते हैं। उनकी उपस्थिति किसी स्थान और परिसर के देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त करने में भी मदद करती है। कपूर…
22- रंगोली :- सात्विक पैटर्न में रंगोली बनाने से उनके चारों ओर एक सुरक्षात्मक आवरण बनाने में मदद मिलती है, जिससे निकलने वाली तेजी से बढ़ती आवृत्तियों का पता चलता है। पृथ्वी की तरंगें रंगोली से निकलने वाली तरंगों की ओर आकर्षित होती हैं और उसके पैटर्न में जुड़ जाती हैं।…
24- प्रसादम :- आमतौर पर प्रसाद का तात्पर्य होता है जो बिना मांगे मिले, क्योंकि प्रसाद बांटने वाला स्वयं ही हाथ बढ़ाकर देता है। इसीलिए भगवान् के नाम पर बांटे जाने वाला पदार्थ का नाम प्रसाद रखा गया है। हम जानते हैं कि भगवान् की कृपा को प्रसाद रूप में प्राप्त करने का ही भक्त अभिलाषी…

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