अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस कैपिटल पर 40000 करोड़ का कर्जा था,केस कोर्ट में गया, बैंको के साथ एडजस्टमेंट हुआ 20000 करोड़ का, कंपनी की सारी एसेट का रि वेल्यूसन किया गया, आंकड़ा बैठा 12000 करोड़ का।
आदेश पर कम्पनी बेचने के लिए बीड निकाली गई, सब से ज्यादा बोली लगी 5231 करोड़ की👇
आदेश पर कम्पनी बेचने के लिए बीड निकाली गई, सब से ज्यादा बोली लगी 5231 करोड़ की👇
और खरीदनेवाला ग्रुप था परिमल ग्रुप। अब ये परिमल ग्रुप कौन है इस का पता लगाया तो वो निकले मुकेश अंबानी के समधी।
यानि कुल मिलाके मामला ये हुआ कि घर की कंपनी घर में ही रही लेकिन इस बीच बैंको को लग गया 34769 करोड़ का चूना!
बैंक तो सरकारी ही थी, यानि कम्पनी पर लोन ली अनिल अंबानी 👇
यानि कुल मिलाके मामला ये हुआ कि घर की कंपनी घर में ही रही लेकिन इस बीच बैंको को लग गया 34769 करोड़ का चूना!
बैंक तो सरकारी ही थी, यानि कम्पनी पर लोन ली अनिल अंबानी 👇
ने, कंपनी डुबाई अनिल अंबानी ने, कंपनी बेची अंबानी ने, कंपनी खरीदी भाई के समधी ने। इस पूरे खेल में सरकार का यानि हमारे तुम्हारे टैक्स का 34769 करोड़ रुपया डूबा।
और ये सब हो रहा है, हिंदू हृदय सम्राट की निगरानी में। खतरा हिंदू धर्म को है या देश के आम नागरिक को है? एक दिन ये लोग👇
और ये सब हो रहा है, हिंदू हृदय सम्राट की निगरानी में। खतरा हिंदू धर्म को है या देश के आम नागरिक को है? एक दिन ये लोग👇
देश बेच डालेंगे, वैसे भी देश के आधे से संसाधन पर विदेशी कम्पनियों का कब्जा हो ही चुका हैं। देशवासियों, आंखे खोलो।
आप फिर से गुलामी की जंजीर में जकड़े जा रहे है और आप को एहसास भी नही हैं।
आप फिर से गुलामी की जंजीर में जकड़े जा रहे है और आप को एहसास भी नही हैं।
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