बहुत सारी वजहें होंगी, जिनमें हमारे खानपान में बदलाव को सबसे खास माना जा सकता है।
बदलाव के उस दौर में एक चीज बहुत ख़ास थी जो खो गयी, पता है क्या चीज़ थी वो? दातून !
गाँव देहात में आज भी लोग दातून इस्तमाल करते दिख जाएंगे लेकिन शहरों में दातून पिछड़ेपन का संकेत बन चुका है।
बदलाव के उस दौर में एक चीज बहुत ख़ास थी जो खो गयी, पता है क्या चीज़ थी वो? दातून !
गाँव देहात में आज भी लोग दातून इस्तमाल करते दिख जाएंगे लेकिन शहरों में दातून पिछड़ेपन का संकेत बन चुका है।
गाँव देहात में डायबिटीज़ और हाइपरटेंशन के रोगी शहर के मुक़ाबले कम ही दिखेंगे।वजह है वहाँ के लोग आज भी दातून का प्रयोग या नीम के पत्ते चबा लेते हैं।
आप सोचेंगे डायबिटीज़ और हाइ ब्लड प्रेशर के साथ दातून का क्या संबंध!!
आजकल बाज़ार में जो टूथपेस्ट और माउथवॉश आ रहे हैं
आप सोचेंगे डायबिटीज़ और हाइ ब्लड प्रेशर के साथ दातून का क्या संबंध!!
आजकल बाज़ार में जो टूथपेस्ट और माउथवॉश आ रहे हैं
जो 99.9% सूक्ष्मजीवों का नाश करने का दावा करते हैं, उन्होंने ही ये सारा काम ख़राब किया है।
ये माउथवॉश और टूथपेस्ट बेहद स्ट्राँग एंटीमाइक्रोबियल होते हैं और हमारे मुंह के 99% से ज्यदा सूक्ष्मजीवों को वाकई मार गिराते हैं। इनकी मारक क्षमता इतनी जबर्दस्त होती है कि ये
ये माउथवॉश और टूथपेस्ट बेहद स्ट्राँग एंटीमाइक्रोबियल होते हैं और हमारे मुंह के 99% से ज्यदा सूक्ष्मजीवों को वाकई मार गिराते हैं। इनकी मारक क्षमता इतनी जबर्दस्त होती है कि ये
मुंह के उन बैक्टिरिया का भी खात्मा कर देते हैं, जो हमारी लार (सलाइवा) में होते हैं और ये वही बैक्टिरिया हैं जो हमारे शरीर के नाइट्रेट (NO3-) को नाइट्राइट (NO2-) और बाद में नाइट्रिक ऑक्साइड (NO) में बदलने में मदद करते हैं।
जैसे ही हमारे शरीर में नाइट्रिक ऑक्साइड की कमी होती है, ब्लड प्रेशर बढ़ता है।ऐसा नहीं है दुनियाभर की रिसर्च स्ट्डीज़ बताती हैं कि नाइट्रिक ऑक्साइड का कम होना ब्लड प्रेशर को बढ़ाने के लिए जिम्मेदार है।
जर्नल ऑफ क्लिनिकल हायपरेटेंस (2004) में 'नाइट्रिक ऑक्साइड इन हाइपरटेंशन'
जर्नल ऑफ क्लिनिकल हायपरेटेंस (2004) में 'नाइट्रिक ऑक्साइड इन हाइपरटेंशन'
टाइटल के साथ छपे एक रिव्यु आर्टिकल में सारी जानकारी विस्तार से छपी है और नाइट्रिक ऑक्साइड की यही कमी इंसुलिन रेसिस्टेंस के लिए भी जिम्मेदार है।
अब समझिए, नाइट्रिक ऑक्साइड बढ़ेगा कैसे जब इसे बनाने वाले बैक्टिरिया का ही काम तमाम कर दिया जा रहा है?
अब समझिए, नाइट्रिक ऑक्साइड बढ़ेगा कैसे जब इसे बनाने वाले बैक्टिरिया का ही काम तमाम कर दिया जा रहा है?
ब्रिटिश डेंटल जर्नल में 2018 में तो बाकायदा एक स्टडी छपी थी जिसका टाइटल ही ’माउथवॉश यूज़ और रिस्क ऑफ डायबिटीज़’ था।
इस स्टडी में बाकायदा तीन साल तक उन लोगों पर अध्धयन किया गया जो दिन में कम से कम 2 बार माउथवॉश का इस्तमाल करते थे और पाया गया कि 50% से ज्यादा लोगों
इस स्टडी में बाकायदा तीन साल तक उन लोगों पर अध्धयन किया गया जो दिन में कम से कम 2 बार माउथवॉश का इस्तमाल करते थे और पाया गया कि 50% से ज्यादा लोगों
को प्री-डायबिटिक या डायबिटीज़ की कंडिशन का सामना करना पड़ा।
अब जानिए करना क्या है?
दांतों की फिक्र करने के चक्कर में आपके पूरे शरीर की बैंड बज रही है। गाँव देहातों में तो दातून का भरपूर इस्तेमाल हो रहा है और ये दातून मुंह की दुर्गंध भी दूर कर देते हैं
अब जानिए करना क्या है?
दांतों की फिक्र करने के चक्कर में आपके पूरे शरीर की बैंड बज रही है। गाँव देहातों में तो दातून का भरपूर इस्तेमाल हो रहा है और ये दातून मुंह की दुर्गंध भी दूर कर देते हैं
और सिर्फ़ हानि पहुँचाने वाले बैक्टिरिया को ख़त्म करते।
आदिवासी टूथपेस्ट, टूथब्रश क्या होते हैं, ये जानते तक नहीं। अब आप सोचेंगे कि दीपकआचार्य ने टूथपेस्ट और माउथवॉश को लेकर इतनी पंचायत कर ली तो दातून के प्रभाव को लेकर किसी क्लिनिकल स्टडी की बात क्यों नही की?
आदिवासी टूथपेस्ट, टूथब्रश क्या होते हैं, ये जानते तक नहीं। अब आप सोचेंगे कि दीपकआचार्य ने टूथपेस्ट और माउथवॉश को लेकर इतनी पंचायत कर ली तो दातून के प्रभाव को लेकर किसी क्लिनिकल स्टडी की बात क्यों नही की?
बबूल और नीम की दातून को लेकर एक क्लिनिकल स्टडी 'जर्नल ऑफ क्लिनिकल डायग्नोसिस एंड रिसर्च' में छपी और बताया गया कि स्ट्रेप्टोकोकस म्यूटेंस की वृद्धि रोकने में ये दोनों जबर्दस्त तरीके से कारगर हैं।
ये वही बैक्टिरिया है जो दांतों को सड़ाता है और कैविटी का कारण भी बनता है।
ये वही बैक्टिरिया है जो दांतों को सड़ाता है और कैविटी का कारण भी बनता है।
वो सूक्ष्मजीव जो नाइट्रिक ऑक्साइड बनाते हैं जैसे एक्टिनोमायसिटीज़, निसेरिया, शालिया, वीलोनेला आदि दातून के शिकार नहीं होते क्योंकि इनमें वो हार्ड केमिकल कंपाउंड नहीं होते जो माउथवॉश और टूथपेस्ट में डाले जाते हैं।
विदेशी लोग आज हमारे ही देसी उपायों मनचाहे दामों में बेच रहे,
विदेशी लोग आज हमारे ही देसी उपायों मनचाहे दामों में बेच रहे,
हमारे देसी उपायों को कॉपी पेस्ट कर उन्हें अपना बना उनका पेटेंट करा रहे
मुद्दे की बात ये है कि अब हमे अपने देसी वस्तुओं के उपयोग और उनकी उपयोगिता को समझना पड़ेगा और उनकी तरफ़ वापसी करनी होगी। एक कहावत है-
बासी पानी जे पिये, ते नित हर्रा खाय
मोटी दतुअन जे करे, ते घर बैद न जाय।
मुद्दे की बात ये है कि अब हमे अपने देसी वस्तुओं के उपयोग और उनकी उपयोगिता को समझना पड़ेगा और उनकी तरफ़ वापसी करनी होगी। एक कहावत है-
बासी पानी जे पिये, ते नित हर्रा खाय
मोटी दतुअन जे करे, ते घर बैद न जाय।
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