भारत सोने की चिड़िया बनाने वाला असली राजा कौन था ?
कौन था, वह राजा ? जिसके राजगद्दी पर बैठने के बाद उनके श्रीमुख से "देववाणी" ही, निकलती थी। और देववाणी से ही न्याय होता था ?
कौन था वह राजा ? जिसके राज्य में अधर्म का संपूर्ण नाश हो गया था।
महाराज विक्रमादित्य :-
बड़े ही दुख की बात है, कि महाराज विक्रमादित्य के बारे में, देश को लगभग शून्य बराबर ज्ञान है। जिन्होंने भारत को सोने की चिड़िया बनाया था और स्वर्णिम काल लाया था।
उज्जैन के राजा थे, गन्धर्वसैन, जिनके तीन संतानें थी। सबसे बड़ी लड़की थी मैनावती, उससे छोटा लड़का भृतहरि और सबसे छोटा वीर विक्रमादित्य। बहन मैनावती की शादी धारानगरी के राजा पदमसैन के साथ कर दी, जिनके एक लड़का हुआ गोपीचन्द। आगे चलकर गोपीचन्द ने श्री ज्वालेन्दर नाथ जी से योग दीक्षा ले ली और तपस्या करने जंगलों में चले गए। फिर मैनावती ने भी, श्री गुरू गोरक्ष नाथ जी से योग दीक्षा ले ली।
आज ये देश और यहाँ की संस्कृति केवल, विक्रमादित्य के कारण अस्तित्व में है।
अशोक मौर्य ने बोद्ध धर्म अपना लिया था। और बोद्ध बनकर 25 साल राज किया था।
भारत में तब सनातन धर्म लगभग समाप्ति पर आ गया था। देश में बौद्ध और अन्य हो गए थे।
रामायण और महाभारत जैसे ग्रन्थ खो गए थे। महाराज विक्रम ने ही, पुनः उनकी खोज करवा कर, स्थापित किया।
विष्णु और शिव जी के मंदिर बनवाये और सनातन धर्म को बचाया। विक्रमादित्य के 9 रत्नों में से एक कालिदास ने अभिज्ञान शाकुन्तलम् लिखा। जिसमें भारत का इतिहास है, अन्यथा भारत का इतिहास क्या है मित्रो ? हम भगवान् कृष्ण और राम को ही, खो चुके थे। हमारे ग्रन्थ ही, भारत में खोने के कगार पर आ गए थे।
उस समय उज्जैन के राजा भृतहरि ने राज छोड़कर, श्री गुरू गोरक्ष नाथ जी से योग की दीक्षा ले ली और तपस्या करने जंगलों में चले गए। राज अपने छोटे भाई विक्रमादित्य को दे दिया। वीर विक्रमादित्य भी श्री गुरू गोरक्ष नाथ जी से गुरू दीक्षा लेकर, राजपाट सम्भालने लगे और आज उन्हीं के कारण सनातन धर्म बचा हुआ है। हमारी संस्कृति बची हुई है।
महाराज विक्रमादित्य ने केवल धर्म ही नहीं बचाया, उन्होंने देश को आर्थिक तौर पर सोने की चिड़िया बनाई। उनके राज को ही भारत का स्वर्णिम राज: कहा जाता है।
विक्रमादित्य के काल में भारत का कपड़ा, विदेशी व्यपारी, सोने के वजन से खरीदते थे।
भारत में इतना सोना आ गया था कि विक्रमादित्य काल में सोने के सिक्के चलते थे। आप गूगल इमेज कर..., विक्रमादित्य के सोने के सिक्के देख सकते हैं।
कैलंडर, जो विक्रम संवत लिखा जाता है, वह भी, विक्रमादित्य का स्थापित किया हुआ है।
आज जो भी ज्योतिष गणना है जैसे, हिन्दी सम्वंत, वार, तिथियां, राशि, नक्षत्र, गोचर, आदि, उन्ही की रचना है। वे बहुत ही पराक्रमी, बलशाली, और बुद्धिमान, राजा थे।
कई बार तो देवता भी, उनसे न्याय करवाने आते थे।
विक्रमादित्य के काल में हर नियम धर्मशास्त्र के हिसाब से बने होते थे। न्याय, राज, सब धर्मशास्त्र के नियमों पर चलता था।
विक्रमादित्य का काल, प्रभु श्रीराम के राज के बाद सर्वश्रेष्ठ माना गया है। जहाँ प्रजा धनी थी और धर्म पर चलने वाली थी।
बड़े दुःख की बात है कि भारत के सबसे महानतम “राजा विक्रमादित्य" के बारे में हमारे स्कूलों/ कालेजों मे कोई स्थान नहीं है।
प्राचीन काल में भारत को सोने की चिड़िया इसलिए कहा जाता था क्योंकि भारत में काफी धन सम्पदा मौजूद थी. 1600 ईस्वी के आस-पास भारत की प्रति व्यक्ति जीडीपी 1305 अमेरिकी डॉलर थी जो कि उस समय अमेरिका, जापान, चीन और ब्रिटेन से भी अधिक थी. भारत की यह संपत्ति ही विदेशी आक्रमणों का कारण भी बनी थी.
इसी समय में अंग्रेजों ने भारत पर कब्ज़ा किया था लेकिन जब अंगेज भारत को छोड़कर गए तो भारत का विश्व अर्थव्यवस्था में योगदान मात्र 2 to 3% रह गया था, लेकिन आज भारत विश्व की पांचवी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है.
मुगलों के शासन शुरू करने से पहले, भारत 1 A.D. और 1000 A.D. के बीच दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था थी. जब मुगलों ने 1526-1793 के बीच भारत पर शासन किया, इस समय भारत की आय (17.5 मिलियन पाउंड), ग्रेट ब्रिटेन की आय से अधिक थी. वर्ष 1600 AD में भारत की प्रति व्यक्ति GDP 1305 डॉलर थी जबकि इसी समय ब्रिटन की प्रति व्यक्ति GDP 1137 डॉलर, अमेरिका की प्रति व्यक्ति GDP 897 डॉलर और चीन की प्रति व्यक्ति GDP 940 डॉलर थी. इतिहास बताता है कि मीर जाफर ने 1757 में ईस्ट इंडिया कंपनी को 3.9 मिलियन पाउंड का भुगतान किया था. यह तथ्य भारत की सम्पन्नता को दर्शाने के लिए बड़ा सबूत है.
1500 A.D के आस-पास दुनिया की आय में भारत की हिस्सेदारी 24.5% थी जो कि पूरे यूरोप की आय के बराबर थी.
सिक्कों को बनाने वाले पहले देशों में शामिल;
कौन था, वह राजा ? जिसके राजगद्दी पर बैठने के बाद उनके श्रीमुख से "देववाणी" ही, निकलती थी। और देववाणी से ही न्याय होता था ?
कौन था वह राजा ? जिसके राज्य में अधर्म का संपूर्ण नाश हो गया था।
महाराज विक्रमादित्य :-
बड़े ही दुख की बात है, कि महाराज विक्रमादित्य के बारे में, देश को लगभग शून्य बराबर ज्ञान है। जिन्होंने भारत को सोने की चिड़िया बनाया था और स्वर्णिम काल लाया था।
उज्जैन के राजा थे, गन्धर्वसैन, जिनके तीन संतानें थी। सबसे बड़ी लड़की थी मैनावती, उससे छोटा लड़का भृतहरि और सबसे छोटा वीर विक्रमादित्य। बहन मैनावती की शादी धारानगरी के राजा पदमसैन के साथ कर दी, जिनके एक लड़का हुआ गोपीचन्द। आगे चलकर गोपीचन्द ने श्री ज्वालेन्दर नाथ जी से योग दीक्षा ले ली और तपस्या करने जंगलों में चले गए। फिर मैनावती ने भी, श्री गुरू गोरक्ष नाथ जी से योग दीक्षा ले ली।
आज ये देश और यहाँ की संस्कृति केवल, विक्रमादित्य के कारण अस्तित्व में है।
अशोक मौर्य ने बोद्ध धर्म अपना लिया था। और बोद्ध बनकर 25 साल राज किया था।
भारत में तब सनातन धर्म लगभग समाप्ति पर आ गया था। देश में बौद्ध और अन्य हो गए थे।
रामायण और महाभारत जैसे ग्रन्थ खो गए थे। महाराज विक्रम ने ही, पुनः उनकी खोज करवा कर, स्थापित किया।
विष्णु और शिव जी के मंदिर बनवाये और सनातन धर्म को बचाया। विक्रमादित्य के 9 रत्नों में से एक कालिदास ने अभिज्ञान शाकुन्तलम् लिखा। जिसमें भारत का इतिहास है, अन्यथा भारत का इतिहास क्या है मित्रो ? हम भगवान् कृष्ण और राम को ही, खो चुके थे। हमारे ग्रन्थ ही, भारत में खोने के कगार पर आ गए थे।
उस समय उज्जैन के राजा भृतहरि ने राज छोड़कर, श्री गुरू गोरक्ष नाथ जी से योग की दीक्षा ले ली और तपस्या करने जंगलों में चले गए। राज अपने छोटे भाई विक्रमादित्य को दे दिया। वीर विक्रमादित्य भी श्री गुरू गोरक्ष नाथ जी से गुरू दीक्षा लेकर, राजपाट सम्भालने लगे और आज उन्हीं के कारण सनातन धर्म बचा हुआ है। हमारी संस्कृति बची हुई है।
महाराज विक्रमादित्य ने केवल धर्म ही नहीं बचाया, उन्होंने देश को आर्थिक तौर पर सोने की चिड़िया बनाई। उनके राज को ही भारत का स्वर्णिम राज: कहा जाता है।
विक्रमादित्य के काल में भारत का कपड़ा, विदेशी व्यपारी, सोने के वजन से खरीदते थे।
भारत में इतना सोना आ गया था कि विक्रमादित्य काल में सोने के सिक्के चलते थे। आप गूगल इमेज कर..., विक्रमादित्य के सोने के सिक्के देख सकते हैं।
कैलंडर, जो विक्रम संवत लिखा जाता है, वह भी, विक्रमादित्य का स्थापित किया हुआ है।
आज जो भी ज्योतिष गणना है जैसे, हिन्दी सम्वंत, वार, तिथियां, राशि, नक्षत्र, गोचर, आदि, उन्ही की रचना है। वे बहुत ही पराक्रमी, बलशाली, और बुद्धिमान, राजा थे।
कई बार तो देवता भी, उनसे न्याय करवाने आते थे।
विक्रमादित्य के काल में हर नियम धर्मशास्त्र के हिसाब से बने होते थे। न्याय, राज, सब धर्मशास्त्र के नियमों पर चलता था।
विक्रमादित्य का काल, प्रभु श्रीराम के राज के बाद सर्वश्रेष्ठ माना गया है। जहाँ प्रजा धनी थी और धर्म पर चलने वाली थी।
बड़े दुःख की बात है कि भारत के सबसे महानतम “राजा विक्रमादित्य" के बारे में हमारे स्कूलों/ कालेजों मे कोई स्थान नहीं है।
प्राचीन काल में भारत को सोने की चिड़िया इसलिए कहा जाता था क्योंकि भारत में काफी धन सम्पदा मौजूद थी. 1600 ईस्वी के आस-पास भारत की प्रति व्यक्ति जीडीपी 1305 अमेरिकी डॉलर थी जो कि उस समय अमेरिका, जापान, चीन और ब्रिटेन से भी अधिक थी. भारत की यह संपत्ति ही विदेशी आक्रमणों का कारण भी बनी थी.
इसी समय में अंग्रेजों ने भारत पर कब्ज़ा किया था लेकिन जब अंगेज भारत को छोड़कर गए तो भारत का विश्व अर्थव्यवस्था में योगदान मात्र 2 to 3% रह गया था, लेकिन आज भारत विश्व की पांचवी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है.
मुगलों के शासन शुरू करने से पहले, भारत 1 A.D. और 1000 A.D. के बीच दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था थी. जब मुगलों ने 1526-1793 के बीच भारत पर शासन किया, इस समय भारत की आय (17.5 मिलियन पाउंड), ग्रेट ब्रिटेन की आय से अधिक थी. वर्ष 1600 AD में भारत की प्रति व्यक्ति GDP 1305 डॉलर थी जबकि इसी समय ब्रिटन की प्रति व्यक्ति GDP 1137 डॉलर, अमेरिका की प्रति व्यक्ति GDP 897 डॉलर और चीन की प्रति व्यक्ति GDP 940 डॉलर थी. इतिहास बताता है कि मीर जाफर ने 1757 में ईस्ट इंडिया कंपनी को 3.9 मिलियन पाउंड का भुगतान किया था. यह तथ्य भारत की सम्पन्नता को दर्शाने के लिए बड़ा सबूत है.
1500 A.D के आस-पास दुनिया की आय में भारत की हिस्सेदारी 24.5% थी जो कि पूरे यूरोप की आय के बराबर थी.
सिक्कों को बनाने वाले पहले देशों में शामिल;
600 B.C के आस-पास महाजनपदों ने चांदी के सिक्के के साथ सिक्का प्रणाली शुरू की थी. ग्रीक के साथ-साथ पैसे पर आधारित व्यापार को अपनाने वाले पहले देशों में भारत का स्थान अग्रणी था. लगभग 350 ईसा पूर्व, चाणक्य ने भारत में मौर्य साम्राज्य के लिए आर्थिक संरचना की नींव डाली थी.
मयूर सिंहासन :-
भारत को सोने की चिड़िया कहने के पीछे जो एक सबसे बड़ा कारण हुआ करता था, वो मयूर सिंहासन था. इस सिंहासन की अपनी एक अलग ही पहचान हुआ करती थी. कहा जाता था कि इस सिंहासन को बनाने के लिए जितना धन लगाया गया था, उतने धन में दो ताज महल का निर्माण किया जा सकता था. लेकिन साल 1739 में फ़ारसी शासक नादिर शाह ने एक युद्ध जीतकर इस सिंहासन को हासिल कर लिया था.
मयूर सिंहासन का निर्माण शाहजहां द्वारा 17वीं शताब्दी में शुरू किया गया था. इतिहाकारों के अनुसार, मयूर सिंहासन को बनाने के लिए करीब एक हजार किलो सोने और बेश कीमती पत्थरों का प्रयोग किया गया था. मयूर सिंहासन की कीमत उसमें लगे कोहिनूर हीरे के कारण बहुत बढ़ गयी थी. आज के ज़माने में मयूर सिंहासन की अनुमानित कीमत 450 करोड़ रुपये की होती है. इतना कीमती होने के कारण ही नादिर शाह इसे लूटकर ले गया था.
कोहिनूर हीरा :-
कोहिनूर हीरे का बजन 21.6 ग्राम है और बाजार में इसकी वर्तमान कीमत 1 अरब डॉलर के लगभग आंकी जाती है. यह हीरा गोलकुंडा की खदान से मिला था और दक्षिण भारत के काकतीय राजवंश को इसका प्राथमिक हकदार माना जाता है. आजकल यह ब्रिटेन के महारानी के मुकुट की शोभा बढ़ा रहा है.
महमूद ग़जनी की लूट
महमूद गजनी का सोमनाथ के मंदिर पर हमला करने के पीछे 2 सबसे बड़े उद्येश्य थे, एक इस्लाम का प्रचार करना और दूसरा भारत से धन की लूट करना. महमूद गजनी ने नवम्बर 1001 में पेशावर के युद्ध में जयपाल (964 से 1001 C.E. तक हिंदू शाही राजवंश के शासक थे) को हराया था. गजनी ने इस युद्ध में किले से 4 लाख सोने के सिक्के लूटे और एक सिक्के का वजन 120 ग्राम था. इसके अलावा उसने राजा के लड़कों और राजा जयपाल को छोड़ने के लिए भी 4.5 लाख सोने के सिक्के लिए थे. इस प्रकार उसने आज के समय के हिसाब से लगभग 1 अरब डॉलर की लूट सिर्फ राजा जयपाल के यहाँ की थी. जबकि इस समय भारत में जयपाल जैसे बहुत से धनी राजा थे.
सोमनाथ मंदिर की लूट -:
सन 1025 में महमूद ने गुजरात स्थित सोमनाथ मंदिर लूट लिया और इसकी ज्योतिर्लिंग तोड़ दी थी. इस आक्रमण से उसने 2 मिलियन दिनारों की लूट की जिसकी अनुमानित कीमत आज की तारीख में 45 करोड़ रुपये के लगभग बैठती है. उस समय के हिसाब से यह बहुत बड़ी लूट थी.
मंदिरों में सोने के भंडार :-
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल ने कुछ समय पहले एक आकलन में कहा था कि भारत में अभी भी 22,000 टन सोना लोगों के पास है जिसमें लगभग 3,000-4,000 टन सोना भारत के मंदिरों में अभी भी है. एक अनुमान के मुताबिक भारत के 13 मंदिरों के पास भारत के सभी अरबपतियों से भी ज्यादा धन है. यदि मंदिर के आंकड़ों के हिसाब से देखा जाये तो भारत कल भी सोने के चिड़िया था और आज भी है.
उपर्युक्त आकंडे सिद्ध करते हैं कि प्राचीन भारत में अकूत संपत्ति थी जिसके कारण यहाँ पर विदेशी आक्रमणकारियों के हमले होते रहे थे. लेकिन अगर बीते समय को छोड़कर वर्तमान में देखा जाये तो भारत की स्थिति विकसित देशों की तुलना में निश्चित रूप से ख़राब है. लेकिन इसमें भी कोई शक नहीं है कि भारत पूरे विश्व में बहुत तेजी से अपनी सफलता के झंडे गाड़ रहा है और वह समय बहुत जल्द आएगा जब लोग इस देश को फिर सोने की चिड़िया के नाम से बुलायेंगे.
सांतवीं सदी के बाद से भारत में बाहरी लोगो के आक्रमण शुरू हो गए थे। जिसमें तुर्क, अरबी, इस्लामिक, अफगानी, पुर्तगाली, डच और आखिरी में अंग्रेज शामिल हुए। 1000 वर्षों के मुगलों और अन्य आक्रमणकारी शासकों के शासनकाल के बाद भी विश्व की GDP में भारत की अर्थव्यवस्था का योगदान करीब 25% था (1000 वर्षों से हमारा आशय यह है कि 7वीं सदी के बाद से बाहरियों ने भारत पर आक्रमण किए और लूटे। यह सिलसिला 18वीं सदी के अंत तक चला, इस आधार पर 1000 वर्षों का उल्लेख किया गया है)।
मुगलों के शासन के पहले पहली सदी और 11वीं सदी के बीच भारत दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था थी। मुगलों ने जब 1526 से लेकर 1793 के बीच भारत में शासन किया उस समय भारत की आय 17.5 मिलियन पाउंड थी। भारत की यह आय उस समय के ग्रेट ब्रिटेन की आय से ज्यादा थी।
मयूर सिंहासन :-
भारत को सोने की चिड़िया कहने के पीछे जो एक सबसे बड़ा कारण हुआ करता था, वो मयूर सिंहासन था. इस सिंहासन की अपनी एक अलग ही पहचान हुआ करती थी. कहा जाता था कि इस सिंहासन को बनाने के लिए जितना धन लगाया गया था, उतने धन में दो ताज महल का निर्माण किया जा सकता था. लेकिन साल 1739 में फ़ारसी शासक नादिर शाह ने एक युद्ध जीतकर इस सिंहासन को हासिल कर लिया था.
मयूर सिंहासन का निर्माण शाहजहां द्वारा 17वीं शताब्दी में शुरू किया गया था. इतिहाकारों के अनुसार, मयूर सिंहासन को बनाने के लिए करीब एक हजार किलो सोने और बेश कीमती पत्थरों का प्रयोग किया गया था. मयूर सिंहासन की कीमत उसमें लगे कोहिनूर हीरे के कारण बहुत बढ़ गयी थी. आज के ज़माने में मयूर सिंहासन की अनुमानित कीमत 450 करोड़ रुपये की होती है. इतना कीमती होने के कारण ही नादिर शाह इसे लूटकर ले गया था.
कोहिनूर हीरा :-
कोहिनूर हीरे का बजन 21.6 ग्राम है और बाजार में इसकी वर्तमान कीमत 1 अरब डॉलर के लगभग आंकी जाती है. यह हीरा गोलकुंडा की खदान से मिला था और दक्षिण भारत के काकतीय राजवंश को इसका प्राथमिक हकदार माना जाता है. आजकल यह ब्रिटेन के महारानी के मुकुट की शोभा बढ़ा रहा है.
महमूद ग़जनी की लूट
महमूद गजनी का सोमनाथ के मंदिर पर हमला करने के पीछे 2 सबसे बड़े उद्येश्य थे, एक इस्लाम का प्रचार करना और दूसरा भारत से धन की लूट करना. महमूद गजनी ने नवम्बर 1001 में पेशावर के युद्ध में जयपाल (964 से 1001 C.E. तक हिंदू शाही राजवंश के शासक थे) को हराया था. गजनी ने इस युद्ध में किले से 4 लाख सोने के सिक्के लूटे और एक सिक्के का वजन 120 ग्राम था. इसके अलावा उसने राजा के लड़कों और राजा जयपाल को छोड़ने के लिए भी 4.5 लाख सोने के सिक्के लिए थे. इस प्रकार उसने आज के समय के हिसाब से लगभग 1 अरब डॉलर की लूट सिर्फ राजा जयपाल के यहाँ की थी. जबकि इस समय भारत में जयपाल जैसे बहुत से धनी राजा थे.
सोमनाथ मंदिर की लूट -:
सन 1025 में महमूद ने गुजरात स्थित सोमनाथ मंदिर लूट लिया और इसकी ज्योतिर्लिंग तोड़ दी थी. इस आक्रमण से उसने 2 मिलियन दिनारों की लूट की जिसकी अनुमानित कीमत आज की तारीख में 45 करोड़ रुपये के लगभग बैठती है. उस समय के हिसाब से यह बहुत बड़ी लूट थी.
मंदिरों में सोने के भंडार :-
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल ने कुछ समय पहले एक आकलन में कहा था कि भारत में अभी भी 22,000 टन सोना लोगों के पास है जिसमें लगभग 3,000-4,000 टन सोना भारत के मंदिरों में अभी भी है. एक अनुमान के मुताबिक भारत के 13 मंदिरों के पास भारत के सभी अरबपतियों से भी ज्यादा धन है. यदि मंदिर के आंकड़ों के हिसाब से देखा जाये तो भारत कल भी सोने के चिड़िया था और आज भी है.
उपर्युक्त आकंडे सिद्ध करते हैं कि प्राचीन भारत में अकूत संपत्ति थी जिसके कारण यहाँ पर विदेशी आक्रमणकारियों के हमले होते रहे थे. लेकिन अगर बीते समय को छोड़कर वर्तमान में देखा जाये तो भारत की स्थिति विकसित देशों की तुलना में निश्चित रूप से ख़राब है. लेकिन इसमें भी कोई शक नहीं है कि भारत पूरे विश्व में बहुत तेजी से अपनी सफलता के झंडे गाड़ रहा है और वह समय बहुत जल्द आएगा जब लोग इस देश को फिर सोने की चिड़िया के नाम से बुलायेंगे.
सांतवीं सदी के बाद से भारत में बाहरी लोगो के आक्रमण शुरू हो गए थे। जिसमें तुर्क, अरबी, इस्लामिक, अफगानी, पुर्तगाली, डच और आखिरी में अंग्रेज शामिल हुए। 1000 वर्षों के मुगलों और अन्य आक्रमणकारी शासकों के शासनकाल के बाद भी विश्व की GDP में भारत की अर्थव्यवस्था का योगदान करीब 25% था (1000 वर्षों से हमारा आशय यह है कि 7वीं सदी के बाद से बाहरियों ने भारत पर आक्रमण किए और लूटे। यह सिलसिला 18वीं सदी के अंत तक चला, इस आधार पर 1000 वर्षों का उल्लेख किया गया है)।
मुगलों के शासन के पहले पहली सदी और 11वीं सदी के बीच भारत दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था थी। मुगलों ने जब 1526 से लेकर 1793 के बीच भारत में शासन किया उस समय भारत की आय 17.5 मिलियन पाउंड थी। भारत की यह आय उस समय के ग्रेट ब्रिटेन की आय से ज्यादा थी।
सन 1600 में भारत की तुलना में अन्य देशों की आय (Income of other countries in comparison to India in 1600)।
भारत की प्रति व्यक्ति आय 1305 डॉलर थी।
ब्रिटेन की प्रति व्यक्ति आय 1137 डॉलर थी।
चीन की प्रति व्यक्ति आय 940 डॉलर थी।
अमेरिका की प्रति व्यक्ति आय 897 डॉलर थी।
ये आंकड़े देखकर आप अंदाजा लगा सकते है कि उस समय हम कितना समृद्ध थे। इतिहास बताता है कि मीर जाफर ने 1757 में ईस्ट इंडिया कंपनी को 3.9 मिलियन पाउंड का भुगतान किया था। यह सनातन सत्य भारत की सम्पन्नता को दर्शाने के लिए एक बड़ा सबूत है। उस समय की भारत की अर्थव्यवस्था की बात करे तो सन 1500 के आसपास दुनिया की आय में भारत की हिस्सेदारी 24.5% थी जो कि पूरे यूरोप के आय के बराबर थी और इसके बाद अंग्रेजों ने भारत पर कब्ज़ा किया।
अंग्रेजों ने भारत की इस अर्थव्यवस्था को तहस-नहस कर दिया, क्योंकि जब अंग्रेज भारत को छोड़कर गए तब भारत का विश्व अर्थव्यवस्था में योगदान केवल 2-3% रह गया था। इस हद तक अंग्रेजों ने भारत को लूट लिया था कि आंकड़ा 25% से 2-3% में आ गया था।
देश को अकबर, बाबर, औरंगजेब, जैसै का इतिहास पढ़ाया जा रहा है।
जय हिन्द, जय भारत 🙏🇮🇳
भारत की प्रति व्यक्ति आय 1305 डॉलर थी।
ब्रिटेन की प्रति व्यक्ति आय 1137 डॉलर थी।
चीन की प्रति व्यक्ति आय 940 डॉलर थी।
अमेरिका की प्रति व्यक्ति आय 897 डॉलर थी।
ये आंकड़े देखकर आप अंदाजा लगा सकते है कि उस समय हम कितना समृद्ध थे। इतिहास बताता है कि मीर जाफर ने 1757 में ईस्ट इंडिया कंपनी को 3.9 मिलियन पाउंड का भुगतान किया था। यह सनातन सत्य भारत की सम्पन्नता को दर्शाने के लिए एक बड़ा सबूत है। उस समय की भारत की अर्थव्यवस्था की बात करे तो सन 1500 के आसपास दुनिया की आय में भारत की हिस्सेदारी 24.5% थी जो कि पूरे यूरोप के आय के बराबर थी और इसके बाद अंग्रेजों ने भारत पर कब्ज़ा किया।
अंग्रेजों ने भारत की इस अर्थव्यवस्था को तहस-नहस कर दिया, क्योंकि जब अंग्रेज भारत को छोड़कर गए तब भारत का विश्व अर्थव्यवस्था में योगदान केवल 2-3% रह गया था। इस हद तक अंग्रेजों ने भारत को लूट लिया था कि आंकड़ा 25% से 2-3% में आ गया था।
देश को अकबर, बाबर, औरंगजेब, जैसै का इतिहास पढ़ाया जा रहा है।
जय हिन्द, जय भारत 🙏🇮🇳
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