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6 تغريدة 12 قراءة May 21, 2023
सनातन धर्म में वृक्ष की महत्ता:
हमारे वैदिक साहित्य पर्यावरण वृक्षों के महत्व को जानते थे अतः उसके रक्षण हेतु नक्षत्रों को वृक्षों से सम्बन्धित दर्शाया गया है। वास्तुशास्त्र के अनुसार प्रत्येक नक्षत्र का एक सम्बन्धित वृक्ष होता है।आपके जन्म नक्षत्र से जिस वृक्ष का नक्षत्र मिलता+
है वही आपका लाभकारी वृक्ष होता है एवम् व्यक्ति को अपने जीवन में उस वृक्ष को अवश्य लगाना चाहिए।
वृहद्वास्तु माला में कहा गया है कि जो व्यक्ति १ पीपल, १ बरगद,१० ईमली, ३ कैथ, ३ बेल, ३ आँवला एवम् ५ आम के वृक्ष लगाता है वह नर्क के दर्शन नही करता।
प्रस्तुत चित्र में तीन घेरे बने हुए हैं। सबसे बाहरी घेरे में 27 नक्षत्रों के नाम हैं और उनके पौधों के नाम साथ में लिखे हुए हैं। मध्य घेरे में 12 राशियों व उनके पौधों के नाम भी लिखे हुए हैं।भीतरी घेरे में नौ ग्रहों के नाम लिखे हैं व उनसे संबंधित पेड़ पौधों के नाम भी लिखे हुए हैं।
जहाँ पर पेड़ पौधे जड़ी बूटी और वृक्ष के नाम लिखे हुए हैं तो उनमें उन नक्षत्रों का या उन राशियों का या उन ग्रहों का वास होता है। यदि हम उनपर पौधों जड़ी बूटियों या वृक्षों की पूजा करते हैं वे जड़ी बूटियाँ,पेड़ पौधे, वृक्ष हमे लाभ प्रदान करते हैं।
हमारे ऋषि मुनि महान वैज्ञानिक व दूरदृष्टा थे। प्रकृति को सहेजने व पर्यावरण को सन्तुलित बनाए रखने के लिए उन्होंने इन्हें मानव जीवन से ज्योतिष द्वारा जोड़ दिया। प्रत्येक वृक्ष के वैज्ञानिक प्रभाव जीवन पर देखे गए हैं और ऋषियों को इसका सम्यक् ज्ञान था। अतः उन्होंने इसके निर्देश दिए।
सनातन धर्म-हृदय कितना विशाल है।प्रकृति के प्रत्येक अंश का महत्व व उसे पोषित करने का सिद्धांत हमारे ग्रंथों में सुरक्षित है।चाहे हम ज्योतिष/वास्तुशास्त्र को न भी मानते हों, पर वृक्षों का महत्व सर्वविदित है।पर्यावरण को जीवित व सन्तुलित रखने में हमे भी योगदान देना चाहिए।
धन्यवाद🙏

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