7 تغريدة 117 قراءة May 12, 2023
निज पद नयन दिएँ मन राम पद कमल लीन।
परम दुखी भा पवनसुत देखि जानकी दीन॥
जो अड़तालीस चिन्ह भगवान श्री रामचन्द्र जी के दोनों चरणों मे है, अशोक वाटिका में माता जानकी जी अपने स्वयं के चरणों मे भी वही चिन्ह देखकर प्रभु का निरंतर स्मरण करती रहती थी। (Thread)
भूषित अड़तालीस वर चिन्ह युगल पद ध्यान।
गीधराज अन्तिम समय किये जिन्हहि जलयान॥
सोई दृढ़ विश्वास हिय धरेउ 'दास जयराम'।
कबहुँ कृपा करि ढरेंगे दरनि आपनी राम ॥
पुरुष १, माल २, छत्रशुभ ३, सिंहासन ४ यमदण्ड ५।
चँवर ६, चक्र ७, अंकुश, मुकुट, सुरतरु १० केतु ११ प्रचण्ड॥
स्वस्तिचिह्न १२, अठकोण १३, श्री १४, शर १५, हल १६, मूसल १७, शेष १८।
पटुक १९, पदुम २०, रथ २१, वज्र २२, जौ २३, ऊर्ध २४, दाहिने रेष ॥
हंस २५, चन्द्रिका २६, त्रोण २७, धनु २८, वंशी २९, वीण ३०, निशेष ३१।
मीन ३२, त्रिवलि ३३, पीयूषहद ३४, गोखुर ३५, महि ३६, कलशेश ३७॥
ध्वजा ३८, जम्बूफल ३९, शशिकला ४०, दर ४१, षटकोण ४२ त्रिकोण ४३।
गदा ४४, जीव ४५, सरयूसरित ४६, ऊर्ध ४७ विन्दु ४८, सुठि लोन॥
पदाम्बुज रामजीमें रेख अड़तालिस बिराजे हैं।
पुरुष माला छत्र यमदण्ड सिंहासन चँवर वो चक्र।
मुकुट, अंकुश, पताका, कल्पतरु, वो स्वस्ति साजे हैं॥
अष्टभुज, वो स्वयं श्री, बाण, हल, मूसल, सर्प, अम्बर।
पदुम, रथ, वज्र, जव, वो ऊर्ध, दाँये पदमें भ्राजे हैं॥
चन्द्रिका, हंस, भाथा, धनुष, वंशी, वीण, पूरणचंद्र।
मीन, त्रिबली, सुधाके कुण्ड, गोखुर, भूमि, राजे हैं॥
कलश, ध्वज, जम्बुफल, अर्धेन्दु, दर, षटकोण, तिरकोना।
गदा,जिव,बिन्दु,श्रीसरयू, ऊर्ध बाँयेमे छाजे है॥
दास निसि-बासर इन चिह्नो के शरणागत।
प्रणतपालकबिरद जिनके सकल श्रुतियो मे गाजे है॥

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