अनिद्रा (नींद न आना)
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आजकल की भागदौड़ भरी जीवनशैली तथा मानसिक तनाव देने वाली परिस्थितियों ने अधिकतर स्त्री-पुरुषों की नींद उड़ा दी है। नींद की गोली या अन्य कोई औषधि का सेवन किये बिना ऐसे लोगों को नींद नहीं आती।
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आजकल की भागदौड़ भरी जीवनशैली तथा मानसिक तनाव देने वाली परिस्थितियों ने अधिकतर स्त्री-पुरुषों की नींद उड़ा दी है। नींद की गोली या अन्य कोई औषधि का सेवन किये बिना ऐसे लोगों को नींद नहीं आती।
कुछ व्यक्ति अनिद्रा से दुःखी होकर ग़म गलत करने के लिए शराब या भांग का सेवन करने लगते हैं।
आयुर्वेद के अनुसार नींद न आने से कई मनोविकार पैदा होते हैं बल्कि नींद न आना मानसिक रोग होने का पहला लक्षण होता है। नींद तभी आती है जब शरीर की सब इन्द्रियां तथा मन शान्त स्थिति में हों ।
आयुर्वेद के अनुसार नींद न आने से कई मनोविकार पैदा होते हैं बल्कि नींद न आना मानसिक रोग होने का पहला लक्षण होता है। नींद तभी आती है जब शरीर की सब इन्द्रियां तथा मन शान्त स्थिति में हों ।
निद्रा सिर्फ़ मस्तिष्क के लिए ही नहीं बल्कि पूरे शरीर के लिए एक टॉनिक का काम करती है इसलिए मानसिक एवं शारीरिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए पर्याप्त मात्रा में ना प्रत्येक मनुष्य के लिए आवश्यक होता है।
किसान या मज़दूर अपेक्षाकृत ज्यादातर - शान्त गहरी नींद सोता है क्योंकि वह तनाव रहित परिश्रमी जीवन व्यतीत करता है वस्तुतः प्रज्ञा अपराध, असंयम और इन्द्रिय लोलुपता के कारण मनुष्य का मस्तिष्क अशान्त बना रहता है परिणाम स्वरूप वह अनिद्रा का शिकार हो जाता है।
'निद्रायत्तं सुखं दुःखं पुष्टिः कार्य बलाबलम् ।
वृषता क्लीबता ज्ञानमज्ञानं जीवितं न च ॥'
अर्थात् निद्रा के सम्यक् योग से शरीर में आरोग्य, पौष्टिकता, बल की वृद्धि, पौरुष शक्ति, समुचित ज्ञान और पूर्णायु की प्राप्ति होती है,
वृषता क्लीबता ज्ञानमज्ञानं जीवितं न च ॥'
अर्थात् निद्रा के सम्यक् योग से शरीर में आरोग्य, पौष्टिकता, बल की वृद्धि, पौरुष शक्ति, समुचित ज्ञान और पूर्णायु की प्राप्ति होती है,
मस्तिष्क और वातवाहिनी नाड़ियों को विश्राम और शक्ति प्रदान करने के अलावा, शरीर की मांस पेशियों की जो शक्ति दिन भर कार्य करते हुए क्षीण हो जाती है उसे एकत्रित करने का काम गहरी नींद ही करती है। दिन में सोने की अपेक्षा रात में सोने पर नींद अपेक्षा कृत अधिक रचनात्मक कार्य करती है।
➪ अनिद्रा (नींद न आना) के दुषप्रभाव :
• नींद पूरी न होने पर रक्तदाब बढ़ सकता है।
• माइग्रेन यानी सिरदर्द हो सकता है, अगर माइग्रेन पहले से है तो उसके बढ़ने की आशंका रहती है।
• नींद पूरी न होने से पाचन तंत्र संबंधी समस्याएँ जैसे कब्ज, बदहजमी, एसिडिटी आदि हो सकती हैं।
• नींद पूरी न होने पर रक्तदाब बढ़ सकता है।
• माइग्रेन यानी सिरदर्द हो सकता है, अगर माइग्रेन पहले से है तो उसके बढ़ने की आशंका रहती है।
• नींद पूरी न होने से पाचन तंत्र संबंधी समस्याएँ जैसे कब्ज, बदहजमी, एसिडिटी आदि हो सकती हैं।
• अनिद्रा से पीड़ित लोग इरिटेबल बाउल सिंड्रोम के शिकार हो सकते हैं, जिसमें सुबह उठने पर बार-बार दस्त होना, पेट दर्द, पेचिश आदि के लक्षण दिखाई देते हैं।
• अस्थमा की समस्या बढ़ सकती है। अस्थमा अटैक की आशंका बढ़ जाती है।
• NIDM, स्ट्रोक, हार्ट
अटैक की आशंका बढ़ा देती है।
• अस्थमा की समस्या बढ़ सकती है। अस्थमा अटैक की आशंका बढ़ जाती है।
• NIDM, स्ट्रोक, हार्ट
अटैक की आशंका बढ़ा देती है।
• हार्मोन असंतुलन हो सकता है, जिससे डायबिटीज की समस्या बढ़ सकती है या नई शुरुआत हो सकती है।
• प्रजनन तंत्र पर भी प्रभाव पड़ता है। पुरुषों में शुक्राणुओं की संख्या कम हो जाती है और महिलाओं में मासिक चक्र गड़बड़ा जाता है।
• प्रजनन तंत्र पर भी प्रभाव पड़ता है। पुरुषों में शुक्राणुओं की संख्या कम हो जाती है और महिलाओं में मासिक चक्र गड़बड़ा जाता है।
• नींद की कमी से मस्तिष्क और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र पर कई प्रतिकूल प्रभाव पड़ते हैं। यहाँ तक कि केवल एक रात ही औसत से कम नींद लेने से ध्यान केंद्रन, उत्पादकता, समन्वय और निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित होती है, इसके कारण भावनात्मक स्थिरता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
• यदि निद्रा का सर्वथा अयोग हो जाए तो शरीर में अनेक तरह के रोग, कृशता, निर्बलता, नपुंसकता एवं विषयों का सम्यक् ज्ञान न होना आदि लक्षण पैदा होते हैं और जीवन का नाश हो जाता है।
➪ अनिद्रा (नींद न आना) के कारण :
• अनिद्रा रोग के कुछ कारण होते हैं जिनमें शरीर या सिर में दर्द होना ।
• वमन, भय, चिन्ता, क्रोध का होना ।
• आंखों में जलन का होना ।
• अधिक परिश्रम करना ।
• खून की कमी का होना ।
• उपवास करना
• दुःखदायी शय्या |
• श्वास रोग होना ।
• अनिद्रा रोग के कुछ कारण होते हैं जिनमें शरीर या सिर में दर्द होना ।
• वमन, भय, चिन्ता, क्रोध का होना ।
• आंखों में जलन का होना ।
• अधिक परिश्रम करना ।
• खून की कमी का होना ।
• उपवास करना
• दुःखदायी शय्या |
• श्वास रोग होना ।
• दिल दिमाग़ पर किसी दुःखद दुर्घटना का प्रभाव होना ।
• वृद्धावस्था, स्नायविक संस्थान की दुर्बलता ।
• हृदय विकार का होना ।
• उच्च रक्तचाप आदि कारण उल्लेखनीय है।
• खांसी, अतिसार और बहुमूत्र रोग होना भी अनिद्रा का कारण होता है क्योंकि रोगी की नींद बार-बार टूटती है।
• वृद्धावस्था, स्नायविक संस्थान की दुर्बलता ।
• हृदय विकार का होना ।
• उच्च रक्तचाप आदि कारण उल्लेखनीय है।
• खांसी, अतिसार और बहुमूत्र रोग होना भी अनिद्रा का कारण होता है क्योंकि रोगी की नींद बार-बार टूटती है।
• जी मिचलाना यानी उलटी जैसा जी करना या हिचकी चलना भी अनिद्रा का कारण होता है।
• किसी भी कारण से भूखे रहना यानी पेट का खाली होना अनिद्रा की स्थिति निर्मित करता है।
• किसी भी कारण से भूखे रहना यानी पेट का खाली होना अनिद्रा की स्थिति निर्मित करता है।
➪ Home Remedies :
1. सिर में भारीपन या दर्द हो तो बादाम तैल या शृंगराज तैल सिर के बालों की जड़ों में लगा कर हलके हलके मालिश करना चाहिए।
2. अगर उच्च रक्तचाप की शिकायत रहती हो तो उसे सामान्य रखने का उपाय और इलाज
करना चाहिए।
1. सिर में भारीपन या दर्द हो तो बादाम तैल या शृंगराज तैल सिर के बालों की जड़ों में लगा कर हलके हलके मालिश करना चाहिए।
2. अगर उच्च रक्तचाप की शिकायत रहती हो तो उसे सामान्य रखने का उपाय और इलाज
करना चाहिए।
3. वात शमन करने वाला आहार-विहार करने से वात कुपित नहीं होता जिससे गहरी नींद आती है।
4. सोते समय, भोजन करने के दो ढाई घण्टे बाद एक गिलास कुनकुना गरम मीठा दूध घूँट-घूँट करके पीना चाहिए।
5. सुबह के भोजन के साथ ताज़ा दही गुड़ या शक्कर मिला कर सेवन करना चाहिए।
4. सोते समय, भोजन करने के दो ढाई घण्टे बाद एक गिलास कुनकुना गरम मीठा दूध घूँट-घूँट करके पीना चाहिए।
5. सुबह के भोजन के साथ ताज़ा दही गुड़ या शक्कर मिला कर सेवन करना चाहिए।
➪ अनिद्रा की आयुर्वेदिक चिकित्सा :
1. शंखपुष्पी वटी व सर्पोनिल टेब 2-2 गोली सुबह शाम दूध के साथ लें।
2. भोजन के बाद दोनों वक्त, सारस्वतारिष्ट व अश्वगन्धारिष्ट 4-4 चम्मच आधा कप पानी में डाल कर पिएं। लाभ न होने तक सेवन करते रहें।
1. शंखपुष्पी वटी व सर्पोनिल टेब 2-2 गोली सुबह शाम दूध के साथ लें।
2. भोजन के बाद दोनों वक्त, सारस्वतारिष्ट व अश्वगन्धारिष्ट 4-4 चम्मच आधा कप पानी में डाल कर पिएं। लाभ न होने तक सेवन करते रहें।
➪ अच्छी नींद के लिए क्या करें :
• मानसिक शांति के लिए ध्यान करें। वैज्ञानिकों ने भी साबित किया है कि ध्यान अनिद्रा में बहुत उपयोगी है।
• कैफीन का सेवन न करें; विशेषरूप से दोपहर के बाद या शाम को ।
• धूम्रपान न करें, निकोटिन भी नींद में बाधा डालता है और उत्तेजना बढ़ाता है।
• मानसिक शांति के लिए ध्यान करें। वैज्ञानिकों ने भी साबित किया है कि ध्यान अनिद्रा में बहुत उपयोगी है।
• कैफीन का सेवन न करें; विशेषरूप से दोपहर के बाद या शाम को ।
• धूम्रपान न करें, निकोटिन भी नींद में बाधा डालता है और उत्तेजना बढ़ाता है।
• अल्कोहल का कम सेवन; शुरुआत में तो शराब के सेवन से तुरंत और गहरी नींद आ जाती है, लेकिन नियमित रूप से अधिक मात्रा में शराब के सेवन से नींद का पैटर्न गड़बड़ा जाता है।
• सोने के २-३ घंटा पहले भारी खाना न खाएँ।
• रात के खाने के बाद अधिक मात्रा में तरल पदार्थों के सेवन से बचें।
• सोने के २-३ घंटा पहले भारी खाना न खाएँ।
• रात के खाने के बाद अधिक मात्रा में तरल पदार्थों के सेवन से बचें।
• सोने- उठने का एक नियमित समय बना लें। एक बार जब आप इसका कड़ाई से पालन करने लगेंगे, आपको बेहतर नींद आएगी।
• दोपहर में सोने से बचें। अगर जरूरी हो तो तीन बजे के पहले सोएँ ।
• दोपहर में सोने से बचें। अगर जरूरी हो तो तीन बजे के पहले सोएँ ।
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