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@AyurvedaTalks

15 تغريدة 27 قراءة Apr 20, 2023
लीवर सिरोसिस
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आहार में तेज़ गति से बदलावों का असर यकृत पर सबसे ज़्यादा तथा सबसे पहले पड़ता है। यकृत शरीर का ऐसा पावर हाउस है, जो भोजन से ऊर्जा प्राप्त कर शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है। जिस प्रकार का भोजन होगा यकृत इसी तरह ऊर्जा बनाकर शरीर को देता है।
भोजन के ग्रहण करने की प्रकृति पर ही यकृत का व्यवहार व स्वभाव निर्भर करता है। जैसा आहार होगा वैसा ही यकृत होगा।
आहार में उपस्थित कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन्स तथा वसा के पाचन के लिए प्रथम रूप से यकृत ही जिम्मेदार है।
यकृत जब पाचन क्रिया में संलग्न रहता है तो कई महत्वपूर्ण विटामिनों व एन्ज़ाइमों का निर्माण कर एंटीबॉडीज डेवलप करता है। जिसके परिणामस्वरूप आगे के अंग सही तरीके से व सुचारू रूप से कार्य करते हैं।
यकृत मे पुनरूद्ध भवन की क्षमता होने के कारण यह संकटकालीन परिस्थितियों में यकृत स्वयं नई कोशिकाओं का निर्माण कर अपनी मरम्मत करने की क्षमता रखता है। यकृत की वृद्धि या इसमें सूजन आने का अर्थ है कि यकृत पर इतना दवाब डाला गया है कि इसकी कोशिकाएँ अत्यधिक संख्या में नष्ट हो गई हैं।
लीवर सिरोसिस क्या है ?
लीवर सिरोसिस रोग में लीवर कोशिकाएं बड़ी मात्रा में नष्ट हो जाती हैं और उनके स्थान पर फाइबर तंतुओं का निर्माण हो जाता है। यकृत (लीवर) की संरचना भी असामान्य हो जाती है, जिससे पोर्टल हाइपरटेंशन की स्थिति बन जाती है।
लीवर सिरोसिस होने के कारण :
• एंटीबायटिक दवाओं का अधिक प्रयोग ।
• आहार में प्रोटीन्स की अधिकता या कमी ।
• भोजन में ज़्यादा नमक, मिर्च व चटपटा |
• लगातार लंबे समय तक खून की कमी।
• अधिक मात्रा में सिगरेट व एल्कोहल का प्रयोग |
• जीवनशैली में व्यायाम की कमी।
लीवर सिरोसिस होने के लक्षण :
प्रकृति ने लीवर (यकृत) को एक केप्सूल में बंद करके इसके ऊपर पेरिटोनियम की परत चढाई है जो कि इसका सुरक्षा कवच है। लीवर में सर्वाधिक ऑक्सीजन का अनुपात होने के कारण यह शरीर के कुल खून का 1/5 हिस्सा शुद्धिकरण करता है।
माइटोकांड्रिया इस सारी प्रक्रिया पर नियंत्रण रख अमीनो अम्ल के वर्गीकरण के लिए ज़िम्मेदार होते हैं। आज की जीवनशैली में लीवर से संबधित रोग तेज़ी से बढ़ रहे हैं।
लीवर सिरोसिस रोग के होने पर शरीर में लक्षण प्रकट होते हैं -
• आंखों व त्वचा का रंग पीलापन युक्त होना ।
• यकृत वृद्धि के प्रभाव बाहरी त्वचा पर शीतपित, ददोरे के रूप में भी दिखाई देते हैं।
• मल के रंग में बदलाव।
• कैंज, अफरा व पेट पर हल्की सी सूजन का आभास।
• हल्का-हल्का सा बुखार हमेशा बने रहना व
शरीर के जोड़ों में दर्द |
• कभी-कभी एसिडिटी ओर खासकर सायं के समय मुँह में खारापन आ जाना।
• नाभि के ऊपर दाईं पसलियों के नीचे बराबर हल्का सा दर्द व व सूजन का दिखाई देना ।
• भोजन के प्रति अच्छी व भूख का खुलकर नहीं लगना।
• मूत्र भूरा या गुलाबी रंग का होना ।
• सिर में हल्का हमेशा भारीपन बने रहना ।
लीवर सिरोसिस का इलाज :
लीवर सिरोसिस का उपचार सर्वप्रथम जीवनशैली में सुधार से करना होगा। प्रतिदिन की जीवनशैली का अच्छे से अध्ययन कर कुछ चीज़ों का त्याग करें व कुछ चीजें भोजन मे जोड़ें।
1. एल्कोहल, ज़्यादा तला भुना, सिगरेट, दर्द व एंटीबायटिक दवाएं बंद करें।
2. भोजन में उच्च गुणवत्ता का प्रोटीन व कार्बोहाइड्रेट युक्त आहार को जोड़ें जैसे- नींबू, संतरा, आम, पपीता, चीकू, आलूबुखारा, लीची, गन्ने का रस, शहद, मुन्नका, किशमिश, चना, दूध इत्यादि ।
यकृत का गर्म ठंढा सेक -
• यकृत (लीवर) पर प्रतिदिन सुबह शाम 3 मिनट गर्म व 1 मिनट ठंढा सेक लेकर 20 मिनट की गर्म सूखी पट्टी लपेट लें। इस दौरान पेट की सफाई होना अनिवार्य है। अत: रात्रि में त्रिफला चूर्ण का नियमित सेवन करें ।
• आहार तालिका में उपवास का स्थान रखते हुए प्रोटीन व कार्बोहाइड्रेट का स्थान बनाए रखें।
• योगासनों में पवन मुक्तासन, उत्तानपादासन, नौकासन करें।

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