Manoj Singh™
Manoj Singh™

@ManojSDabas

5 تغريدة Apr 28, 2023
🚩 देवी अहल्या की कथा और उसके सत्य के रूप!
देवी अहल्या महर्षि गौतम की पत्नी थीं।इनके पिता का नाम वृद्धाश्व था। अहल्या अत्यंत रूपवती थी। देवराज इंद्र ने गौतम का रूप धार का इनका धर्म नष्ट करना चाहा।
गौतम के शाप से इंद्रा नपुंसक हो गए थे, परंतु देवताओं ने बड़े परिश्रम से मेष का…
“वातभक्षा निराहारा, तपंती भस्मशायिनी। अदृश्या सर्वभूतानामाश्रमेऽस्मिन् वसिष्यसि।।” (रामायण)
पुनः अहल्या के प्रार्थना करने पर गौतम प्रसन्न होकर बोले, “हमारा शाप व्यर्थ नहीं हो सकता, किन्तु विष्णुरूपी रामचंद्र जब इस आश्रम में आवेंगे, तब तुम उनके चरण वंदन कर, मुक्त हो सकोगी।”…
▪️अहल्या की कथा का पहला रूप या पक्ष :
जैसा की रामायण के श्लोकों से भी स्पस्ट है, अहल्या जड़ (पत्थर) नहीं हुयी थीं, वह केवल वायु के आधार पर रहने लगी थीं (पत्थर या खनिज की भाँति)। उनका शरीर भस्म से परिपूर्ण था और वह सदा पश्चाताप करती रहती थीं, तपस्विनी हो गयी थीं अर्थात संसार से…
अपने महान दार्शनिक ऋषि पति से ऐसे वचन सुनकर अहल्या जड़वत हो गयी, जबकि वह ऐसा कोई आचरण कर भी नहीं रहीं थीं।
अतः उन्हें अपने ऋषि पति के शब्दों (कठोर वचन) से इतना आघात पहुँचा कि वह फिर शिला समान हो गयीं। कुछ खाती पीती नहीं थीं। अंतःपुर में ही वास करती थीं इसलिए प्राणियों के लिए…
शथपथ ब्राह्मण में वर्णित है----
"इन्द्रागच्छेति।...गौरावस्कन्दिन्नहल्यायैजारेति। तद्यान्येवास्यचरणानि तैरेवैनमेतत्प्रमोदयिषति॥
---(शत०३/अ०३/ब्रा०४/मंत्र१८)
"रात्रिरादित्यस्यादित्योदयेsन्तर्धीयते।।"
---- (निरूक्त अ०२/६)
"जार आ भगम्। जार इव भगम्।…

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