मातृ भूमि 🚩
मातृ भूमि 🚩

@Matru_Bhoomi

11 تغريدة 4 قراءة Apr 16, 2023
इसका मुख्य कारण सिर्फ RELIGIOUS HATRED नहीं था। इसका मुख्य कारण विज्ञान, चिकित्सा,गणित और अन्य विषयों पर कई प्राचीन संस्कृत और मलयालम वैदिक ग्रंथों को चोरी करना था, जैसा कि वे कर सकते थे। बाद में उन्होंने चोरी की गई सभी जानकारी का इस्तेमाल किया और इसे अपने नाम पर Patent करा लिया।
इस दौरान जबरदस्ती लोगों का धर्म परिवर्तन कराकर उन्हें गौ मांस और सस्ती शराब (फेनी) का सेवन कराया गया। बहुत ही शातिर तरीके से उन्हें आलसी बनाया गया ताकि वे काम करना ही भूल जाए।
एक दस्तावेज भी जारी किया जिसके तहत कोई भी गोवा में मंदिर का निर्माण नहीं कर सकता था। और पहले से ही निर्मित अन्य सभी मंदिरों को नष्ट कर दिया जाएगा। इस आदेश के तहत लगभग 300 से ज्यादा मंदिरों को नष्ट कर दिया गया।
15 साल से अधिक उम्र के सभी लोगों को बाइबल की शिक्षाओं को सुनने के लिए मजबूर किया गया था। और अगर वे ऐसा नहीं करते तो उन्हें दंडित किया जाता। विद्रोह करने वाले हिंदुओं के साथ बेहद क्रूर तरीके से व्यवहार किया गया। उनकी जीभ काट दी जाती।
उन्हें नुकीली कीलों से या गर्म लोहे के सरिये से अंधा कर दिया गया। उनकी चमड़ी छीलकर, उनकी पेट की आंत निकालकर उन्हें दर्दनाक और धीमी मौत के लिए छोड़ दिया जाता। इस यातना के प्रकार और क्रूरता की कोई सीमा नहीं थी।
कोई भी इतिहासकार या लेखक (Filippo Sassetti, Charles Delone, Claudius Buchanan etc) जिन्होंने इसके बारे में लिखा था। उन्हें या तो जेल में डाल दिया गया या मार दिया गया।
आज फ्रांसिस ज़ेवियर ईसाइयों के लिए बहुत बड़ा नाम है। उन्हें 'संत' की पदवी दी गई है। कई स्कूलों/कॉलेज और चर्चों का नाम उसके नाम पर रखा गया है। पोप ने उनकी मृत-शरीर को बहुत सौभाग्य कारक माना। क्योंकि ज़ेवियर ने ईसा मसीह से भी ज्यादा लोगों को इसाई बनाया था।
आज भी गोवा बहुत सारी पश्चिमी परंपरा का पालन करता है। उदाहरण के लिए पुर्तगालियों ने शास्त्रीय संगीत पर प्रतिबंध लगा दिया था। पर अब भी गोवा के लोग पश्चिमी संगीत ही सुनते हैं शास्त्रीय संगीत नहीं।
यह है ईसाई धर्मांतरण में क्रूरता की सच्चाई। ज़ेवियर की तरह आज भी कई दुर्जन लोग संत का चोला पहनकर घूम रहे हैं। राजनीतिक समर्थन ना होने पर यह लोग बहला-फुसलाकर धर्म परिवर्तन कराते हैं।
राजनीतिक समर्थन ना होने पर यह लोग बहला-फुसलाकर धर्म परिवर्तन कराते हैं। और जब इनके पास राजनीतिक समर्थन होता है (जैसे गोवा में इन्हें पुर्तगालियों का था) वहां इन लोगों के अत्याचारों की कोई सीमा नहीं रहती।
ज़ेवियर की तरह आज भी कई दुर्जन लोग संत का चोला पहनकर घूम रहे हैं। राजनीतिक समर्थन ना होने पर यह लोग बहला-फुसलाकर धर्म परिवर्तन कराते हैं। और जब इनके पास राजनीतिक समर्थन होता है (जैसे गोवा में इन्हें पुर्तगालियों का था) वहां इन लोगों के अत्याचारों की कोई सीमा नहीं रहती।

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