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@AyurvedaTalks

24 تغريدة 28 قراءة Apr 08, 2023
रोजाना छाछ पीने के चमत्कारी फायदे
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छाछ क्या होता है ?
दही में जब ज्यादा पानी मिलाकर बिलोया (मथा) जाए और उसके ऊपर से मक्खन निकालकर फिर पानी मिलाया जाए, इस प्रकार खूब पतले बनाये गये दही को छाछ कहते हैं।
★ छाछ के गुण
• खट्टी (सोंठ तथा सेंधानमक से युक्त) छाछ पित्त पर, शक्कर मिला हुआ छाछ वात वृद्धि पर और सोंठ, कालीमिर्च एवं पीपरयुक्त छाछ कफवृद्धि पर उत्तम है।
• नमक के साथ छाछ को पीने से पाचनशक्ति बढ़ती है।
• छाछ जहर, उल्टी, लार के स्राव, विषमज्वर, पेचिश, मोटापे, बवासीर, मूत्रकृच्छ, भगन्दर, मधुमेह, वायु, गुल्म, अतिसार, दर्द, तिल्ली, प्लीहोदर, अरुचि, सफेद दाग, जठर के रोगों, कोढ़, सूजन, तृषा (अधिक प्यास) में लाभदायक और पेट के कीड़ों को नष्ट करने वाली होती है।
• सर्दी के मौसम में, अग्निमान्द्य में (भूख का कम लगना), वायुविकारों में (गैस के रोग में), अरुचि में, रस वाहनियों के अवरोध में छाछ अमृत के समान लाभकारी होती है। - चरक
• अरुचि मन्दाग्नि और अतिसार में छाछ को अमृत के समान मानते हैं । - सुश्रुत
• छाछ को मधुर, खट्टी, कषैली, गर्म, लघु, रूक्ष, पाचनशक्तिवर्द्धक, जहर, सूजन, अतिसार, ग्रहणी, पाण्डुरोग (पीलिया), बवासीर, प्लीहा रोग, गैस, अरुचि, विषमज्वर, प्यास, लार के स्राव, दर्द, मोटापा, कफ और वायुनाशक मानते हैं।
• जिसमें से सारा मक्खन निकाल लिया गया हो, वह छाछ हल्की तथा जिसमें से थोड़ा सा मक्खन निकाल गया हो वह कुछ भारी और कफकारक होती है और जिसमें से जरा सा भी मक्खन न निकाला गया हो वह छाछ भारी पुष्टदायक और कफकारक है।
• छाछ पचने में हल्की, पित्त, थकान तथा तृषानाशक (प्यास दूर करना), वायुनाशक और कफकारक है।
★ छाछ पिने के फायदे / लाभ :
1) कब्ज : छाछ में पिसी हुई अजवाइन को मिलाकर पीने से कब्ज दूर हो जाती है।
2) मुंह के छाले : दही के पानी या मट्ठे से कुल्ले करने से मुंह के छाले ठीक हो जाते हैं।
3) दस्त : जीरे और चीनी को पीसकर बने चूर्ण को छाछ के साथ पीने से अतिसार (दस्त) का आना बंद हो जाता है।
4) अग्निमांद्यता होने पर : लगभग 100 मिलीलीटर छाछ में 360 मिलीग्राम से 480 मिलीग्राम कालीमिर्च मिलाकर पीने से अग्निमांद्यता (भूख का कम लगना) में लाभ होता है।
5) मूत्ररोग : 360 मिलीग्राम से 480 मिलीग्राम पुराने गुड़ को छाछ के साथ खाने से मूत्रकृच्छ (पेशाब में जलन) और सुजाक रोग में लाभ होता है। ककड़ी के बीज को छाछ के साथ या सुहागा 240 से 360 मिलीग्राम चूर्ण करके छाछ के साथ सेवन करने से मूत्रकृच्छ (पेशाब में जलन) में लाभ करता है।
6) पथरी : गाय के दूध की छाछ में 10 ग्राम जवाखार मिलाकर पीने से पथरी गलकर निकल जाती है।
7) लू का लगना : छाछ में नमक डालकर पीने से लू लगने से बचा जा सकता है।
8) बवासीर : गाय की छाछ में कालीमिर्च सोंठ, पीपर और बीड़ लवण का चूर्ण मिलाकर पीने से बवासीर में लाभ होता है।
9) अजीर्ण : घी, तेल और मूंगफली अधिक खाने से अजीर्ण का कष्ट होने पर छाछ पीने से लाभ मिलता है।
10) भांग का नशा : खट्टी छाछ पीने से भांग का नशा उतर जाता है।
11) मोटापा : छाछ पीने से मोटापा कम हो जाता है।
12) अपच: भोजन का न पचना के रोग में छाछ एक सर्वोत्तम औषधि है। तली, भुनी, गरिष्ठ चीजों को पचाने छाछ बहुत ही लाभकारी होती है। छाछ आंतों में स्वास्थ्यवर्द्धक कीटाणुओं की वृद्धि करता है। यह आंतों में सड़ान्ध को रोकती है। छाछ में सेंधानमक, भुना हुआ जीरा तथा कालीमिर्च पीसकर सेवन करे।
13) सौंदर्यवर्द्धक : छाछ से चेहरा धोने से चेहरे की कालिमा, मुंहासे के दाग और चिकनाहट दूर होती है और चेहरा सौंदर्यवान (चमकदार) बनता है।
15) संग्रहणी : संग्रहणी सदृश्य (दस्त) रोगों में रोगियों को गाय के दूध की छाछ में सोंठ और पीपर का चूर्ण डालकर पिलाने से लाभ होता है।
16) रक्तविकार : गाय की ताजा, फीकी छाछ पीने से रक्तवाहनियों (खून की नलियों) का खून साफ हो जाता है और रस बल तथा पुष्टि बढ़ती है तथा शरीर की चमक बढ़ जाती है। इससे मन प्रसन्न होता है तथा यह वात, कफ संबन्धी रोगों को नष्ट करती है।
17 ) जलोदर : छाछ में सोंठ, कालीमिर्च और पीपल का 240 मिलीग्राम पिसा हुआ चूर्ण और 1 ग्राम सेंधानमक डालकर पीने से जलोदर (पेट मे पानी भरना) ठीक हो जाता है।
18) पेट के कीड़े : नमक और कालीमिर्च को पीसकर बारीक चूर्ण बनाकर रख लें, फिर इस चूर्ण को छाछ में मिलाकर रोजाना 4 दिन तक पीये।
19) पेट में दर्द : छाछ में शक्कर (चीनी) और कालीमिर्च को मिलाकर पीने से पित्त के कारण होने वाला पेट का दर्द शांत हो जाता है।
20). निम्नरक्तचाप : रोजाना सुबह-शाम 200-200 मिलीलीटर छाछ पीने से निम्नरक्तचाप सामान्य हो जाता है।
21) पीलिया : पीलिया रोग में लगभग 1 ग्राम चिमक की जड़ का चूर्ण, आधा ग्राम फिरमानी अजवाइन (चौर) के चूर्ण को छाछ में मिलाकर पीने से लाभ होता है।
22) सफेद दाग होने पर : सफेद दागों के रोग में रोजाना 2 बार छाछ पीने से बहुत ही लाभ मिलता है।
23) सिर का दर्द : छाछ में कूठ रेण्डी की जड़ और सौंठ को पीसकर करके हल्का गर्म करके माथे पर लेप की तरह से लगाने से सिर का दर्द दूर हो जाता है।
24) अरुषिका (वराही) : छाछ के काढ़े से सिर को बार-बार धोकर किसी भी चीज का लेप लगायें जो इस बीमारी में लाभदायक हो
25) जिगर की खराबी : 1-1 गिलास छाछ को दिन में 2-3 बार पीने से और कुछ न खाने से जिगर की खराबी दूर हो जाती है।
26) मूत्रकृच्छ : छाछ में गुड़ मिलाकर पीने से मूत्रकृच्छ (पेशाब में जलन) मिट जाता है।
27) दाद : छाछ में ग्वारपाठे के बीजों को मिलाकर दाद पर लगाने से ठीक हो जाता है।
28) पेट का भारीपन : सोंठ, कालीमिर्च, पीपल और कालानमक को बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को छाछ में मिलाकर पीने से पेट का भारीपन और अजीर्ण रोग (भूख न लगना) समाप्त हो जाता है।
29) रक्तातिसार (खूनी दस्त) : छाछ में चित्रक की जड़ का चूर्ण मिलाकर पीने से पेचिश (खूनी दस्त) में लाभ मिलता है।
30) मलस्तम्भन : छाछ में अजवायन और नमक मिलाकर पीने से मलावरोध मिट जाता है।
32) दांत निकलना : गर्मी में बच्चे को दांत निकालते समय दिन में 2 से 3 बार छाछ पिलायें। इससे दांत निकलते समय बच्चों को दर्द नहीं होता है।

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