सा विद्या या विमुक्तये
सा विद्या या विमुक्तये

@Sanatan_Science

9 تغريدة 22 قراءة Apr 01, 2023
🔴Astrology & Remedies🔴
राहु
ज्योतिष में राहु भ्रम है और भ्रम का कोई अंत नहीं, राहु अनंत फैला नीला आसमान है।राहु छाया है। राहु मन का विचार है। अनदेखा डर राहु ही है। जो आपको सताता है वो भय भी राहु ही है,ससुराल पक्ष से आपका अच्छा बुरा सम्बन्ध भी राहु है।
तो इस अनजाने भय (राहु) पर चर्चा करते हैं।
शरीर मे रोग की जटिलता और फैलाव राहु से देखा जाता है।
कोशिकाओं की अनियमित वृद्धि(कैंसर) की स्थिति में राहु दृष्टि/नक्षत्र/भाव/दशा-अंतर्दशा कहीं से भी अवश्य प्रभाव दे रहा होता है।
शुभ में राहु तीक्ष्ण बुद्धि, ज्ञान का विस्तार (रिसर्च)में अष्टमभाव/अष्टमेश/ के साथ राहु के योग भी देखे गए हैं। वहीं दूषित राहु मूर्खतापूर्ण निर्णय से हुआ नुकसान है और अलग अलग ग्रहों के साथ इसके परिणाम भी अलग अलग होते हैं।
राहु के अच्छे प्रभाव अनायास मिलने वाले लाभ/कहीं फसा हुआ धन-संपत्ति मिलना/लॉटरी/शेयर बाजार इत्यादि में भी सहायक होते हैं।राहु के दुष्प्रभाव विवेकहीन निर्णय/अनजान भय/ इंसोमेनिया/दुःस्वप्न/अंधेरे में सांप कीड़े के डर का आभास देते हैं। चन्द्रमा- राहु योग ADHD, Autism भी दिखाता है।
उपाय-
दूर्वा राहु ग्रह की समिधा है दूर्वा स्तनपान करने वाली माँ में प्रोलेक्टिन हार्मोन बढ़ाती है। फ्लेवनाइड का मुख्य प्रधान स्रोत होता है। जिसके कारण यह अल्सर रोग को रोकने में मदद करती है।
इसमें एन्टीवायरल और एन्टी माइक्रोबियल (रोगाणुरोधी बीमारी को रोकने की क्षमता) गुण होने के कारण यह शरीर के किसी भी बीमारी से लड़ने की क्षमता बढ़ाता है। एन्टी इन्फ्लेमेटरी (सूजन और जलन को कम करने वाला) एन्टीसप्टिक गुण होने के कारण त्वचा सम्बन्धी कई समस्याओं जैसे खुजली,
त्वचा पर चकत्ते और एक्जिमा आदि समस्याओं से राहत दिलाने में मदद करती है। दूर्बा घास को हल्दी के साथ पीसकर पेस्ट बनाकर त्वचा के ऊपर लगाने से त्वचा सम्बन्धी कुछ समस्याओं से राहत मिलती है। कुष्ठ रोग और खुजली जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में सहायता करती है।एनीमिया में इसका रस लेते हैं
भ्रम को केवल ज्ञान से जीता जा सकता है तो सरस्वती आराधना, गणपति जी का पूजन करें। गणपति को दूर्वा चढ़ायें
कई स्तोत्र में कहा गया है।
"यो दूर्वाङ्कुरैर्यजति ।
स वैश्रवणोपमो भवति ।"
अर्थात जो दूर्वांकुरों से गणपति का अर्चन करता है वो कुबेर के समान (अनंत) धन प्राप्त करता है।
दान-सतनाजा, कंबल, तिल से भरा लोहे का पात्र, उड़द, सरसों, नारियल, तेल, नीला कपड़ा और शीशा है।
👉दान आयुर्वेदिक उपाय इत्यादि करने से पहले योग्य ज्योतिष से अवश्य सलाह लें।फलकथन भाव/ग्रह स्थिति/दृष्टि संबंध/गोचर/दशा-अन्तर्दशा पर होता है केवल एक ग्रह से कुंडली का फलकथन असम्भव है

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