एसिडिटी #Thread
✰ एसिडिटी में क्या खाना चाहिए ?
• तोरई, टिण्डा, परवल, पालक, मेथी, मूली, आंवला, नारियल का पानी, पेठे का मुरब्बा, आंवले का मुरब्बा, अमरूद, पपीता आदि का सेवन करना अम्लपित्त के रोगियों के लिए लाभकारी होता है।
• तोरई, टिण्डा, परवल, पालक, मेथी, मूली, आंवला, नारियल का पानी, पेठे का मुरब्बा, आंवले का मुरब्बा, अमरूद, पपीता आदि का सेवन करना अम्लपित्त के रोगियों के लिए लाभकारी होता है।
• पुराने शालि चावल, पुरानी जौ, पुराने गेहूं, बथुआ का साग, करेला, लौंग, केला, अंगूर, खजूर, चीनी, घी, मक्खन, सिंघाड़ा, खीरा, अनार, सत्तू, केले का फूल, चीनी, कैथ, कसेरू, दाख, पका पपीता, बेलफल, सेंधानमक, पेठे का मुरब्बा, नारियल का पानी।
• रात को भोजन अपने सामान्य भूख से थोड़ा कम ही करना चाहिए और भोजन करने के बाद थोड़ी देर घूमना चाहिए व ढीले कपड़े पहनकर सोना चाहिए।
✰ एसिडिटी में क्या नहीं खाना चाहिए ?
1. चाय, कॉफी, तले भोजन, खीर और हलवा का कम से कम सेवन करना चाहिए।
2. बासी या ज्यादा समय से रखा हुआ खाना, मिर्च-मसालेदार खाना, भारी भोजन, मिठाइयां, लालमिर्च, खटाई, अधिक नमक आदि का सेवन कम मात्रा में करना चाहिए।
1. चाय, कॉफी, तले भोजन, खीर और हलवा का कम से कम सेवन करना चाहिए।
2. बासी या ज्यादा समय से रखा हुआ खाना, मिर्च-मसालेदार खाना, भारी भोजन, मिठाइयां, लालमिर्च, खटाई, अधिक नमक आदि का सेवन कम मात्रा में करना चाहिए।
3. गुड़, खट्टा और चरपरा रस, भारी और अम्ल द्रव्य, नयी फसल का अनाज, शराब, अंडा, मछली, नहीं खाना चाहिए।
4. तिल का बीज, उड़द की दाल, कुल्थी के तेल में बना पदार्थ, दही, बकरी का दूध, कचौड़ी, पराठे, बेसन से बना पदार्थ, फूलगोभी, आलू, टमाटर, बैंगन आदि का कम से कम सेवन करना चाहिए।
4. तिल का बीज, उड़द की दाल, कुल्थी के तेल में बना पदार्थ, दही, बकरी का दूध, कचौड़ी, पराठे, बेसन से बना पदार्थ, फूलगोभी, आलू, टमाटर, बैंगन आदि का कम से कम सेवन करना चाहिए।
5. अम्लपित्त के रोग से पीड़ित रोगी को अधिक परिश्रम व अधिक स्त्री-प्रसंग से बचना चाहिए।
6. मानसिक अंशाति, गुस्सा, दिन में सोना, रात को जागना और मल-मूत्र का वेग रोकना अम्लपित्त के रोगियों के लिए बहुत हानिकारक होता है।
6. मानसिक अंशाति, गुस्सा, दिन में सोना, रात को जागना और मल-मूत्र का वेग रोकना अम्लपित्त के रोगियों के लिए बहुत हानिकारक होता है।
Home Remedies for Acidity :
1. फालसा : गैस और एसिडिटी के रोग से पीड़ित रोगी को फालसे का सेवन करना चाहिए।
2. आंवला : आंवले का 2 चम्मच रस और 2 चम्मच मिश्री मिलाकर पीने से अम्लता (acidity) व खट्टी डकारे(khatti dakar) दूर होती है।
1. फालसा : गैस और एसिडिटी के रोग से पीड़ित रोगी को फालसे का सेवन करना चाहिए।
2. आंवला : आंवले का 2 चम्मच रस और 2 चम्मच मिश्री मिलाकर पीने से अम्लता (acidity) व खट्टी डकारे(khatti dakar) दूर होती है।
3. आलू : आलू की प्रकति क्षारीय होता है जो अम्लता को कम करता है। जिसे अम्लपित्त का रोग हो, खट्टी डकारे आती हो और वायु (गैस) अधिक बनती हो उसे भुने हुए आलू खाना चाहिए। इससे अम्लता के रोग में जल्दी आराम मिलता है। इसमें पोटेशियम साल्ट भी होता है जो अम्लता (एसिडिटी) को कम करता है।
4. संतरा संतरे के 100 मिलीलीटर रस में थोड़ा-सा भुना पिसा हुआ जीरा मिलाकर पीने से अम्लपित्त नष्ट होता है।
5. दूध : आधे गिलास कच्चे दूध में आधा गिलास पानी व 2 पिसी हुई छोटी इलायची का चूर्ण डालकर सुबह पीने से अम्लपित्त में लाभ मिलता है।
5. दूध : आधे गिलास कच्चे दूध में आधा गिलास पानी व 2 पिसी हुई छोटी इलायची का चूर्ण डालकर सुबह पीने से अम्लपित्त में लाभ मिलता है।
6. शहद : धनिया तथा जीरे का चूर्ण शहद के साथ खाने से खट्टी उल्टी आनी बंद होती है।
7. धान (चावल) : धान का लावा से बनने वाले सत्तू, चीनी और पानी मिलाकर खाने से अम्लपित्त के रोग में लाभ मिलता है।
7. धान (चावल) : धान का लावा से बनने वाले सत्तू, चीनी और पानी मिलाकर खाने से अम्लपित्त के रोग में लाभ मिलता है।
8. करौंदे : करौंदे का रस आधा चम्मच और पिसी हुई इलायची 2 चुटकी मिलाकर सेवन करने से अम्लता (एसिडिटी / Acidity) का रोग ठीक होता है।
9. अनार : 10-10 मिलीलीटर अनार का रस दिन में 2 बार सेवन करने से डकारे व उल्टी में आराम मिलता है।
9. अनार : 10-10 मिलीलीटर अनार का रस दिन में 2 बार सेवन करने से डकारे व उल्टी में आराम मिलता है।
10. त्रिफला (हरड़, बडेड़ा और आंवला) :
" त्रिफला चूर्ण ” आधा-आधा चम्मच दिन में " 2 से 3 बार पानी के साथ लेने से एसिडिटी / Acidity में लाभ मिलता है।
11. गाजर : खून में अम्ल की मात्रा बढ़ जाने पर गाजर का रस प्रतिदिन पीना अत्यंत लाभकारी होता है।
" त्रिफला चूर्ण ” आधा-आधा चम्मच दिन में " 2 से 3 बार पानी के साथ लेने से एसिडिटी / Acidity में लाभ मिलता है।
11. गाजर : खून में अम्ल की मात्रा बढ़ जाने पर गाजर का रस प्रतिदिन पीना अत्यंत लाभकारी होता है।
12. लौंग : प्रतिदिन खाना खाने के बाद लौंग चूसने से पेट की एसिडिटी / Acidity की शिकायत समाप्त होती है।
13. जौ : जौ काजू या मांड शहद के साथ सेवन करने गैस, डकार व मुंह में कडुवा पानी आना बंद होता है।
13. जौ : जौ काजू या मांड शहद के साथ सेवन करने गैस, डकार व मुंह में कडुवा पानी आना बंद होता है।
14. मूली :यदि गर्मी के प्रभाव से खट्टी डकारे आती हो तो एक कप मूली के रस में मिश्री मिलाकर सेवन करें। इससे डकारें बंद हो जाती है।
15. पेठा : अम्लपित्त के रोगी को प्रतिदिन खाना खाने के बाद 2 डली पेठा खाना चाहिए। पेठा से आमाशय व आहार नली की जलन दूर होती है।
15. पेठा : अम्लपित्त के रोगी को प्रतिदिन खाना खाने के बाद 2 डली पेठा खाना चाहिए। पेठा से आमाशय व आहार नली की जलन दूर होती है।
16. केला : केले पर चीनी और इलायची डालकर खाने से अम्लपित्त के रोग में आराम मिलता है।
17. मुलेठी : मुलेठी का चूर्ण 3-3 ग्राम सुबह-शाम सेवन करने से अमाशय की अम्लपित्त और पेट का दर्द दूर होता है।
17. मुलेठी : मुलेठी का चूर्ण 3-3 ग्राम सुबह-शाम सेवन करने से अमाशय की अम्लपित्त और पेट का दर्द दूर होता है।
18. कुलंजन : आधे-आधे ग्राम के कुलंजन का टुकड़े खाना खाने के बाद चूसने से पाचन ठीक से होता है और गैस दूर होती है।
19. नारियल : नारियल की गिरी की राख को 6 ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन सुबह सेवन करने से अम्लपित्त की बीमारियां दूर होती है।
19. नारियल : नारियल की गिरी की राख को 6 ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन सुबह सेवन करने से अम्लपित्त की बीमारियां दूर होती है।
20. प्याज : 60 ग्राम सफेद प्याज के टुकड़े को 30 ग्राम दही में मिलाकर दिन में 3 बार खाने से 7 दिनों अम्लपित्त का रोग ठीक हो जाता है।
21. जीरा : जीरा का चूर्ण 5 ग्राम को गुड़ के साथ सेवन करने से अम्लपित्त का रोग ठीक होता है।
21. जीरा : जीरा का चूर्ण 5 ग्राम को गुड़ के साथ सेवन करने से अम्लपित्त का रोग ठीक होता है।
22. कालीमिर्च : कालीमिर्च और स्वाद के अनुसार सेंधानमक मिलाकर पीसकर आधा चम्मच सुबह-शाम खाना खाने बाद फांकी लेने से अम्लपित्त में आराम मिलता है।
23. धनिया : हरे धनिए को पानी में पीसकर इसमें कालानमक मिलाकर पीने से अम्लपित्त का रोग ठीक होता है।
23. धनिया : हरे धनिए को पानी में पीसकर इसमें कालानमक मिलाकर पीने से अम्लपित्त का रोग ठीक होता है।
24. अदरक :अदरक और धनिया बराबर मात्रा में लेकर पीसकर पानी के साथ पीने से अम्लपित्त में लाभ मिलता है।
25. यवक्षार : यवक्षार देशी घी या शहद के साथ सुबह- शाम सेवन करने से अम्लपित्त दूर होता है।
25. यवक्षार : यवक्षार देशी घी या शहद के साथ सुबह- शाम सेवन करने से अम्लपित्त दूर होता है।
26. अजवायन : एक चम्मच पिसी हुई अजवायन को एक गिलास पानी व एक नींबू का रस मिलाकर पीने से अम्लपित्त में लाभ मिलता है।
27. बड़ी हरड़ : बड़ी हरड़ के चूर्ण में एक ग्राम का चौथाई भाग जवाखार मिलाकर सुबह-शाम 3-3 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से लाभ मिलता है।
27. बड़ी हरड़ : बड़ी हरड़ के चूर्ण में एक ग्राम का चौथाई भाग जवाखार मिलाकर सुबह-शाम 3-3 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से लाभ मिलता है।
28. हरड़ : हरड़ के 2 ग्राम चूर्ण को शहद के साथ मिलाकर बच्चे को चटाने से अम्लपित्त में लाभ मिलता है।
29. बिजौरा नींबू : 20 ग्राम बिजौरा नींबू के रस को प्रतिदिन शाम को पीने से अम्लपित्त दूर होता है।
29. बिजौरा नींबू : 20 ग्राम बिजौरा नींबू के रस को प्रतिदिन शाम को पीने से अम्लपित्त दूर होता है।
30. नींबू : नींबू का रस गर्म पानी में डालकर शाम को पीने से अम्लपित्त समाप्त होता है।
31. गिलोय : गिलोय, नीम के पत्ते और कड़वे परवल के पत्ते को पीसकर शहद के साथ पीने से अम्लपित्त समाप्त होता हैं।
32. नीम : नीम के पत्ते और आंवले का काढ़ा बनाकर पीने से अम्लपित्त ठीक होता है।
31. गिलोय : गिलोय, नीम के पत्ते और कड़वे परवल के पत्ते को पीसकर शहद के साथ पीने से अम्लपित्त समाप्त होता हैं।
32. नीम : नीम के पत्ते और आंवले का काढ़ा बनाकर पीने से अम्लपित्त ठीक होता है।
33. चूना : चूने का साफ पानी 10 मिलीलीटर की मात्रा में पीने से अम्लपित्त और बदहजमी दूर होती है।
34. गुलाबजल : गुलाबजल में गुलाब का फूल, एक इलायची और एक चम्मच धनिये का चूर्ण मिलाकर भोजन करने के बाद सेवन करने से अम्लपित्त का रोग ठीक होता है।
34. गुलाबजल : गुलाबजल में गुलाब का फूल, एक इलायची और एक चम्मच धनिये का चूर्ण मिलाकर भोजन करने के बाद सेवन करने से अम्लपित्त का रोग ठीक होता है।
35. काला चना : काले चने में कालीमिर्च मिलाकर पीसकर चटनी बनाकर खाने से अम्लपित्त का रोग ठीक होता है।
36. दाख : दाख, हरड़, छोटी पीपल, जवासा, धनिया और मिश्री बराबर मात्रा में पीसकर चूर्ण बनाकर शहद के साथ सेवन करने से अम्लपित्त में लाभ मिलता है।
36. दाख : दाख, हरड़, छोटी पीपल, जवासा, धनिया और मिश्री बराबर मात्रा में पीसकर चूर्ण बनाकर शहद के साथ सेवन करने से अम्लपित्त में लाभ मिलता है।
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