सा विद्या या विमुक्तये
सा विद्या या विमुक्तये

@Sanatan_Science

5 تغريدة Mar 10, 2023
कैसे ग्रहों नक्षत्रों की शुभता अशुभता हर कुंडली के लिए अलग हो जाती है?
#LongThread
#Astrology
जिस तरह से सूर्य का प्रकाश और चंद्रमा की शीतलता सभी को एक समान रूप से मिलती है उसी तरह अन्य ग्रहों को ऊर्जा जो कि हमे दिखाई या साधारण रूप से महसूस तो नही होती पर वो सबके लिए समान है।
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ज्योतिष शास्त्र में ग्रह नक्षत्रों का अध्यन किसी व्यक्ति के जन्म के समय आकाशमंडल पर ग्रहों की उपस्थिति पर निर्भर करती है और जन्म के समय ग्रह नक्षत्रों की स्थिति का स्क्रीनशॉट ही व्यक्ति की कुंडली बन जाता है।
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कोई ग्रह आपको कैसे प्रभावित कर रहा है ये उसकी कुंडली मे स्थिति और स्वामित्व पर निर्भर करेगा। अगर ग्रह शुभ भावों का स्वामी होकर शुभ और मजबूत स्थिति में हो तो जातक को उसके अधिकतम शुभ फल प्राप्त होंगे। इसके विपरीत स्थिति में ग्रह नकारात्मक रूप से व्यक्ति को प्रभावित करता है।
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अगर गुरु ग्रह शुभ स्थिति में हो तो व्यक्ति को अच्छा सलाहकार, धीर-गंभीर, उच्चपद, सम्मानीय बनाता है और वही अगर रोग/शत्रु भाव से संबंध बना ले तो लिवर,हार्मोन संबंधी रोग, वाणी में अत्यधिक अहम देके व्यक्ति को लोगों की नज़र में नकारात्मक छवि बना देगा।
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ये ग्रह, ग्रह स्थिति और उसके कारक तत्वों को समझने का उदाहरण है कुंडली अध्यन बहुत सारी बातों पर निर्भर करता है।हर व्यक्ति के लिए ग्रह अपनी दृष्टिसंबंध,भाव, अंशों,षोडशवर्ग, महादशा,गोचर, नक्षत्रों और राशि आदि के आधार पर अलग अलग शुभ या अशुभ फल देने वाला हो जाता है।
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