महाप्रभु (मुकूंद)
महाप्रभु (मुकूंद)

@Aatma_the_soul4

11 تغريدة 7 قراءة Jan 22, 2023
'स्त्रीराज्य' अर्थात स्त्रीयों द्वारा शासित राज्य।
ये वे राज्य थे जिनका शासन, प्रशासन, संरक्षण, सैन्य जैसे सभी क्षेत्रों का संचलन स्त्रीयां करती थी।
प्राचीन भारतीय ऐतिहासिक व साहित्यिक ग्रंथों मे 'स्त्रीराज्यों' का उल्लेख बहुतायत मे मिलता है।
१]
स्त्रीराज्यों की उपस्थिती को जानने के लिऐ कुछ उदाहरण उल्लेखनीय है।
वात्स्यायन के कामसूत्र मे स्त्रीराज्य को वज्रवन्तदेश के पश्चिम मे होने का उल्लेख मिलता है। अर्थात वात्स्यायन के समय मे स्त्रीराज्य अस्तित्व मे था।
"वज्रवन्तदेशतः पश्चिमेन स्त्रीराज्यम"
२]
कौटिल्य के अर्थशास्त्र मे भी स्त्रीराज्य का उल्लेख आया है। कौटिल्य करभूमी के संदर्भ मे स्त्रीराज्य का उल्लेख करते है।
"स्त्रीराजञ्चेति पुनस्तस्याकरभूमयोभिहिताः।।"
३]
महाभारत के शांतिपर्व मे भी स्त्रीराज्य का उल्लेख है।
इस मे कलिंग की राजकन्या के स्वयंवर मोहोत्सव मे स्त्रीराज्य के प्रतिनिधी उपस्थित होने का वृत्तांत मिलता है
४]
वे स्त्रीराज्य कैसे थे ?
क्या वे बलशाली थे या बस नाम के राज्य?
क्या वे युद्धों मे भाग लेते थे ?
इन प्रश्नों के उत्तर जानने के लिऐ जैमिनी अश्वमेध के महाभारत कालिन एक रोचक प्रसंग को जानना जरुरी है।
बात उस समय की है जब हस्तिनापुर के राजा युधिष्ठिर अश्वमेध यज्ञ कर रहे थे।
५]
युधिष्ठिर के अश्वमेध का घोडा दौडता हुआ एक 'स्त्रीराज्य' मे जा पोहचा। जहां उस समय 'प्रमिला' नामक रानी शासन कर रही थी।
यह देख अर्जुन अपने साथियों से कहता है, "वीरो हमलोग स्त्रीराज्य मे आ गये है। यदि यहा की बलवती स्त्रीयों ने घोडे को पकड लिया तो बडा कष्ट उठाना पडेगा।"
६]
व्यवधान के बीच उस स्त्रीराज्य की सेना का एक दल वहा आ पोहचा, उस दल की सभी स्त्रीयां घोडों पर सवार थी।
उनमे से एक स्त्री तत्क्षण अर्जुन के अश्व को ले भागी।
७]
इससे अर्जुन क्रोधित हो गया, बात युद्ध तक जा पोहची। रानी प्रमिला अपनी सेना के साथ युद्धक्षेत्र मे उतरी।
एक लाख स्त्रीयां अश्वारूढ हुई, एक लाख स्त्रीयां हथियारों पर और अन्य एक लाख स्त्रीयां रथों पर सवार थी।
इस प्रकार तीन लक्ष स्त्रीसेना रणक्षेत्र मे अर्जुन को घर कर खडी हुई।
८]
रानी प्रमिला और अर्जुन के मध्य भीषण युद्ध छिड गया, बाणों की वर्षा होने लगी।
परंतु अर्जुन स्त्रीवध नही करना चाहता था अतः अर्जुन प्रमिला के साथ संधी कर लेता है और अपने अगले गंतव्य की ओर चला जाता है।
९]
यह उदाहरण स्त्रीराज्य के प्रशासनिक तथा सैनिकी धरातल पर एक स्वतंत्र और सफल संस्था होने की पुष्टी करता है।
वात्स्यायन तथा कौटिल्य के विवरण दर्शाते है की, स्त्रीराज्य साहित्य और ऐतिहास मे निरंतर चर्चा मे रहे थे।
१०]
प्राचीन भारत की शिक्षा प्रणाली मे स्त्री का स्थान -

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