महाप्रभु (मुकूंद)
महाप्रभु (मुकूंद)

@Aatma_the_soul4

5 تغريدة 6 قراءة Mar 05, 2023
पाणिनीकालिन छात्राओं का वर्गीकरण
व्याकरणानुसार-
पाणिनी के काल मे छात्राओं के वर्गीकरण मे व्याकरण के अनुसार वर्गीकरण की पद्धती के संकेत मिलते है।
अपिशलिय व्याकरण का अध्ययन करनेवाली स्त्री को 'अपिशला' तथा काशकृत्स्निय व्याकरण का अध्ययन करनेवाली स्त्री काशकृत्स्ना कही जाती थी।
शाखानुसार वर्गीकरण -
वेदिक शाखाओं के अनुसार अध्ययन कर्ता स्त्रीयों का वर्गीकरण होता था।
यजुर्वेदिया कठ शाखा की स्त्रीयों को 'कठी' तथा बह्वृच चरण मे दिक्षीत स्त्रीयां
बह्वृची कहलाती थी। 'बह्वृची' का शाब्दिक अर्थ होता है, बहुत ऋचाओं का अध्ययन करनेवाली।
जातेरस्त्रीविषयादयोपधात् ४।१।६३ इस सुत्र की व्याख्या मे प्रस्तुत ङिंष प्रत्ययधारी शब्दों का उदाहरण दिया जाता रहा है, महर्षी पतंजलि, हेमचन्दर तथा भट्टोजी दाक्षीत तक प्रसिद्ध वैयाकरणों ने इन उदाहरणों का उपयोग कीया है।
इन विद्यार्थिनीयों का मार्गदर्शन करनेवाली भी स्त्रीयां ही होती थी।
ऋषी पाणिनी कतिपय सुत्रों मे 'अयन' प्रत्ययधारी शब्दों का प्रयोग करते है। जेसे की, ऋषी पतंजलि ने अपने भाष्य मे उपाध्यायानी, आचार्यानी जैसे उदाहरण दिऐ है।
प्रस्तुत सुत्र मे समानार्थी उपाध्यायी शब्द भी आता रहा है।
इन उदाहरणों से स्पष्ट होता है की, प्राचीन भारतीय समाज मे स्त्री शिक्षा की भी अपनी एक विशेष संरचना उपस्थित थी। स्त्रीयों के लिऐ छात्रानिवास (होस्टेल) तथा विषय के अनुसार अध्ययन विभाग भी अस्तित्व मे थे।

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