जातेरस्त्रीविषयादयोपधात् ४।१।६३ इस सुत्र की व्याख्या मे प्रस्तुत ङिंष प्रत्ययधारी शब्दों का उदाहरण दिया जाता रहा है, महर्षी पतंजलि, हेमचन्दर तथा भट्टोजी दाक्षीत तक प्रसिद्ध वैयाकरणों ने इन उदाहरणों का उपयोग कीया है।
इन उदाहरणों से स्पष्ट होता है की, प्राचीन भारतीय समाज मे स्त्री शिक्षा की भी अपनी एक विशेष संरचना उपस्थित थी। स्त्रीयों के लिऐ छात्रानिवास (होस्टेल) तथा विषय के अनुसार अध्ययन विभाग भी अस्तित्व मे थे।
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