अष्टाध्यायी मे अध्यात्मिक मार्गि युवतियों का भी उल्लेख मिलता है। ऐसी युवतियों को कुमारश्रमणा कहा गया है।
"कुमारः श्रमणादिभीः" ( २।१।७० )
२]
"कुमारः श्रमणादिभीः" ( २।१।७० )
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अध्यात्मिक मार्गी स्त्रीयों के लिऐ पण्डिता, परिव्रजा आदी शब्दों का भी प्रयोग कीया गया है।
ये विवरण दर्शाते है की, ऋषी पाणिनी के काल मे स्त्री शिक्षा एक सामान्य बात थी।
३]
ये विवरण दर्शाते है की, ऋषी पाणिनी के काल मे स्त्री शिक्षा एक सामान्य बात थी।
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This carving indicates that
Chhatrisalas were prevalent during Shunga period
Chhatrisalas were prevalent during Shunga period
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