शंकराचार्य V/S RSS - संघ - VHP तिकड़ी
1987-88 में चारों शंकराचार्यों को VHP द्वारा निमन्त्रण दिया गया अपनी एक धर्म सभा हेतु जो VHP आयोजित एक धर्म मंच था। सभी शंकराचार्यों को दूरभाष द्वारा सूचित किया गया व उन्होंने सहमति दे दी। परन्तु जब प्रिंटेड निमन्त्रण पत्र पहुंचा तो सभी
1987-88 में चारों शंकराचार्यों को VHP द्वारा निमन्त्रण दिया गया अपनी एक धर्म सभा हेतु जो VHP आयोजित एक धर्म मंच था। सभी शंकराचार्यों को दूरभाष द्वारा सूचित किया गया व उन्होंने सहमति दे दी। परन्तु जब प्रिंटेड निमन्त्रण पत्र पहुंचा तो सभी
शंकराचार्य अपमानित हुए क्योंकि कथित धर्मधर्मसभा मंच का मुख्य वक्ता वामपंथी बौद्ध मत के दलाई लामा को बनाया गया जिसके बारे में शंकराचार्यों को अवगत नही किया गया था।
वह दलाई लामा जो बौद्धों के वामपंथी पन्थ का प्रमुख है दक्षिणपंथ का भी नही। वह बौद्ध मत जिसको समाप्त करने में आद्यगुरु
वह दलाई लामा जो बौद्धों के वामपंथी पन्थ का प्रमुख है दक्षिणपंथ का भी नही। वह बौद्ध मत जिसको समाप्त करने में आद्यगुरु
शंकराचार्यजी ने अपना सर्वस्व न्यौछावर किया।
तत्पश्चात सभी शंकराचार्यों ने आपसी सहमति से VHP के धर्म-मंच में जाने का बहिष्कार किया। RSS-VHP ने इज्जत बचाने हेतु चार नकली शंकराचार्यों को मंच पर बिठा दिया व तबसे आरम्भ हुआ छद्म शंकराचार्य की फौज बनाने का कार्य जिसके तहत अब तक 450 से
तत्पश्चात सभी शंकराचार्यों ने आपसी सहमति से VHP के धर्म-मंच में जाने का बहिष्कार किया। RSS-VHP ने इज्जत बचाने हेतु चार नकली शंकराचार्यों को मंच पर बिठा दिया व तबसे आरम्भ हुआ छद्म शंकराचार्य की फौज बनाने का कार्य जिसके तहत अब तक 450 से
अधिक नकली शंकराचार्य अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने हेतु जन्मे हैं।
इस्लामी आक्रांताओं ने कभी प्रत्यक्ष रूप से शंकराचार्य परम्परा के साथ टकराव नही किया जबकि नागा अखाड़े हिन्दू राजाओं की ओर से युद्धों में भाग लेते थे। अंग्रेजों ने भी स्वयं कभी शंकराचार्य परम्परा से छेड़छाड़ नहीं की।
इस्लामी आक्रांताओं ने कभी प्रत्यक्ष रूप से शंकराचार्य परम्परा के साथ टकराव नही किया जबकि नागा अखाड़े हिन्दू राजाओं की ओर से युद्धों में भाग लेते थे। अंग्रेजों ने भी स्वयं कभी शंकराचार्य परम्परा से छेड़छाड़ नहीं की।
अपनी दूकान चलाने, व एकछत्र राज स्थापित करने हेतु संघ द्वारा देश में छद्म स्वयंभू शंकराचार्य भूमाफिया का अंग हैं।
आश्चर्य तो तब होता है जब एक सठियाया संघी साईं बाबा प्रकरण में शंकराचार्य को धर्म के विषयों में हस्तक्षेप न करने का बयान देते हैं। धर्म प्रदत्त विषयों के सन्दर्भ में
आश्चर्य तो तब होता है जब एक सठियाया संघी साईं बाबा प्रकरण में शंकराचार्य को धर्म के विषयों में हस्तक्षेप न करने का बयान देते हैं। धर्म प्रदत्त विषयों के सन्दर्भ में
शंकरचार्यो द्वारा नही बोला जाएगा तो कोई क्रिस्लामी म्लेच्छ आकर बोलेगा?
स्वयं स्व वाजपेयीजी एक छद्म शंकराचार्य को अमेरिका लेकर जाते हैं और उसका पुरी पीठ के शंकराचार्य के रूप में परिचय करवाते हैं सबसे जबकि उसी यात्रा की एक प्रेस कॉन्फ़्रेन्स में एक पत्रकार ने पूछ लिया था कि
स्वयं स्व वाजपेयीजी एक छद्म शंकराचार्य को अमेरिका लेकर जाते हैं और उसका पुरी पीठ के शंकराचार्य के रूप में परिचय करवाते हैं सबसे जबकि उसी यात्रा की एक प्रेस कॉन्फ़्रेन्स में एक पत्रकार ने पूछ लिया था कि
पुरी पीठ के शंकराचार्य निश्चलानंदजी तो इस समय भारत में ही हैं तो उसको झिड़का दिया गया।
कई नकली शंकरचार्य हैं जो विदेश यात्रा करते हैं, व्यापारिक प्रतिष्ठान,भूमाफिया आदि चलाते हैं संघ के वरदहस्त के चलते। शंकराचार्य स्वरूपानंदजी के विरुद्ध वासुदेवानन्द संघ द्वारा समर्थित पंगु है।
कई नकली शंकरचार्य हैं जो विदेश यात्रा करते हैं, व्यापारिक प्रतिष्ठान,भूमाफिया आदि चलाते हैं संघ के वरदहस्त के चलते। शंकराचार्य स्वरूपानंदजी के विरुद्ध वासुदेवानन्द संघ द्वारा समर्थित पंगु है।
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