पता नही क्या क्या स्टोरी लिखते है इन धारावाहिक के लेखक....कैसे कैसे डायलॉग।
20-25 साल के बच्चे मिलकर अपनी माँ की दूसरी शादी की तैयारी कर रहे है, हद है। पिता जीवित है, उनकी कहीं और सेटिंग चल रही है... अब उनकी माँ कम से कम 45-50 वर्ष की आयु में किसी और से शादी कर रही है।
20-25 साल के बच्चे मिलकर अपनी माँ की दूसरी शादी की तैयारी कर रहे है, हद है। पिता जीवित है, उनकी कहीं और सेटिंग चल रही है... अब उनकी माँ कम से कम 45-50 वर्ष की आयु में किसी और से शादी कर रही है।
एक ही बात बार बार कही जा रही है- भाई बहन आपस मे कह रहे है कि हम बड़े भाग्यशाली है कि हमे अपनी मम्मी की डोली सजाने के अवसर मिल रहा है, सबको यह अवसर नही मिलता।
अब उन्हें कौन समझाए की करमठोक हो तुम , हद दर्जे के बेफकूफ हो।
अब उन्हें कौन समझाए की करमठोक हो तुम , हद दर्जे के बेफकूफ हो।
ऐसे डायलॉग बार बार सुनकर देखकर दिमाग प्रदूषित होना स्वभाविक है। ब्रेन पॉल्यूशन करते धारावाहिक।
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