वाल्मीकिजी के उसका अध्यन करते वक्त झर-झर आंसू गिरने लगे, हनुमानजी की सरल सरस शैली में काव्य देखकर उनके मन में संशय हो आया कि इतनी अध्भुत काव्य रचना के बाद मेरी रामायण कोई नही पढ़ेगा (व्यर्थ हो जाएगी) तब हनुमानजी के उनसे आग्रह करके चिंता का कारण पूछा व उसे जानने के बाद हनुमानजी ने
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