दिल्ली का काला सच!
दिल्ली के 11 लाख घरों की कमर तोड़कर, बिजली मुफ़्त का झूठ बेचता है एक “आम आदमी”!
दिल्ली के 11 लाख घरों की कमर तोड़कर, बिजली मुफ़्त का झूठ बेचता है एक “आम आदमी”!
पिछले 7 सालों में बिजली कंपनियों की कमाई में कोई कमी नहीं आयी. हर साल 20 हज़ार करोड़ कमाती हैं कम्पनियाँ दिल्ली से
20 हज़ार करोड़ में से 16 हज़ार करोड़ का भुगतान दिल्ली के 11 लाख परिवारों की कमर तोड़कर होता है जो 10 रूपए यूनिट देते हैं, पूरे देश में सबसे ज़्यादा!
बाकी 4 हज़ार करोड़ का भुगतान दिल्ली सरकार करती हैं. ये पैसा आम आदमी पार्टी अपने फण्ड से नहीं देती, दिल्ली के टैक्सपेयर देते हैं. पिछले 7 सालों में सब्सिडी के नाम पर दिल्ली सरकार ने गरीब जनता के 28 हज़ार करोड़ कंपनियों को दिए हैं
बिजली मुफ़्त है के झूठ को फैलाने के लिए भी टैक्सपेयर के हज़ारों करोड़ विज्ञापनो पर खर्च किये जाते है. 2012 के मुक़ाबले 2022 तक दिल्ली सरकार के विज्ञापन बजट में 4200% की बढ़ोतरी हुई
सच यही है की दिल्ली में भ्रष्टाचार कम नहीं हुआ है, टैक्सपेयर को फ़ायदा नहीं हुआ. सिर्फ़ एक ठग गरीबों के स्कूल, अस्पताल, फ्लाईओवर का पैसा कुर्सी के लिए लुटा रहा है!
मैं दिल्ली की जनता, ख़ास तौर पर उन 11 लाख घरों से पूछना चाहता हूँ. क्या आप दिन रात इसलिए मेहनत करते हैं, खून पसीना बहाते हैं ताकि एक ठग कुर्सी पर बैठा रहे?
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