Manoj Singh™
Manoj Singh™

@ManojSDabas

4 تغريدة 952 قراءة Apr 28, 2023
यथा हि पुरुषः पश्येदादर्शे मुखमात्मनः।
एवं सुदर्शनद्वीपो दृश्यते चन्द्रमण्डले।।
द्विरंशे पिप्पलस्तत्र द्विरंशे च शशो महान्।।
अर्थ- जैसे पुरुष दर्पण में अपना मुख देखता है, उसी प्रकार यह द्वीप (पृथ्वी) चन्द्रमण्डल से दिखाई देता है।
इसके दो अंशों में पिप्पल (पीपल के पत्ते) और
दो अंशों में महान शश (खरगोश) दिखाई देता है |
मानचित्र का अनुवाद महाभारत के श्लोक से किया गया था जिसमें धृतराष्ट्र संजय से पूछते हैं कि अंतरिक्ष से दुनिया कैसी दिखती है। उनका कहना है कि यह ऐसा है जैसे दो पीपल के पत्ते जुड़ गए हों और एक खरगोश। इसे “ऋषि रामानुजाचार्य ने बनाया था।

جاري تحميل الاقتراحات...