कुरान पर चले थे केस....
बहुत कम लोग जानते हैं कि सन 1986 में दिल्ली में कुरान पर केस चला था. .......और कुरान की 26 आयतों को दिल्ली कोर्ट ने विवादित, अमानवीय एवम शर्मनाक घोषित किया था......उस समय जो जज थे उनका नाम जस्टिस z.s.Lohat था..
बहुत कम लोग जानते हैं कि सन 1986 में दिल्ली में कुरान पर केस चला था. .......और कुरान की 26 आयतों को दिल्ली कोर्ट ने विवादित, अमानवीय एवम शर्मनाक घोषित किया था......उस समय जो जज थे उनका नाम जस्टिस z.s.Lohat था..
हुआ ये था कि दिल्ली के पं.इन्द्रसेन शर्मा और राजकुमार आर्य नामक दो व्यक्तियों ने कुरान की आयतों को दीवारों पर लिखवा दिया था।
जिसमें लिखा था कि जो इस्लाम को न माने उसे कत्ल कर दो इत्यादि। ये सब देखकर मुस्लिम भड़क गए।
जिसमें लिखा था कि जो इस्लाम को न माने उसे कत्ल कर दो इत्यादि। ये सब देखकर मुस्लिम भड़क गए।
दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया। और दोनों को मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट जस्टिस लोहाट के सामने पेश किया गया।
दोनों की तरफ से यह दलील दी गयी कि हुज़ूर हमने वही लिखा है जो कुरान कहती है। जस्टिस लोहाट ने जजमेंट देने से पहले दिल्ली,यूपी के कई मुल्ला मौलवियों को सफाई देने के लिए बुलाया था
दोनों की तरफ से यह दलील दी गयी कि हुज़ूर हमने वही लिखा है जो कुरान कहती है। जस्टिस लोहाट ने जजमेंट देने से पहले दिल्ली,यूपी के कई मुल्ला मौलवियों को सफाई देने के लिए बुलाया था
किन्तु एक भी मुल्ला मौलवी हाज़िर न हुआ। बल्कि राजनीतिक दवाब बनाकर केस ही खारिज करने की कोशिश की जा रही थी क्योंकि हकीकत सामने आचूकी थी।
जस्टिस लोहाट ने अलग-अलग पब्लिकेशन की कुरान मंगवाई थी,जो हिंदी,उर्दू एवम अंग्रेज़ी भाषा में थी ताकि इंटरप्रिटेशन का प्रॉब्लम न हो।
जस्टिस लोहाट ने अलग-अलग पब्लिकेशन की कुरान मंगवाई थी,जो हिंदी,उर्दू एवम अंग्रेज़ी भाषा में थी ताकि इंटरप्रिटेशन का प्रॉब्लम न हो।
किन्तु एक भी मौलवी सामने न आया। जिस से सब कुछ साफ साफ साबित हो गया और जज साहब ने जजमेंट दिया।
31 जुलाई 1986 को जस्टिस लोहाट ने दोनो आरोपियों को बाइज्जत बरी करते हुए यहां तक कहा कि मौलवियों से अपील है कि वह इस किताब को बदलें।इसमें सुधार करें।ये ईश्वर की किताब कैसे हो सकती है?
31 जुलाई 1986 को जस्टिस लोहाट ने दोनो आरोपियों को बाइज्जत बरी करते हुए यहां तक कहा कि मौलवियों से अपील है कि वह इस किताब को बदलें।इसमें सुधार करें।ये ईश्वर की किताब कैसे हो सकती है?
इतना ही नहीं ,सन 1920 में जब मुस्लिम समुदाय ने ओछी हरकतें करते हुए, कृष्ण तेरी गीता जलानी पड़ेगी, का नारा दिया, तब उस समय इस्लाम के प्रकांड विद्वान चंपू पंडित ने किताब लिखी जिसका नाम था।
#रंगीला_रसूल ये किताब मोहम्मद पर थी।।
#रंगीला_रसूल ये किताब मोहम्मद पर थी।।
क्योंकि भगवान श्री कृष्ण तो महायोगी थे और उनकी गीता पूरी दुनिया के वैज्ञानिक पढ़ चुके हैं और सभी ने पढ़कर उसकी तारीफों में पुल बांधे।
चाहे महान आइंस्टीन हो या परमाणु बम का अविष्कार करने वाले ओपेनहेमर, जिन्होंने गीता का 11वां अध्याय पढ़ने के बाद परमाणु बम बनाया था।
चाहे महान आइंस्टीन हो या परमाणु बम का अविष्कार करने वाले ओपेनहेमर, जिन्होंने गीता का 11वां अध्याय पढ़ने के बाद परमाणु बम बनाया था।
किन्तु जब मोहम्मद पर ये "रंगीला_रसूल" किताब लिखी गई और मुस्लिम सम्प्रदाय भड़क उठा तब इलाहाबाद हाई कोर्ट में केस चला. उस समय अंग्रेज़ो का शासन था।
ब्रिटिश जज ने मुल्ला मौलवियों को बुलाया और पूछा कि इस किताब में क्या गलत है ?? सभी मुल्ला मौलवियों ने उस किताब को पूरा सही बताया।
ब्रिटिश जज ने मुल्ला मौलवियों को बुलाया और पूछा कि इस किताब में क्या गलत है ?? सभी मुल्ला मौलवियों ने उस किताब को पूरा सही बताया।
उसमें कुछ गलत नहीं बताया... और इस तरह चंपू पण्डित के खिलाफ केस खारिज कर दिया गया.किन्तु केस खत्म होने के बाद भी चंपू पण्डित पर मुस्लिम समुदाय द्वारा हमले जारी थे क्योंकि उन्होंने रसूल की सच्चाई जो बयां कर दी थी
हैरानी की बात ये है कि मीडिया ने कभी भी इस केस का आजतक जिक्र न किया
हैरानी की बात ये है कि मीडिया ने कभी भी इस केस का आजतक जिक्र न किया
भारतीय मीडिया वामपंथ की जकड़ में जो है मुस्लिम परस्त। ये केस गूगल में भी बड़ी मुश्किल से ढूंढने से मिलता है।
क्योंकि नेहरू ने इन केसों को रिकॉर्ड से हटवाने की कोशिश की,बाद में दिल्ली केस जिसमें जस्टिस लोहाट ने कुरान के खिलाफ फैसला दिया था उसका जिक्र कलकत्ता हाई कोर्ट में किया।
क्योंकि नेहरू ने इन केसों को रिकॉर्ड से हटवाने की कोशिश की,बाद में दिल्ली केस जिसमें जस्टिस लोहाट ने कुरान के खिलाफ फैसला दिया था उसका जिक्र कलकत्ता हाई कोर्ट में किया।
और राजनीतिक दवाब ,कांग्रेस के राज के कारण तत्कालीन कलकत्ता उच्च न्यायालय ने जस्टिस लोहाट के फैसले को नजरअंदाज किया।
और इसे इस्लाम का व्यक्तिगत मुद्दा घोषित कर दिया।
और इसे इस्लाम का व्यक्तिगत मुद्दा घोषित कर दिया।
वहीं कृष्ण गीता में कहते हैं कि
ममैवांशो जीव लोके जीव भूत सनातनः
अर्थात संसार का प्रत्येक जीव मेरा अंश है एवम सनातन है अर्थात किसी से भी द्वेष मत करो चाहे वो मुझे मानता हो या न मानता हो।
ममैवांशो जीव लोके जीव भूत सनातनः
अर्थात संसार का प्रत्येक जीव मेरा अंश है एवम सनातन है अर्थात किसी से भी द्वेष मत करो चाहे वो मुझे मानता हो या न मानता हो।
यही कारण है कि आजतक श्रीमद्भगवद गीता के खिलाफ एक भी केस नही चला।
बल्कि आधुनिक अमेरिका के जनक एमर्सन कहते है कि मुझे मेरे सारे प्रश्नो का उत्तर बाइबिल एवम कुरान मे नही, बल्कि गीता में मिला। अपने धर्म को जाने बिना पहचान नही पाओगे, जितना घुसोगे उतना समझोगे ।
जय श्री राम 🙏🚩
बल्कि आधुनिक अमेरिका के जनक एमर्सन कहते है कि मुझे मेरे सारे प्रश्नो का उत्तर बाइबिल एवम कुरान मे नही, बल्कि गीता में मिला। अपने धर्म को जाने बिना पहचान नही पाओगे, जितना घुसोगे उतना समझोगे ।
जय श्री राम 🙏🚩
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